Chhattisgarh में है मगरमच्छों का गांव, बच्चों के साथ खेलते हैं Baby Crocodile
मगरमच्छ बेहद ही शक्तिशाली,खूंखार मांसाहारी जीव होता है। जिस नदी या झील में इनका निवास होता है,वहां लोग जाने से घबराते हैं,लेकिन ऐसा भय हर जगह नहीं है।
जांजगीर चांपा,03 सितंबर। कहते हैं पानी में रहकर मगरमच्छ से बैर नहीं करना चाहिए। वैसे तो यह कहावत जीवन के संदर्भ में हैं, लेकिन मगरमच्छ की ताक़त को प्रदर्शित करती है। मगरमच्छ बेहद ही शक्तिशाली,खूंखार मांसाहारी जीव होता है। जिस नदी या झील में इनका निवास होता है,वहां लोग जाने से घबराते हैं,लेकिन ऐसा भय हर जगह नहीं है। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में एक ऐसा गांव हैं, जहां क्रोकोडाइल यानि मगरमच्छ इंसानों के बीच इनके दोस्त की तरह ही रहते हैं।

रास्ते में मिल जायेगा मगरमच्छ
छत्तसीगढ़ के जांजगीर चांपा जिले के अकलतरा नाम के कस्बे से सटे कोटमीसोनार गांव में किसी भी समय आपको मगरमच्छ घूमते दिख जायेंगे। क्योंकि यहां बरसों ने मगरमच्छ और इंसान घुलमिलकर रहते आये हैं। मगरमच्छ भी बेवजह किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते और ना इंसान उन्हें कष्ट देते हैं। आपस सावधानी और प्राणियों के प्रति आदर इस गांव को मगरमच्छों और इंसानों का गांव बनाता है। अगर किसी ग्रामीण को मगरमच्छ मिल जाता है,तो वह उसे पकड़कर सुरक्षित क्रोकोडाईल पार्क छोड़ आता है।

ग्रामीण रखते हैं ख्याल
दरअसल कोटमीसोनार गांव में एक क्रोकोडाईल पार्क है।मगरमच्छ के बच्चे अंडों से बाहर निकलने के बाद पार्क के बाहर निकलकर बस्ती की तरफ चले जाते हैं। ग्रामीण बच्चों को अपने घर के किसी बर्तन में रातभर सुरक्षित रखने के बाद अगली सुबह क्रोकोडाइल पार्क में छोड़ देते हैं। ग्रामीण का कहना है कि जब मगरमच्छ हमे नुकसान नहीं पहुंचाते हैं,तो हमारा भी उनकी सुरक्षा करना फर्ज है।

बच्चों के दोस्त बेबी क्रोकोडाइल
मगरमच्छ के बच्चों को अपने गांव और घर के आस पास घूमते देखकर गांव के बच्चे भी उन्हें अपना दोस्त समझते हैं। बच्चे अक्सर उन्हें उठाकर उनके साथ खेलते हैं,लेकिन मगर कभी भी उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाता। दरअसल कोटमी सोनार गांव के अधिकतर तालाबों में बरसों से मगरमच्छों का अवास था। हमेशा ही ग्रामीणों का सामना मगरमच्छों से हो जाता था,लेकिन साल 2006 में छत्तीसगढ़ सरकार ने मगरमच्छों की संख्या को देखते क्रोकोडाइल पार्क की स्थापना की। इस पार्क में बने बड़ी सी झील में लगभग 400 मगरमच्छ रहते हैं। बताया जाता है कि चेन्नई के बाद यह देश का दूसरा सबसे बड़ा क्रोकोडाइल पार्क है।

मानते हैं देवता
कोटमीसोनार गांव में मगरमच्छ आज से नहीं,बल्कि दशकों से हैं। बताया जाता है कि सन 1857 से बड़ी संख्या में मगरमच्छ पाए जा रहे हैं,लेकिन कभी मगरमच्छों के कारण मौत की स्थित नहीं बनी है। इसके अलावा आसपास के गांव पोड़ीदल्हा, कल्याणपुर, रसेड़ा, अर्जुनी, अकलतरी में भी मगरमच्छ दिखाई देते हैं। मगरमच्छों के साथ पीढ़ियों से जुड़े रहने के कारण इस पूरे इलाके के लोग उसका आदर भी करते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि हिन्दू मान्यताओं के मुताबिक़ हम मगरमच्छ को देवता मानते हैं।
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