मां की ममता बनी राहुल का कवच, बेटा सुरक्षित है,अब जाकर मिला है चैन !
छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले के खरौदा विकासखंड के गांव पिहरीद में बोरवेल से 11 साल के बच्चे राहुल साहू को बाहर निकालने के लिए 105 घंटे तक चले देश के सबसे बड़े सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान प्रशासन और जवानों की टीम की म
जांजगीर-चांपा, 15 जून। छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले के खरौदा विकासखंड के गांव पिहरीद में बोरवेल से 11 साल के बच्चे राहुल साहू को बाहर निकालने के लिए 105 घंटे तक चले देश के सबसे बड़े सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान प्रशासन और जवानों की टीम की मेहनत के अलावा दुआओं ने भी बड़ी भूमिका निभाई। इन दुआओं में घटना के बाद भावनात्मक तौर पर जुड़े लोगों के अलावा मां की चिंता और उसकी ममता सबसे खास रही।
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मां रही भूखी प्यासी,बदहवास
जब तक राहुल गड्डे से बाहर नहीं आया ,उसकी मां गीता साहू ने एक निवाला अपने मुंह में नहीं डाला। वह 105 घंटो तक बदहवास नजर आई और लगातार भगवान से अपने लाड़ले के सुरक्षित लौट आने की दुआएं करती रही। ग्रामीण बताते है कि 5 दिनों तक राहुल की मां बस एक ही बात कहती रही कि मेरे बेटे को बाहर ला दो। पूरे ऑपरेशन के दौरान सदमे में आ चुकी राहुल की मां की तबीयत भी बिगड़ गई थी। अब जब रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म हो गया है,तब जाकर उसकी तबियत में सुधार देखा जा रहा है।

मां कहती है उसके बेटे पर है देवी माता की कृपा
हादसे के बाद से ही राहुल की मां और उसके परिजनों का हाल बुरा होता चला गया है। राहुल की मां ,पूरा परिवार और पूरे गांव के लोग रातभर बोरवेल के मुहाने पर खड़े रहे ,ताकि अपने बच्चे की आवाज़ सुन सकें। राहुल अपने माता पिता की पहली संतान है , उसका छोटा भाई भी है। राहुल की मां गीता साहू ने बताया कि उनके बेटे पर देवी माता की कृपा है।
कुछ बरस पहले उनका परिवार पुरी धाम गया था, जहां वह सबसे बिछड़ गया। बहुत देर तक भी वह नहीं मिला,जब सभी निराश हो गए,तब राहुल एक देवी मंदिर के निकट माता की चुनरी ओढ़ें दिखाई दिया। इस घटना के बाद से राहुल के माता पिता मानते हैं कि बच्चे पर देवी माता की असीम कृपा है,इसलिए उनको विश्वास था कि इस बार भी राहुल को कुछ नहीं होगा।

दोनों बच्चों को एकसाथ सलामत देखना चाहते है माता पिता
राहुल को बचाने में जुटे प्रशासनिक अमले से जुड़े लोगों ने बताया कि राहुल की मां को बार-बार समझाया गया कि उसे बचाने की भरपूर कोशिश की जा रही है ,लेकिन बदहवास मां लगातार रोकर यह कहती दिखी कि कुछ भी करके राहुल उसकी गोद में डाल दिया जाये, वह अपने दोनों बच्चों को एक साथ अब सही सलामत देखना चाहती थी । शुक्रवार को दोपहर को लगभग 2 बजे राहुल के माता पिता ने ही घर के पीछे बोरवेल के लिए खोदे गए गड्ढे के अंदर से उसके रोने की आवाज़ सुनी थी। जिसके बाद पुलिस और प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई थी। जिसके बाद राहुल को बचाने का रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ।

पूरा दिन एम्बुलेंस के पास खड़ी रही मां
14 जून की शाम से ही बचाव दल राहुल के बेहद करीब पहुंच चुका था। लगभग 9 बजे के करीब एनडीआरएफ के जवानों को राहुल की झलक दिखाई
देने लगी,जिसके बाद तत्काल एम्बुलेंस को अलर्ट मोड पर तैयार रखा गया। एम्बुलेंस के पास राहुल की मां लगातार खड़ी रही, 105 घण्टे रेस्क्यू के बाद जैसे ही बच्चे को सकुशल बाहर निकाला गया। एम्बुलेंस के साथ राहुल की मां भी बिलासपुर के अपोलो अस्पताल तक साथ गई। राहुल को पिहरीद गांव से बिलासपुर के अपोलो अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर बनाकर ले जाया गया,वह फ़िलहाल स्वस्थ है और डॉक्टरों की निगरानी में इलाज का लाभ ले रहा है।
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