छत्तीसगढ़ के बलरामपुर से आई भावुक कर देने वाली खबर, 109 साल बाद हुआ शहीद लागुड़ का अंतिम संस्कार
Emotional news came from Balrampur, Chhattisgarh, after 109 years, the last rites of martyr Lagud
बलरामपुर,05 फरवरी। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में 109 साल तक लम्बा इंतजार करने के बाद आखिरकार एक शहीद को अंतिम संस्कार नसीब हो पाया ,इसी के साथ यह घटना इतिहास में शामिल हो गई। दरअसल एक सदी पहले अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन में हिस्सा लेने वाले लागुड़ नगेसिया को अंग्रेजो ने मौत की सजा दी थी। मौत के 109 साल बाद भी उनका कंकाल एक स्कूल में रखा हुआ था ,जिसका स्थानीय विधायक की पहल के बाद अंतिम संस्कार किया गया।

अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ने वाले क्रन्तिकारी थे लागुड़ नगेशिया
मिली जानकारी के मुताबिक अंग्रेजों ने छत्तीसगढ़ के मौजूदा बलरामपुर जिले के सामरी में रहने वाले लागुड़ नगेशिया अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ने वाले एक क्रन्तिकारी थे। 1913 में ब्रिटिश काल के खिलाफ आंदोलन करने की वजह से अग्रेजों ने उन्हें खौलते तेल में तलकर उनकी अस्थियों को एक स्कूल में रखवा दिया था, उनके परिजन बीते 109 सालों से अंतिम संस्कार के लिए अस्थियां मांग रहे थे। लागुड़ नगेशिया का कंकाल अम्बिकापुर के सरकारी मल्टीपर्पज स्कूल की लैब में रखा हुआ था ,जिसे स्थानीय विधायक चिंतामणि महाराज और जिला प्रशासन के सहयोग से बाहर निकाकर अंतिम संस्कार किया गया ।

लागुड़ के अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़
माना जाता है कि साल 1913 में अंग्रेजों के जुल्म का शिकार होकर लागुड़ नगेशिया शहीद हो गए थे। स्थानीय ग्रामीणों और नगेशिया परिवार के सदस्यों की तरफ से लम्बे समय से अस्थियों को वापस किए जाने की मांग की जाती रही है ,लेकिन कंकाल के सरकारी स्कूल में रखे होने के कारण 109 सालों तक प्रशासन की उदासीनता के चलते यह संभव नहीं हो पाया था । इस विषय पर स्थानीय विधायक और संसदीय सचिव चिंतामणि महाराज ने सीएम भूपेश बघेल से बात करके लागुड़ की अस्थियों को नगेसिया समाज को सौंपा । शुक्रवार को पुरे विधि विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, इस दौरान बड़ी संख्या में जनता भी अंतिम संस्कार क्रिया में शामिल हुई।

शहीद का दर्जा देने की मांग
स्थानीय लोग बताते हैं कि ब्रिटिश काल में लागुड़ ने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज बुलंद की , तो फिरंगी फौज ने उन्हें पकड़कर गर्म तेल की कड़ाही में डाल दिया था। अंग्रेजों ने लागुड़ की अस्थियां उस समय के अंग्रेजी स्कूल में विज्ञान के छात्रों के लिए रख दी थीं। अब इतने सैलून बाद जब लागुड़ का अंतिम संस्कार हो चुका है ,तब लागुड़ नगेसिया को शहीद का दर्जा दिए जाने के साथ उनकी याद में स्मारक बनाये जाने की मांग तेज हो गई है।
छत्तीसगढ़ सरकार के संसदीय सचिव और कांग्रेस विधायक चिंतामणि महाराज ने बताया कि मुख्यमंत्री बघेल के प्रयासों से यह संभव हो सका है। जनता चाहती है कि सरकारी तौर पर लागुड़ को शहीद का दर्जा दिलाया जाये। वहीं भाजपा के आदिवासी नेता नंदकुमार साय ने कहा कि पक्ष विपक्ष एकजुट होकर लागुड़ को शहीद का दर्जा दिलाने जाने का पूरा प्रयास करेगा।

स्कूल में रखी गई थी अस्थियां
अम्बिकापुर के मल्टीपर्पज स्कूल प्रिंसिपल एचके जायसवाल का कहना है कि जिस अस्थि का अंतिम संस्कार किया गया है,उसके संबंध में किसी प्रकार के कोई शासकीय दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने बताया कि सरगुजा और बलरामपुर कलेक्टर के निर्देश के बाद ही हम नागेसिया समुदाय को अस्थियां सौंप सके।बहरहाल आखिरकार 109 साल बाद अंग्रेजी हुकूमत से लोहा लेने वाले वीर नायक लागुड़ी का अंतिम संस्कार होने के साथ ही उनका नाम इतिहास में पुरे सम्मान के साथ दर्ज हो गया है।
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