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आज भी सुलग रहे हैं ताड़मेटला कांड के अनसुलझे सवाल, किसने जलाये थे आदिवासियों के 250 घर?

रायपुर, 16 मार्च। छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 2022 नक्सल घटनाओं से जुडी जांचों के लिहाज से बेहद ही खास साबित हो रहा है। बुधवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मदनवाड़ा नक्सल हमले की जांच रिपोर्ट पेश करने के अलावा बहुचर्चित ताड़मेटला कांड की जांच रिपोर्ट भी सदन के समक्ष रखी। सीएम भूपेश बघेल ने विधानसभा के पटल पर ताड़मेटला न्यायिक जांच आयोग की रिपाेर्ट विधानसभा में पेश कर दी है । जांच रिपोर्ट में में यह बताया है कि नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के ताड़मेटला, तिम्मापुरम और मोरपल्ली नाम के गांवों में ग्रामीणों के 250 घरों को आग के हवाले कर दिया गया था। जांच आयोग अपनी रिपोर्ट में यह नहीं बता पाया है कि सुकमा के इन गाँवो में ग्रामीणों के घर किसने जलाये थे।

tadmelta

छत्तीसगढ़ विधानसभा में पेश की गई ताड़मेटला न्यायिक जांच आयोग की रिपाेर्ट के मुताबिक , 11 मार्च 2011 को सुकमा के ग्राम मोरपल्ली में पुलिस, CRPF और कोबरा बटालियन के साथ ही माओवादी भी मौजूद थे ,इस दौरान गांव में पुलिस की माओवादियों के साथ मुठभेड़ हुई। रिपोर्ट में यह जरूर बताया गया है कि ग्राम मोरपल्ली में आदिवासी ग्रामीणों के 31 जल गए थे,लेकिन यह नहीं बताया गया कि इन घरों को पुलिस या सुरक्षाबलों के जवानो ने जलाया था या माओवदियों ने इस करतूत को अंजाम दिया था।

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तिम्मापुरम में गोलाबारी से जले थे कुछ मकान

इसी क्रम में ग्राम तिम्मापुरम में भी 13 मार्च 2011 को पुलिस और माओवादियों के बीच मुठभेड़ की घटना का जिक्र किया गया है । बताया गया है कि यह इतनी घातक मुठभेड़ थी कि माओवादियों से लड़ते वक़्त पुलिस फोर्स गोला-बारूद खत्म हो गया था ,बेकाबू हालात में हेलिकाप्टर के जरिये कोबरा बटालियन और CRPF फ़ोर्स को वहां उतारा गया था ,लेकिन इस खतरनाक मुठभेड़ में 3 पुलिसकर्मी शहीद और 8 घायल हो गए थे ,जबकि एक माओवादी मारा गया था । जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट के मुताबिक 59 मकानों में आग लग गई थी। जांच आयोग ने घटना में घायल हुए पुलिसकर्मियों के बयान के आधार पर बताया गया है कि पुलिस ने घटना के दौरान 4 या 5 मकानों में ग्रेनेड फेंके थे,जिसकी वजह से वह जल गए थे।

ताड़मेटला में खाक हो गए थे 160 घर

वही इसी सिलसिले में 16 मार्च को ग्राम ताड़मेटला में पुलिस, CRPF और कोबरा बटालियन की साझा टीम के साथ माओवादियों की मुठभेड़ हुई थी । ताड़मेटला में भी ग्रामीणों के 160 घर जला दिए गए थे । इन मकानों के संदर्भ में भी जांच आयोग यह साफ़ नहीं कर पाया है कि इन्हे किसने जलाया था आयोग ने कहा है कि इस प्रकरण की जांच सीबीआई भी कर रही है,लिहाजा उसकी जांच के बाद अभियोगपत्र में स्थिति साफ़ हो सकेगी।

आयोग ने रखा पुलिस को संदेह के दायरे से बाहर

न्यायिक जांच आयोग के मुताबिक स्थानीय शासकीय अधिकारियों के बयान में यह तथ्य सामने आया है कि जिन गांवों में आगजनी हुई वहां घर पास-पास नहीं थे और ना ही वहां ज्यादा आबादी थी । जांच रिपोर्ट कहती है कि गवाही से यह बात प्रमाणित होती है कि अगर किसी गांव में एक भी नक्सली उपस्थित हो , तो पुलिस वहां नहीं जा सकती है । ऐसी में माओवादी इलाके में 50 लोगों के साथ पुलिस का जाना संभव ही नहीं है । पुलिस बल गांव में घूमकर घरो को
जलाने का खतरा नहीं उठा सकता है। इसी आधार पर आयोग ने पुलिस को संदेह के दायरे से बाहर रखा है। वही न्यायिक जांच आयोग ने दिवंगत सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश पर हमले की घटना में भी पुलिस अधिकारियों को क्लीनचिट दे दी है। बहरहाल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर ताड़मेटला प्रकरण की सीबीआई जांच कर रही है।

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