Chhattisgarh: जंगल से निकले आदिमानव, लोग रह गए दंग,कहा- मत काटो पेड़, जानिए मामला

बालोद में आम लोग तब अंचभित रह गए,जब जंगलों के रास्ते से आदिमानव वनवासी के रूप में कुछ व्यक्ति उनके सामने आ खड़े हो गए। दरअसल उन लोगों की वेशभूषा एकदम ऐसी थी,जैसे वह जंगलों में रहने वाला बनमानुष हो।

बालोद, 08 सितंबर। छत्तीसगढ़ के बालोद में जंगलों घूम रहे कुछ ग्रामीण उस समय अचंभित हो गए,जब उन्होंने अपने निकट आदिमानवों को खड़े देखा। गांव के लोगों से उन्होंने कहा कि पेड़ों को मत काटो,इसी से हमारा जीवन हैं।

जंगल से निकले आदिमानव,लोग रह गए दंग

जंगल से निकले आदिमानव,लोग रह गए दंग

बालोद में आम लोग तब अंचभित रह गए,जब जंगलों के रास्ते से आदिमानव वनवासी के रूप में कुछ व्यक्ति उनके सामने आ खड़े हो गए। दरअसल उन लोगों की वेशभूषा एकदम ऐसी थी,जैसे वह जंगलों में रहने वाला बनमानुष हो। दरअसल यह पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने का एक प्रयास था। जल जंगल नहीं, तो हम नहीं का सन्देश लेकर ग्रीन कमांडो वीरेंद्र सिंह के साथ उनकी 3 सदस्यों की टीम बालोद जिले के तटीय जंगलों में अनोखे प्रदर्शन करने पहुंची थी।

लगातार हो रही है पेड़ों की कटाई,जागरूकता है जरुरी

लगातार हो रही है पेड़ों की कटाई,जागरूकता है जरुरी

छत्तीसगढ़ के सभी संभागों में जंगल हैं। बालोद जिले में भी करीब 70 प्रतिशत हिस्सा हरे भरे जंगलों से घिरा हुआ है,लेकिन विकास की अंधी दौड़ ने इन जंगलों पर इंसानी मति की नजर लगा दी है। बीते कुछ सालों से जंगलों में अवैध कटाई बढ़ी है। स्थानीय लकड़हारों की मदद से लकड़ी तस्कर जंगलो से पेड़ो की कटाई कर रहे हैं। पेड़ो की कटाई के कारण पर्यावरण प्रेमी बेहद चिंतित नजर आ रहे हैं। इन्ही पर्यावरण प्रेमियों में से एक हैं "बालोद जिले के ग्रीन कमांडो वीरेंद्र सिंह " जो लोगों को अपने अनोखे प्रयासों से पर्यावरण के प्रति जागरूक कर रहे हैं।

 इसलिए लिया आदिमानव का रूप

इसलिए लिया आदिमानव का रूप

ग्रीन कमांडो वीरेंद्र सिंह का कहना है कि सरकारों की प्राथमिकता विकास होती है,जिसमे प्रकृति का विकास भी शामिल होना चाहिए. विकास के नाम पर अगर आप इंडस्ट्री बसा रहे हैं, तो वही दूसरी तरफ जंगलों को काट रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह लगातार वन्य प्राणियों के संरक्षण और जल संरक्षण को लेकर कोशिश कर रहे हैं. परंतु जनता पर इसका असर कम ही देखने को मिल रहा है,इसलिए बुधवार के दिन उनको अनोखे ढंग से जंगलों में जंगली वेशभूषा धारण करके लोगों का ध्यान खींचना पड़ा।

हर शनिवार चलाते हैं सफाई अभियान

हर शनिवार चलाते हैं सफाई अभियान

वीरेंद्र सिंह छत्तीसगढ़ में ग्रीन कमांडो के नाम से प्रसिद्ध है। वह बालोद जिले के दल्लीराजहरा के निवासी हैं। कुछ समय पहले वह झरना बांध से लगे तालाब की जलकुंभी को कफन की तरह ओढ़कर चर्चा में आए थे। लगातार 20 सालों से पर्यावरण जागरूकता के लिए काम करने वाले वीरेंद्र ने लोगो को जागरूक करने का अभियान छेड़ रखा है। दल्लीराजहरा में वीरेंद्र ने 25 बच्चों की टीम बना रखी है,जिनके साथ वह हर शनिवार सफाई और पौधरोपण अभियान चलाते हैं। उन्हें उनके योगदान के लिए कई राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

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