Chhattisgarh BJP: पद से हटाये गए दिग्गज, अब क्या होगा? कौशिक, साय के भविष्य पर उठे सवाल
Chhattisgarh BJP: पद से हटाये गए दिग्गज, अब क्या होगा? कौशिक, साय के भविष्य पर उठे सवाल
रायपुर, 18 अगस्त। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने दो बड़े परिवर्तन किये हैं। पहला बिलासपुर लोकसभा सीट से सांसद अरुण साव को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना,दूसरा वरिष्ठ भाजपा विधायक नारायण चंदेल को छत्तीसगढ़ विधानसभा का नया नेता प्रतिपक्ष बनाया जाना। इन दोनों परिवर्तन से अब तक पदों पर रहे दिग्गज नेताओं के भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदेव साय और पूर्व नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक की आगे पार्टी में क्या भूमिका होगी? यह सवाल सियासी गलियारों में बड़े रूचि के साथ उठाये जा रहे हैं।

कौशिक का भविष्य होगा तय
धरमलाल कौशिक की बात करें, तो छत्तीसगढ़ बनने के बाद से लेकर अब तक वह हमेशा महत्त्वपूर्ण पदों पर रहे हैं। पहले भाजपा प्रवक्ता , प्रदेश महामंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली,फिर विधानसभा अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष भी बने। यह पहली बात होगा कि कौशिक किसी बड़ी जिम्मेदारी से मुक्त होंगे। सवाल यह उठ रहा है कि भाजपा संगठन प्रदेश स्तर के इतने बड़े नेता को खाली क्यों बैठाकर रखना चाहेगा?
खुद कौशिक का कहना है कि मै विधायक हूं, डेढ़ साल में चुनाव है। मै पूरे प्रदेश का दौरा करूंगा और कांग्रेस को उखाड़ फेंककर ,फिर सरकार बनाएंगे। इसके अलावा कौशिक का अपने भविष्य को लेकर कहना है कि नेतृत्व परिवर्तन करते रहता है, हमे जो भी जवाबदारी मिलेगी ,उसे निभाने के लिए तत्पर रहेंगे,राजनीती में कभी कोई अवसर अंतिम नहीं होता, फिर शुरुआत होती है।

साय को किया जायेगा एडजेस्ट
विष्णुदेव साय छत्तीसगढ़ में भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं। वह मोदी सरकार के पहले टर्म में मंत्री भी रह चुके हैं,इसके अलावा वह छत्तीसगढ़ में भाजपा के 4 बार प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। चुनाव से ठीक पहले राज्य के वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री विष्णुदेव साय को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया जाना भी कई सवाल खड़े कर रहा है। सहज सरल के स्वाभाव वाले साय आदिवासी वर्ग में काफी बड़ा कद रखते हैं ,लिहाजा पार्टी उनकी उपयोगिता को कम नहीं आंकेगी। सूत्र बताते हैं कि साय को किसी राष्ट्रीय आयोग में जगह दी जा सकती है। इसके अलावा उन्हें फ्री हैंड देकर मिशन 2023 के लिए पार्टी के मार्गदर्शक मंडल में अहम् स्थान दिया जा सकता है।

बड़ा फैसला लाएगा बड़ा बदलाव
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेंस ने 68 सीटों पर कब्ज़ा जमकर बहुमत हासिल किया था,जबकि 15 साल तक छत्तीसगढ़ की सत्ता पर काबिज रही बीजेपी को केवल 15 सीटें मिली थीं। इस करारी हार के बाद भी कांग्रेस के सामने भाजपा कमजोर होती गई और कई उपचुनाव में भी अपनी सीटें गंवा दी। पार्टी के भीतर इस बात पर चर्चा लम्बे समय से हो रही थी कि छत्तीसगढ़ में भाजपा को एक नए नेतृत्व की दरकार है।
अरुण साव और नारायण चंदेल को चुनाव से ठीक पहले अहम पदों पर बैठाने से जहां एक तरफ कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ेगा,वहीं इन दोनों नेताओं के लिए भी खुद को साबित करने की चुनौती है। माना जा रहा है कि दोनी नेता पार्टी की नई जान फूंकने के साथ ही खुद को भी स्थापित करने की रणनीति पर काम शुरू कर चुके हैं,क्योंकि काफी दिनों बाद छत्तीसगढ़ में भाजपा के भीतर चुनिंदा चेहरों से अलग चेहरों पर भरोसा किया गया है।

सीएम होगा फेस होगा ओबीसी
भाजपा में हुए परिवर्तनों के बाद सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि यह बदलाव पिछड़ा वर्ग को साधने के लिहाज से किये गए हैं। नए प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव और नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल दोनों पिछड़ा वर्ग से आते हैं। लेकिन यह भी रोचक तथ्य है कि नेता प्रतिपक्ष के पद से हटाए गए धरमलाल कौशिक भी ओबीसी वर्ग के ही नेता हैं। ऐसे में इस सम्भावना को ख़ारिज नहीं किया जा सकता है कि आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में अरुण साव , नारायण चंदेल के साथ धरमलाल कौशिक भी रेस में होंगे।
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