Success Story: 71 साल में CA बनकर ताराचंद अग्रवाल ने रचा इतिहास, गीता से मिली सीख ने बदल दी जिंदगी
Tarachand Agrawal CA: उम्र महज एक संख्या है, यह बात राजस्थान के 71 वर्षीय ताराचंद अग्रवाल ने साबित कर दी है। जीवन के उस मोड़ पर, जहां ज्यादातर लोग आराम और रुटीन में ही खुद को सीमित कर लेते हैं, वहीं ताराचंद ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) जैसी चुनौतीपूर्ण परीक्षा पास कर एक नई मिसाल गढ़ दी है।
पूर्व बैंक मैनेजर ताराचंद ने यह सफर तब शुरू किया, जब नवंबर 2020 में पत्नी के निधन से उनकी जिंदगी में गहरा सन्नाटा छा गया। अकेलेपन से जूझते हुए उन्होंने भगवद गीता पढ़नी शुरू की। गीता में मिले शब्दों ने उनके मन में ठान लिया कि कुछ बड़ा करना ही है। जब उन्होंने पीएचडी की इच्छा जताई, तो बेटों ने उनसे और भी कठिन राह चुनने को कहा-CA बनने की।

तीन साल में पूरा सफर
2021 में ताराचंद ने खुद को इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स में पंजीकृत कराया। फिर एक-एक करके फाउंडेशन, इंटरमीडिएट और आखिर में फाइनल परीक्षा पास कर ली। पहले प्रयास में असफलता ने उन्हें तोड़ा नहीं। बल्कि उनके अंदर का जुनून और मजबूत हो गया।
10-10 घंटे की पढ़ाई, कोई कोचिंग नहीं
ताराचंद दिन में करीब 10 घंटे किताबों और नोट्स में डूबे रहते। कंधे में लगातार दर्द रहता, फिर भी पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। उन्होंने कोचिंग की बजाय यूट्यूब वीडियो और किताबों से ही तैयारी की। कई बार बेटे की दुकान पर बैठकर पढ़ते ताकि अकेलापन न सताए।
उनके बड़े बेटे लालित पहले से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और छोटे बेटे अमित टैक्स प्रैक्टिस में हैं। दोनों ने हर कदम पर पिता का हौसला बढ़ाया। पर असली हिम्मत उन्हें मिली गीता की उस सीख से — "जो भी काम करो, पूरे संकल्प के साथ करो।"
सपनों की उम्र नहीं होती
हनुमानगढ़ जिले के संगरिया में किसान-व्यापारी परिवार में जन्मे ताराचंद ने 1976 में स्टेट बैंक में क्लर्क की नौकरी से करियर शुरू किया था। 2014 में असिस्टेंट जनरल मैनेजर के पद से सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने जीवन को ठहरने नहीं दिया।
ताराचंद अग्रवाल की कहानी हर उम्र के लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है — अगर ठान लें, तो कोई भी मंजिल असंभव नहीं।












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