OPINION: छत्तीसगढ़ में चिकित्सा सुविधाओं का हुआ विस्तार, साय सरकार ने हिंदी में शुरू की मेडिकल शिक्षा
Chhattisgarh Government Opinion: छत्तीसगढ़ कभी भारत के बीमारू राज्यों में गिना जाता था, अब स्वास्थ्य सुविधाओं और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक नई दिशा की ओर बढ़ रहा है। 2000 में जब इसे मध्य प्रदेश से अलग कर एक नया राज्य बनाया गया था, तब यहां की स्वास्थ्य सेवाएं बहुत ही कमजोर थीं। अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं तक नहीं थीं, और लोग गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए राज्य से बाहर जाने को मजबूर थे। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस राज्य की कठिनाइयों को भांपते हुए इसे अलग राज्य बनाने का फैसला लिया था, ताकि यह अपनी आंतरिक क्षमताओं को पहचान सके और विकास की दिशा में कदम बढ़ा सके। उस समय चिकित्सा ढांचा बहुत ही कमजोर था, लेकिन आज, दो दशकों में छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में शानदार विकास किया है।

राज्य में चिकित्सा शिक्षा का तेजी से विस्तार
छत्तीसगढ़ में अब दस शासकीय मेडिकल कॉलेज हैं, जबकि पहले एक ही रायपुर में था। एमबीबीएस की सीटें बढ़कर 1460 हो गई हैं, जिससे राज्य को न केवल सामान्य डॉक्टर मिल रहे हैं, बल्कि अब राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी कमी नहीं है। शासकीय मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर (पीजी) की सीटें भी बढ़ाई गई हैं, जिससे राज्य के डॉक्टर अब उच्चतम स्तर की चिकित्सा शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
इसके अलावा, राज्य सरकार ने स्थानीय युवाओं के लिए एक बड़ी राहत दी है। अब छत्तीसगढ़ के सभी मेडिकल कॉलेजों में हिंदी में भी पढ़ाई की शुरुआत की गई है, जिससे छात्रों को अपनी मातृभाषा में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं में अभूतपूर्व सुधार
स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वास्थ्य बजट में वृद्धि की गई है, जो अब 7563 करोड़ रुपये तक पहुँच चुका है। इस बजट के साथ राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हुआ है, जिससे राज्य के नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल रही हैं।
छत्तीसगढ़ में मातृ मृत्यु दर में 50% से अधिक की कमी आई है। 2003 में यह दर प्रति एक लाख में 269 थी, जो अब घटकर 137 हो गई है। संस्थागत प्रसव में भी 70% की बढ़ोतरी हो चुकी है और अब राज्य में 85.7% महिलाएं संस्थागत प्रसव का लाभ ले रही हैं।
आपातकालीन सेवाएं और डिजिटल हेल्थकेयर
राज्य सरकार ने आपातकालीन सेवाओं को भी प्राथमिकता दी है। 108 संजीवनी एंबुलेंस सेवा के तहत पिछले एक साल में 9 लाख से ज्यादा आपातकालीन कॉल्स आईं, जिनमें से लाखों मरीजों को इलाज की सुविधा मिली।
इसके अलावा, छत्तीसगढ़ सरकार ने डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पहले डिजिटल बजट में सभी संभागों में एम्स के समान सुपर स्पेशलिटी अस्पताल खोलने का निर्णय लिया गया, और बिलासपुर में इसकी शुरुआत हो चुकी है।
आयुष्मान योजना और मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना
राज्य में आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के तहत 77 लाख 20 हजार परिवारों को 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज मिल रहा है। इसके अलावा मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए 25 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इस योजना के तहत अब तक 1200 से ज्यादा मरीजों को 43 करोड़ रुपये की सहायता दी जा चुकी है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार तेजी से हो रहा है। उनका यह प्रयास है कि राज्य 2047 तक भारत के सबसे विकसित राज्यों में शामिल हो, और इसके लिए स्वास्थ्य सेवाओं का मजबूत ढांचा बेहद महत्वपूर्ण है।
आज छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के परिणामस्वरूप, राज्य के नागरिक न केवल स्वस्थ जीवन जी रहे हैं, बल्कि प्रदेश का समग्र विकास भी हो रहा है। इस प्रकार छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नयी दिशा और दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रहा है।
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