IAS नम्रता जैन: नक्सलियों की गोलियों के बीच बीता बचपन, अब रायपुर में क्यों हो रही चर्चा?
छत्तीसगढ़ कैडर में पांच आईएएस अफसरों के तबादले किए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव रजत कुमार की ओर से 29 जुलाई 2025 को जारी आदेश में IAS नम्रता जैन का भी नाम शामिल है, जिनका ट्रांसफर किया गया है। यह वो महिला आईएएस हैं, जो नक्सल प्रभावित इलाके में पली-बढ़ी और दो बार यूपीएससी क्रैक करके इतिहास रच दिया था।

किस IAS को कहां लगाया गया?
- नम्रता जैन (IAS-2019) - मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत सुकमा से स्थानांतरित कर उन्हें अपर कलेक्टर, जिला रायपुर बनाया गया है।
- हेमंत रमेश नंदनवार (IAS-2020) - सीईओ, जिला पंचायत बीजापुर से स्थानांतरित होकर अब सीईओ, जिला पंचायत महासमुंद होंगे।
- मुकुंद ठाकुर (IAS-2020) - उप सचिव, कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी तथा किसान कल्याण विभाग से स्थानांतरित होकर सीईओ, जिला पंचायत सुकमा बनाए गए हैं।
- नम्रता चौबे (IAS-2022) - एसडीएम (राजस्व), सरायपाली, जिला महासमुंद से स्थानांतरित होकर अब सीईओ, जिला पंचायत बीजापुर बनेंगी।
- प्रखर चंद्राकर (IAS-2022)-एसडीएम (राजस्व), सारंगढ़, जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ से स्थानांतरित होकर उन्हें सीईओ, जिला पंचायत गरियाबंद की जिम्मेदारी दी गई है।
नक्सली गोलीबारी से लेकर IAS बनने तक का सफर
नम्रता जैन की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। बस्तर के गीदम थाना क्षेत्र में नक्सलियों की अंधाधुंध फायरिंग के बीच उनका बचपन बीता। लेकिन डरने के बजाय उन्होंने वहीं से सोच लिया कि अगर बदलाव लाना है, तो खुद सिस्टम का हिस्सा बनना होगा। उन्होंने गांव से 8 किलोमीटर दूर पढ़ाई शुरू की, घरवालों को मना कर दुर्ग और फिर भिलाई पहुंचीं।
इंजीनियरिंग के बाद UPSC की राह चुनी। पहले प्रयास में प्री भी नहीं निकाल पाईं, लेकिन हार नहीं मानी। दूसरे प्रयास में IPS बनीं और तीसरे प्रयास में IAS बनकर इतिहास रच दिया। वे बस्तर संभाग से UPSC क्लियर करने वाली पहली महिला बनीं, जिन्होंने ऑल इंडिया 12वीं रैंक हासिल की। उनका सफर बताता है कि नक्सल क्षेत्र से भी 'सिविल सेवा' के शिखर तक पहुंचा जा सकता है। बशर्ते इरादे मजबूत हों।
कोर्ट मैरिज कर फिजूलखर्ची वाली शादियों के खिलाफ संदेश
नम्रता जैन सिर्फ एक अफसर नहीं, बल्कि समाज के लिए एक सोच हैं। कोरिया जिले में जिला पंचायत सीईओ रहते हुए वे बार-बार साबित कर चुकी हैं कि प्रशासनिक पद सिर्फ कुर्सी नहीं, सेवा का माध्यम होता है। वे मनरेगा और स्व-सहायता समूह की महिलाओं के बीच ज़मीन पर बैठकर चर्चा करती हैं, उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा देती हैं।

इतना ही नहीं, उन्होंने आईपीएस निखिल रखेचा से कोर्ट मैरिज कर फिजूलखर्ची वाली शादियों के खिलाफ स्पष्ट संदेश भी दिया। शादी के बाद एक टीबी मरीज के इलाज की जिम्मेदारी ली। उनका मानना है कि जब तक समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति तक विकास नहीं पहुंचेगा, तब तक कोई पद या सफलता अधूरी मानी जाएगी। नम्रता की कार्यशैली और विचारशीलता, दोनों उन्हें एक अलग दर्जे का अधिकारी बनाते हैं।












Click it and Unblock the Notifications