चीन का सबसे खतरनाक पैंतरा! ताइवान को खत्म करने के लिए जिनपिंग ने निकाला नया हथियार, अमेरिका भी हैरान

China lawfare Strategy Taiwan: अमेरिकी कांग्रेस की एक नई रिपोर्ट में चीन पर आरोप लगाया गया है कि वह ताइवान के खिलाफ "लॉफेयर" यानी कानूनी सिस्टम का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार की तरह कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अब सिर्फ सैन्य और कूटनीतिक दबाव तक सीमित नहीं है, बल्कि कानून और अदालतों के जरिए भी अपने विरोधियों को निशाना बना रहा है।

इस रिपोर्ट में ताइवान के सांसद Puma Shen के खिलाफ शुरू की गई जांच को बड़ा उदाहरण बताया गया है। रिपोर्ट का दावा है कि चीन अपने दावों को मजबूत करने और विरोधी आवाजों को दबाने के लिए नई रणनीति अपना रहा है।

China lawfare strategy Taiwan

क्या है चीन की 'लॉफेयर' रणनीति?

रिपोर्ट के अनुसार, चीन अब कानूनी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल अपने राजनीतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कर रहा है। इसे "लॉफेयर" कहा जाता है। इसका मतलब है कि कानून और न्यायिक संस्थाओं को राजनीतिक दबाव बनाने के टूल के रूप में इस्तेमाल करना। चीन का दावा है कि ताइवान उसका हिस्सा है, इसलिए वह उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है जो ताइवान की अलग पहचान का समर्थन करते हैं। आलोचकों का कहना है कि यह रणनीति लोकतांत्रिक आवाजों को डराने का प्रयास है।

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प्यूमा शेन के खिलाफ कार्रवाई क्यों हुई?

ताइवान की सत्तारूढ़ Democratic Progressive Party के सांसद प्यूमा शेन को 2024 में चीन की प्रतिबंध सूची में शामिल किया गया था। बाद में चीन के चोंगकिंग प्रशासन ने उनके खिलाफ आपराधिक जांच शुरू कर दी। चीन ने उन्हें "कट्टर ताइवान स्वतंत्रता समर्थक" बताया। रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहली बार है जब किसी मौजूदा ताइवानी सांसद पर चीन ने इस तरह की कानूनी कार्रवाई शुरू की है। इससे चीन की नीति में नए और ज्यादा आक्रामक रुख का संकेत मिलता है।

चीन की नई नीति को बड़ा बदलाव क्यों माना जा रहा है?

विशेषज्ञों का कहना है कि पहले चीन आमतौर पर प्रतिबंध या प्रशासनिक कदम उठाता था, लेकिन अब वह आपराधिक मामलों का सहारा ले रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह बदलाव चीन की उस कोशिश को दिखाता है, जिसके जरिए वह ताइवान पर अपनी संप्रभुता के दावे को और मजबूत करना चाहता है। कानूनी जांच और संभावित मुकदमे जैसे कदम भविष्य में अन्य ताइवानी नेताओं और एक्टिविस्टों पर भी दबाव बढ़ा सकते हैं। इसी वजह से इस मामले को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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IPAC को लेकर रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?

रिपोर्ट में Inter-Parliamentary Alliance on China का भी जिक्र किया गया है। यह दुनिया के कई लोकतांत्रिक देशों के सांसदों का एक समूह है, जो चीन से जुड़े मुद्दों पर मिलकर काम करता है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने पिछले साल ब्रुसेल्स में आयोजित IPAC सम्मेलन को कमजोर करने की कोशिश की। दावा किया गया कि कुछ देशों पर दबाव डाला गया ताकि उनके प्रतिनिधि कार्यक्रम में हिस्सा न लें। हालांकि चीन ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

ताइवान और दुनिया के लिए इसका क्या मतलब है?

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और ताइवान के बीच तनाव अब सिर्फ सैन्य या राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रहा। कानूनी कार्रवाई, अंतरराष्ट्रीय दबाव और वैश्विक संस्थाओं पर प्रभाव डालने की कोशिशें इस संघर्ष को नया रूप दे रही हैं। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहता है तो दुनिया भर में लोकतांत्रिक नेताओं, एक्टिविस्टों और संगठनों पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि चीन की इस रणनीति पर अमेरिका और कई अन्य देशों की नजर बनी हुई है।

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