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सिर पर रखा पल्लू, साड़ी पहनकर खेली कबड्डी , Chhattisgarhia Olympic में महिलाओं का शानदार प्रदर्शन

आपने हरियाणा के गांवो में महिलाओं को कुश्ती खेलते दंगल में जरूर देखा होगा। प्रोफेशनल मुक्केबाज़ी में भी भारतीय महिलाएं अपने जौहर दिखाती नजर आई हैं, लेकिन गांव देहात में कबड्डी खेलती गृहणियों को शायद ही देखा हो।

रायपुर, 08 अक्टूबर। आपने हरियाणा के गांवो में महिलाओं को कुश्ती खेलते दंगल में जरूर देखा होगा। प्रोफेशनल मुक्केबाज़ी में भी भारतीय महिलाएं अपने जौहर दिखाती नजर आई हैं, लेकिन गांव देहात में कबड्डी खेलती गृहणियों को शायद ही देखा हो। इन दिनों छत्तीसगढ़ के गांव देहातों में महिलाएं अपने घरो से निकलकर कबड्डी के मैदान में अपना दम खत्म दिखा रही हैं।दरअसल छत्तीसगढ़ के हर गांव में इस समय पारम्परिक खेलों के सरंक्षण के लिए छत्तीसगढ़िया ओलम्पिक का आयोजन किया जा रहा है। इस खेल आयोजन में सभी उम्र वर्ग के लोग हिस्सा ले रहे हैं। साड़ी पहनकर कबड्डी खेलने वाली महिलाओं का यह वीडियो सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है।

साड़ी पहनकर खेली कबड्डी

साड़ी पहनकर खेली कबड्डी

साड़ी पहनकर कबड्डी के मैदान में हु तू तू कर रहीं ये महिलाये छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों की हैं। दरअसल इस समय छत्तीसगढ़ प्रदेश में छत्तीसगढ़िया ओलंपिक चल रहा है,जिसके तहत छत्तीसगढ़ भर में पारम्परिक खेलों को बढ़ावा देने के मकसद से भूपेश सरकार खेल आयोजन करवा रही है।

इस अनोखे आयोजन के आयोजन के दौरान एक से बढ़कर तस्वीरें सामने आ रही हैं। इन्ही में एक एक है महिलाओं का कबड्डी खेलते हुए वीडियो। राज्य के सीनियर आईएएस अधिकारी अवनीश शरण ने महिलाओं की इस शानदार कबड्डी परफॉर्मेंस वाले वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा है कि हम किसी से कम हैं क्या..यह वीडियो आप खबर के अंत में देख सकते हैं।

6 जनवरी 2023 चलेगा छत्तीसगढिया ओलम्पिक

6 जनवरी 2023 चलेगा छत्तीसगढिया ओलम्पिक

गौरतलब है कि छ्त्तीसगढ़ की संस्कृति से लोगों को जोड़ कर रखने के लिए स्थानीय खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर छत्तीसगढ़िया ओलंपिक की शुरूआत आज 6 अक्टूबर से की गई है। 6 जनवरी 2023 तक चलने वाले इस ओलंपिक में दलीय एवं एकल श्रेणी में 14 प्रकार के पारंपरिक खेलकूदों को शामिल किया गया है जिसमें 18 वर्ष से कम, 18 से 40 वर्ष एवं 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोग शामिल हो रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों को एक तरफ खेल का मंच मिलेगा वहीं उनमें खेलों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और खेल भावना का भी विकास होगा।

ताकि लोग अपनी परम्परा को ना भूलें

ताकि लोग अपनी परम्परा को ना भूलें

खेल आयोजन के आगाज़ पर सीएम भूपेश बघेल ने कहा था कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और सभ्यता और विशिष्ट पहचान यहां की ग्रामीण परंपराओं और रीति रीवाजों से है। इसमें पारंपरिक खेलों का विशेष महत्व है। पिछले कुछ वर्षों में छत्तीसगढ़ के इन खेलों को लोग भूलते जा रहे थे। खेलों को चिरस्थायी रखने, आने वाली पीढ़ी से इनको अवगत कराने के लिए छत्तीसगढ़ियां ओलंपिक खेलों की शुरूआत की गई है।

हर गांव में हो रहे खेल आयोजन

हर गांव में हो रहे खेल आयोजन

सीएम भूपेश ने कहा कि छत्तीसगढ़ के ये खेल मनोरंजक होने के साथ साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इन खेलों से बच्चे, बुजुर्ग व युवा सभी व्यायाम आदि शारीरिक गतिविधियों से जुड़ते हैं। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए खेलकूद को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़िया ओलंपिक खेलों से राज्य के हर गांव, हर ब्लाक तथा हर जिले में स्थानीय खेलों का आयोजन होगा।

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