छत्तीसगढ़: हसदेव अरण्य बचाने जारी है आदिवासियों का धरना, कभी सरकार से,कभी भगवान से कर रहे विनती !
सरगुजा, 27 अप्रैल। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार ने परसा कोल ब्लॉक में खनन को मंजूरी दे दी है, इसके साथ ही हसदेव अरण्य के आदिवासियों के अपने गांव और जंगलों और देव स्थानों को बचाने के लिए संघर्ष बढ़ गया है। सरगुजा की परसा खदान से प्रभावित होने वाले हरिहरपुर गांव में बीते 56 दिनों से आदिवासियों का धरना जारी है। आदिवासी कभी सरकार से गुहार लगाते है ,तो कभी भगवान से की किसी तरह उनका गांव,जंगल सलामत रहे।

ग्रामीणों का विरोध जारी
सरगुजा के परसा कोयला खदान से प्रभावित ग्रामीणों का कहना था, छत्तीसगढ़ सरकार ने कोयला खनन परियोजना को फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव के आधार पर आगे बढ़ाया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कभी भी किसी खनन परियोजना को स्वीकृत नहीं किया है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने 6 अप्रैल को परसा कोल ब्लॉक में खनन परियोजना के लिए वन स्वीकृति जारी की थी। परसा खदान राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम को आवंटित की गई है। सरकार की तरफ से खनन को हरी झंडी दिए जाने के बाद भी आदिवासियों का संघर्ष अब भी जारी है। खदान से प्रभावित गांव साल्ही, हरिहरपुर और फतेहपुर के ग्रामीण विरोध जारी रखे हुए हैं।

करीब 2 लाख पेड़ो के काटने का काम शुरू
हसदेव अरण्य क्षेत्र में ग्रामीणों के विरोध के बावजूद वन विभाग ने करीब 2 लाख पेड़ काटने का काम शुरू कर दिया है। इन पेड़ों को कटने से बचाने के लिए आदिवासी ग्रामीण खुलकर विरोध में आ गए है। अपना घर छोड़कर पूरी रात ग्रामीण जंगलो में बीतकर पेड़ो की रखवाली कर रहे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक ग्रामीणों की मौजूदगी में पेड़ काटने आये वनकर्मियों को जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ रहा है।ग्रामीणों ने अब तक विभिन्न धरना प्रदर्शन , ज्ञापन पदयात्रा के जरिये सरकार तक अपनी बातें पहुंचाने की कोशिश की है, लेकिन बात अनुसनी किये जाने के बाद अब वह देवताओं को भी मना रहे हैं। सोमवार को ग्रामीणों ने आदिवासियों के मूल देवता बुढ़ादेव की पूजा अर्चना करने के साथ जंगल बचाने की अपील करते नारे लगाए।

रातभर पेड़ो की सुरक्षा कर रहे ग्रामीण
हसदेव अरण्य क्षेत्र में परसा कोल ब्लॉक में खनन शुरू किए जाने के खिलाफ 2 मार्च से ग्राम हरिहरपुर जिला सरगुजा में अनिश्चित कालीन धरना जारी है। 6 अप्रैल को छत्तीसगढ़ सरकार ने इस खनन परियोजना हेतु वन स्वीकृति जारी की थी, परंतु प्रभावित गांव साल्ही, हरिहरपुर और फतेहपुर गांव की ग्रामसभाओं के फर्जी प्रस्ताव की कोई भी विधिवत जांच नहीं हुई । आदोलनकारियों का कहना है कि इन गांव की ग्रामसभाओं ने कभी भी खनन परियोजना को सहमति नही दी।छत्तिसगर बचाओ आंदोलन के संचालक आलोक शुक्ला का कहना है कि अक्टूबर माह में 300 किलोमीटर पदयात्रा के बाद भी हसदेव के आदिवासियों की कोई सुनवाई नही हुई, बल्कि अदानी के लिए गैरकानूनी रूप से समस्त स्वीकृतियां दे दी गई हैं । इसलिए 2 मार्च से चल रहे इस आंदोलन में धरना स्थल पर ही सांस्कृतिक कार्यक्रम जारी है। महिलाएं जंगल में पहरा देकर अपने जंगल की सुरक्षा का कार्य कर रही हैं।

राजस्थान सरकार को मिली है खनन की मंजूरी
छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार पर अपनी पार्टी की राजस्थान सरकार को खदान की अंतिम मंजूरी दिलाने के लिए बेहद समय से दबाव था। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले माह रायपुर पहुंचकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ चर्चा की। राजस्थान का कहना था, खदान संचालन नहीं होने से उनके प्रदेश में बिजली का संकट खड़ा हो जायेगा ,क्योंकि राजस्थान को बिजली घरों को चलाने के लिए पर्याप्त कोयला नहीं मिल पा रहा है। सीएम भूपेश बघेल ने गहलोत की बात मानकर परसा कोयला खदान के लिए वन भूमि देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी ।
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