सामने आया मदनवाड़ा नक्सली हमले का सच, IG मुकेश वर्मा की लापरवाही से गई थी SP समेत 29 पुलिस जवानों की जान
रायपुर, 16 मार्च। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के मदनवाड़ा में 12 जुलाई 2009 को हुए नक्सली हमले का सच सामने आ गया है। छत्तीसगढ़ विधानसभा में बुधवार को सीएम भूपेश बघेल ने जस्टिस शंभुनाथ श्रीवास्तव न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट विधानसभा में पेश की । जांच आयोग की रिपोर्ट में मदनवाड़ा मुठभेड़ के दौरान उपजे हालातों और रणनीतिक खामियों को उजागर करते हुए निलंबित IPS मुकेश गुप्ता की भूमिका पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाया हैं।

चौकाने वाले तथ्य आये सामने
मदनवाड़ा घटना के सच को जानने के लिए गठित जांच आयोग की रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है, आईजी जोन की मौजूदगी में भी नक्सलियों ने शहीद एसपी और अन्य पुलिस जवानो के मृत शरीर से बुलेट प्रूफ जैकेट,हथियार और बाकि चीजें निकाल कर रख ली थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि गवाहों ने बताया है कि पुलिस जवानों ने भी नक्सलियों पर गोली चलाई थी , लेकिन उन गोलियों का माओवादियों पर कोई प्रभाव नहीं हुआ।

आईजी मुकेश गुप्ता की भूमिका संदिग्ध
आयोग ने रिपोर्ट में कहा है कि इन बयानों के आधार पर यह बात विश्वास करने योग्य नहीं है। बयानों से ऐसा लगता है, उस समय या तो नक्सलियों पर फायर ही नहीं किया था अथवा फिर टारगेट को भटकाया जा रहा था। इस बात में कोई बहादुरी नहीं मानी जा सकती है कि जवान माओवादियों के सामने मूक दर्शक बनकर खड़े थे। अगर पुलिस गोली चलाती ,तो निश्चित ही माओवादी भी घटना में हताहत होते ,क्योंकि यह स्पष्ट है कि इस घटना में कोई नक्सली नहीं मारा गया था। यह दुखद है।
मदनवाड़ा जांच आयोग ने आगे कहा है, अगर हमले के समय पुलिस कमांडर या आईजी जोन साहस दिखाते तो अंजाम कुछ और होता। आयोग ने रिकॉर्ड किया है कि उन्हें ऐसा लगता है कि जब एसपी विनोद चौबे को नक्सलियों से मुकाबला करने के लिए आगे का दिया दिया ,इस घटना को लेकर साफ़ तौर पर साक्ष्य सामने आया है कि उस समय तत्कालीन आईजी मुकेश गुप्ता अपनी बुलेटप्रूफ कार में बैठे हुए थे। शंभुनाथ श्रीवास्तव जांच आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक कि माओवादियों ने मदनवाड़ा हमले का वीडियो भी बनवाया था ,जिसमे में दिखाया गया है कि नक्सली जवानों की हत्या करने के बाद उनका सामान लूटकर जश्न मना रहे हैं । यह वीडियो आईजी मुकेश गुप्ता की घोर लापरवाही और असावधानी को दिखाती है।

ख़ुफ़िया विभाग ने पहले ही कर दिया था आगाह
आयोग की जांच में पता चला है कि मोटरसाइकिल से मदनवाड़ा की तरफ जाने वाले पुलिसकर्मी बड़ी आसानी से नक्सलियों की गोलियों का शिकार बन गए थे । नक्सलियों की तरफ से आने वाले इस खतरे की चेतावनी एसपी विनोद चौबे ने पहले ही दे दी थी, लेकिन एम्बुश लगाए जाने की सूचना उन्हें नहीं दी जा सकी थी । चौकाने वाली बात यह भी है कि खुफिया तंत्र ने पहले ही गृह विभाग को मानपुर और मदनवाड़ा इलाके में बड़ी मात्रा में नक्सलियों के इकठ्ठा की सूचना दे दी थी ,इसकी जानकारी आईजी मुकेश गुप्ता को थी,लेकिन उन्होंने इसके लिए कोई योजना नहीं बनाई।

आखिर क्या है मदनवाड़ा घटना
12 जुलाई 2009 को छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में पड़ने वाले मदनवाड़ा नाम के गांव के करीब नक्सलियों ने पुलिस अमले पर बड़ा हमला किया था । इस हमले में राजनांदगांव के तत्कालीन एसपी विनोद चौबे समेत 29 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। जबकि 27 जवान अपने शहीद साथियों का शव वापस लाते समय शहीद हो गए थे। नक्सल घटना के इतिहास में यह पहला अवसर था ,जब यह नक्सल हमले में एसपी रैंक के किसी असफर की शहादत हुई हो।
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