छत्तीसगढ़: ईडी ने किया पेश DMF घोटाले का आरोप पत्र, 90 करोड़ का घोटाला उजागर
Chhattisgarh DMF Scam: छत्तीसगढ़ में बहुचर्चित खनिज जिला न्यास मद (डीएमएफ) घोटाले के मामले में सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रायपुर स्थित विशेष कोर्ट में आठ हजार 21 पन्नों का पहला आरोप पत्र पेश किया। यह मामला पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार में सामने आया था। आरोप पत्र में अब तक हुई जांच के हवाले से ईडी ने आकलन किया है कि इस घोटाले की कुल रकम 90 करोड़ 48 लाख रुपये है।
आरोप पत्र में जेल में बंद निलंबित आईएएस रानू साहू, महिला बाल विभाग की अफसर रहीं माया वारियर, ब्रोकर मनोज कुमार द्विवेदी समेत 16 आरोपितों के नाम हैं। विशेष कोर्ट में पेश किए गए अभियोजन चालान में 169 पन्नों में प्रासिक्यूशन कंप्लेन और 7,852 आरयूडी दस्तावेज शामिल हैं।

मनोज कुमार द्विवेदी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया
चार दिन की ईडी रिमांड खत्म होने पर कारोबारी और एनजीओ के सचिव मनोज कुमार द्विवेदी को विशेष कोर्ट में पेश किया गया। दोनों पक्षों की बहस के बाद कोर्ट ने मनोज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया।
ईडी की जांच में यह खुलासा हुआ है कि 2021-22 और 2022-23 में मनोज कुमार द्विवेदी ने निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू और अन्य अधिकारियों से मिलीभगत कर अपने एनजीओ 'उदगम सेवा समिति' के नाम पर कई डीएमएफ ठेके हासिल किए थे। इन ठेकों के लिए अधिकारियों को टेंडर राशि का 40 प्रतिशत तक कमीशन दिया गया था।
मनोज द्विवेदी ने डीएमएफ फंड की हेराफेरी करके 17 करोड़ 79 लाख रुपये कमाए, जिसमें से छह करोड़ 57 लाख रुपये अपने पास रख लिए और बाकी रकम अधिकारियों को रिश्वत के रूप में दी। ठेके के लिए जिला स्तर के अधिकारियों से मिलीभगत करके उनकी मदद भी की गई।
आरोप पत्र में इन 16 नामों का जिक्र
निलंबित आईएएस रानू साहू, माया वारियर, मनोज कुमार द्विवेदी, भुवनेश्वर सिंह राज, भरोसा राम ठाकुर, वीरेंद्र कुमार राठौर, राधेश्याम मिर्झा, श्रीकांत दुबे, संजय शिंदे, हरिषभ सोनी, राकेश कुमार शुक्ला, अशोक अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल, विनय कुमार अग्रवाल, ललित राठी और तोरणलाल चंद्राकर के नाम शामिल हैं।
ईडी की रिपोर्ट और पुलिस की कार्रवाई
ईडी की रिपोर्ट के आधार पर आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने धारा 120 बी और 420 के तहत केस दर्ज किया है। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि कोरबा के डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड से टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया था, जिसमें टेंडर भरने वालों को अवैध लाभ पहुंचाया गया और सरकारी अफसरों को कमीशन के रूप में 40% राशि दी गई।
क्या है डीएमएफ घोटाला
छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की रिपोर्ट के आधार पर आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने कोरबा जिले में डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड (डीएमएफ) घोटाले के मामले में धारा 120 बी और 420 के तहत केस दर्ज किया है। जांच में यह तथ्य सामने आया है कि कोरबा के डीएमएफ फंड से अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर घोटाला किया गया। टेंडर भरने वाले ठेकेदारों को अवैध लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी अधिकारियों ने जानबूझकर गलत कार्य किए।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, टेंडर की राशि का 40% हिस्सा सरकारी अफसरों को कमीशन के रूप में दिया गया। इसके अलावा, प्राइवेट कंपनियों के टेंडर पर भी अधिकारियों ने 15 से 20 प्रतिशत कमीशन लिया।
ईडी की जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि निलंबित आईएएस अधिकारी रानू साहू और अन्य कुछ अधिकारियों ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया और निजी लाभ के लिए सरकारी फंड का दुरुपयोग किया। इस घोटाले में कई उच्च पदस्थ अधिकारियों के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।












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