छत्तीसगढ़ के बस्तर में जागी शिक्षा की अलख, जिन 200 स्कूलों को माओवादियों ने कराया था बंद, उसे दोबारा खोला गया
रायपुर, 31 मई। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में शिक्षा की अलख जागने लगी है। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार के विशेष प्रयासों से बीजापुर और सुकमा जिलों में माओवादियों की तरफ बंद कराये गये करीब 200 स्कूलों को फिर से खोला दिया गया गया हैं। कोरोना महामारी के बावजूद छत्तीसगढ़ में बीते तीन सालों में शिक्षा के क्षेत्र में काफी प्रगति हुई है।

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने "मन की "बात" में छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के शिक्षक विरेन्द्र भगत की प्रशंसा की है। इससे पहले नीति आयोग ने सुकमा, दंतेवाड़ा, जशपुर जिलों में शिक्षा में हो रहे शानदार कामों की सराहना की है। छत्तीसगढ़ सरकार के अफसरों ने बताया कि राज्य के ऑनलाईन शिक्षा पोर्टल "पढ़ाई तुंहर दुआर" पर 25 लाख से अधिक विद्यार्थियों तथा 2 लाख से अधिक शिक्षक पंजीकृत हैं और लगातार शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
केन्द्र सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग की रिपोर्ट पर उठे सवाल
गौरतलब है कि शिक्षाविदों ने हाल ही में केन्द्र सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग की तरफ जारी की गई स्कूली शिक्षा की राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वे की रिपोर्ट पर अनेक प्रश्नचिन्ह लगाए थे । यह सर्वेक्षण तब करवाया गया था , जब कोरोना महामारी के कारण स्कूल दो सालों से भी अधिक समय से बंद थे। इतना ही नहीं सर्वेक्षण में बच्चों की उपलब्धि ओ.एम.आर. शीट भरकर मापी गई थी । माना जा रहा है कि क्योकि कक्षा तीन और पांच के छोटे बच्चों को ओएमआर शीट भरना ठीक प्रकार से नहीं आता है , इसलिये इस प्रक्रिया से उनके शैक्षणिक उपलब्धियों का मापन करना संभव नहीं है। इस सर्वे पर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि प्रतीत होता है कि इस सर्वेक्षण में बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियों के स्थान पर ओ.एम.आर. शीट भरने की योग्यता की माप की गई है।
इस विवादित सर्वेक्षण के कुछ आंकड़े बेहद ही चौकाने वाले हैं। जैसे कि कक्षा तीन में भाषाई कौशल में 323 के राष्ट्रीय औसत के विरूद्ध जहां छत्तीसगढ़ को 301 अंक मिले हैं , वहीं राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली को भी 302 अंक ही मिल सके हैं। इसी तरह गणित में 306 के राष्ट्रीय औसत की तुलना में छत्तीसगढ़ को 283 अंक और दिल्ली को 282 अंक ही मिल पाए हैं। राजधानी दिल्ली की उपलब्धि राष्ट्रीय औसत से इतनी कम होना सर्वे की विश्वसनियता पर ही प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रही है।
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