Chhattisgarh: ITBP ने नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शुरू किया मुफ्त पशु चिकित्सालय, 20 गांवों को मिलेगा लाभ
Chhattisgarh: भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने छत्तीसगढ़ के विकास और जनकल्याण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। ITBP ने माओवाद प्रभावित मोहला-मानपुर जिले के सिटागांव में मुफ्त फील्ड पशु चिकित्सालय की शुरुआत की है।
यह पहल न सिर्फ क्षेत्र की पशुपालन जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक मील का पत्थर है, बल्कि यह ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास भी है।

यह अस्पताल ITBP की 27वीं बटालियन द्वारा शुरू किया गया है और यह इस क्षेत्र का अपनी तरह का पहला पशु चिकित्सालय है। इसका उद्देश्य सिटागांव और इसके आसपास के लगभग 20 गांवों के किसानों और पशुपालकों को मुफ्त पशु चिकित्सा सुविधा प्रदान करना है।
Chhattisgarh: ITBP की पहल में ग्रामीणों की बड़ी भागीदारी
27वीं बटालियन के कमांडेंट विवेक कुमार पांडे ने बताया कि इस पशु चिकित्सालय में विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों और चिकित्सा स्टाफ की टीम द्वारा 12,000 से अधिक पशुओं का मुफ्त इलाज किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि और पशुपालन आजीविका की रीढ़ माने जाते हैं और यह अस्पताल पशुओं की सेहत और उत्पादकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा।
उद्घाटन समारोह के दौरान सैकड़ों ग्रामीण अपने पशुओं के साथ अस्पताल पहुंचे। इस मौके पर आईटीबीपी के जवानों ने स्वच्छता, बाल स्वास्थ्य, पोषण और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों पर जागरूकता अभियान भी चलाया। ग्रामीणों को स्वच्छता बनाए रखने और वृक्षारोपण अभियान में भाग लेने के लिए प्रेरित किया गया।
Chhattisgarh: विकास और सुरक्षा में आईटीबीपी की दोहरी भूमिका
गौरतलब है कि सिटागांव में आईटीबीपी पहले से ही एक फील्ड अस्पताल चला रही है जो अब तक 2,100 से अधिक ग्रामीणों को मुफ्त चिकित्सा सेवा प्रदान कर चुकी है। इस अस्पताल में मलेरिया, संक्रमण, चोटों और पुरानी बीमारियों का इलाज होता है और आधार कार्ड सत्यापन सेवाएं भी दी जाती हैं। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री ने 16 मई को COB सिटागांव में अपने दौरे के दौरान आईटीबीपी की 15 वर्षों की शांति स्थापना और विकास प्रतिबद्धता की सराहना की थी।
इस पशु चिकित्सालय की स्थापना के साथ ही आईटीबीपी ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि वह सिर्फ एक सुरक्षा बल नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास और जनकल्याण में सक्रिय भागीदार भी है। माओवादी क्षेत्रों में आईटीबीपी की यह पहल न सिर्फ सुरक्षा की दृष्टि से अहम है, बल्कि स्थानीय जनता के विश्वास और सहयोग को भी मजबूत करती है।
सिटागांव में प्रारंभ हुआ यह मुफ्त पशु चिकित्सालय न केवल पशुओं की देखभाल में एक नया अध्याय जोड़ता है, बल्कि यह दर्शाता है कि सुरक्षा बल स्थानीय समाज से किस प्रकार जुड़ सकते हैं और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। आईटीबीपी की यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्विकास की दिशा में एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरी है।
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