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पॉजिटिव न्यूज़: छत्तीसगढ़ का कोंडागांव अति नक्सल प्रभावित श्रेणी से बाहर !

कोंडागांव,07 अप्रैल। माओवादी समस्या का दंश झेल रहे छत्तीसगढ़ से उम्मीद भरी खबर सामने आ रही है। राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्र कोंडागांव को अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र से बाहर कर दिया गया है। माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में चलाये जा रहे नक्सल विरोधी अभियान के कारण यह संभव हो सका है।

कोंडागांव में सुधरे हालात

कोंडागांव में सुधरे हालात

नक्सली समस्या से जूझ रहे छत्तीसगढ़ के अति नक्सल प्रभावित जिले में शुमार रहने वाले कोंडागांव जिले में नक्सलियों का प्रभाव कम हुआ है। यहां बीते कुछ वर्षों में नक्सल वारदातों में भारी कमी दर्ज की गई है,जिसे देखते हुए केंद्र सरकार ने इस जिले को अति नक्सल प्रभावित जिलों की सूची से बाहर कर दिया है। अब केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने इस जिले को नक्सली समस्या के लिए मिलने वाली एल.डब्लू।ई राशि मिलनी बंद हो जाएगी।

केंद्र सरकार की तरफ से कोंडागांव को लेफ्ट विंग एक्सटेन्शन फंड यानि एल.डब्लू।ई के तहत मिलने वाली राशि को रोक दिया गया है। कोंडागांव कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा ने जानकारी देते हुए बताया कि कोंडागांव को केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय की समिति ने एल.डब्लू.ई के तहत अति नक्सल प्रभावित जिलों की लिस्ट में से बाहर जरूर कर दिया है, लेकिन इलाके की परिस्थितियों को चिंताजनक भी माना है।

नक्सली हैं बैकफुट पर

नक्सली हैं बैकफुट पर

छत्तीसगढ़ में पुलिस ने माओवादियों के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल कर रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में विभाग को माओवादी संगठनों के खिलाफ और भी सफलताएं मिलेंगी। मिली जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ के माओवादी प्रभावित बस्तर संभाग के सभी जिलों में पुलिस विभाग लगातार नक्सली संगठन को कमजोर करने की दशा में विशेष रणनीति बनाकर कर काम रहा है। एंटी नक्सल ऑपरेशन के दौरान ना केवल हथियारों से बल्कि माइंड गेम खेलकर भी माओवादी खेमे को कमज़ोर किया जा रहा है। गृह विभाग नई रणनीति का असर अब परिणाम बनकर सामने आने लगा है। यही कारण है कि माओवादी संगठन को लगातार बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।


छत्तीसगढ़ सरकार का दावा है कि राज्य में चलाये जा रहे नक्सल विरोधी अभियान और आत्मसमपर्ण नीति से प्रभावित होकर राज्य में माओवादी अभियान कमजोर पड़ने लगा है। राज्य सरकार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके बताया कि छत्तीसगढ़ पुलिस और अर्धसैनिक बलों की संयुक्त कार्रवाई में माओवादी समाज की मुख्यधारा की तरफ लौटते हुए नजर आ रहे हैं।

नक्सलवादी घटनाओं में आई लगभग 80 प्रतिशत की कमी:कांग्रेस

नक्सलवादी घटनाओं में आई लगभग 80 प्रतिशत की कमी:कांग्रेस

इधर सरकार की माओवादियों के हौसले पस्त होने के दावे के बीच छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा है कि केंद्र सरकार के जारी रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ में नक्सलवादी घटनाओं में लगभग 80 प्रतिशत की कमी है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सरकार की तरफ से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने विश्वास विकास और सुरक्षा के नीति के तहत काम किये जाने का परिणाम दिखने लगा है कि बीते 3 वर्ष में छत्तीसगढ़ में नक्सली घटनाओं में लगभग 80 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

पुलिस विभाग के मुताबिक नक्सलियों के सालाना कैलेंडर के मुताबिक इस समय टीसीओसी पखवाड़ा चल रहा है, मनन जाता है कि इस दरमियान नक्सली सुरक्षाबलों को बड़ा नुकसान पहुचाने घटनाओं को अंजाम देते हैं। पुलिस और सुरक्षाबल के जवान भी इस दौरान सक्रीय और सतर्क रहते हैं। फ़ोर्स लगातार जंगलों में गश्त करती है, ताकि नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम न दे सकें ।

फरवरी में मिली थी बड़ी सफलता

फरवरी में मिली थी बड़ी सफलता

हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने जानकारी साझा करते हुए बताया था कि बीते फरवरी महीने के 28 दिनों में ही राज्य में 56 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था , जो कि पुलिस के नक्सल विरोधी अभियान की सफलता बयान करने के लिए काफी है। आगे बताया गया था कि फरवरी माह में 33 नक्सली गिरफ्तार भी किये गए ,जबकि अलग-अलग मुठभेड़ में 3 नक्सलियों की मौत भी हुई है। !

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