छत्तीसगढ में हुए कब-कब हुए बड़े एनकाउंटर, अब तक इतने नक्सलियों की गई जान, कितनों ने छोड़े हथियार
Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी जंग छिड़ चुकी है। 2023 के विधानसभा चुनाव जीतने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से वादा किया था कि अगर छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनती है, तो मोदी की गारंटी के तौर पर छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का सफाया कर दिया जाएगा वहीं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी लगातार इस बात को दोहराते रहे हैं कि नक्सलवाद की समस्या को अगले 2 साल में ही पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ की सत्ता पर काबिज होते ही मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मोदी की गारंटी को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। राज्य सरकार केंद्र सरकार की सहायता से माओवादियों के खिलाफ सख्त एक्शन ले रही है।
माओवादी समस्या से प्रभावित बस्तर संभाग के सभी जिलों में घने जंगल, पहुंचविहीन इलाकों में नक्सली अपना कैंप लगाते हैं।

नक्सलियों पर शिकंजा कसने के लिए हाल के सालों में सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के खिलाफ अभियान तेज किया है। पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में भी कई मुठभेड़ और एनकाउंटर हुए थे लेकिन भाजपा की सरकार आने के बाद नक्सल विरोधी अभियानों की गति दोगुनी हो गई है।
2024 में छत्तीसगढ़ के नक्सल क्षेत्रों में अब तक सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ों में 100 से अधिक नक्सली मारे जा चुके हैं। सीएम विष्णुदेव साय का कहना है कि जबसे बीजेपी सरकार में आई है, हम नक्सलवाद के साथ मजबूती से लड़ रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह भी चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद समाप्त होना चाहिए।
कब,कहां हुई मुठभेड़,कितने नक्सली मारे गए, समझिए
(1) कांकेर जिले में 16 अप्रैल को सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में 29 नक्सली मारे गए थे। मारे गए नक्सलियों में 25 लाख रुपये का इनामी शंकर राव और 25 लाख रुपये की इनामी ललिता भी शामिल थी।
(2) 30 अप्रैल को नारायणपुर और कांकेर जिलों की सीमा पर मुठभेड़ में 10 नक्सली मारे गए थे। यह मुठभेड़ 9 घंटे तक चली थी।
(3) 02 अप्रैल को बीजापुर के गंगालूर थाना क्षेत्र के कोरचोली और लेंड्रा के जंगल में हुई जबरदस्त मुठभेड़ में पुलिस ने तीन महिला नक्सली समेत 13 नक्सलियों को मार गिराया था।
(4) 6 अप्रैल को तेलंगाना-छत्तीसगढ़ सीमा पर पुजारी कांकेर के कर्रीगुटा के जंगलों में मुठभेड़ में 3 नक्सली ढेर हुए थे।
(5) 10 मई को बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के तहत पीड़िया गांव के जंगल में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में 12 नक्सलियों को मार गिराया था।
(6) 23 मई को नारायणपुर के अबूझमाड़ के जंगलों में मुठभेड़ में 8 नक्सलियों को मार गिराया था।
(7) बीजापुर जिले के पीड़िया के जंगल में 10 मई की सुबह 12 घंटे तक चली मुठभेड़ में 12 नक्सली मारे गए
(8) 25 मई को सुकमा और बीजापुर जिले में पुलिस नक्सली मुठभेड़ में तीन नक्सली ढेर हुए थे।
(9) 8 जून अबूझमाड़ के आमदई एरिया में छह नक्सली मारे गये।
(10) 15 जून को नारायणपुर जिले के ओरछा में नक्सलियों के मुठभेड़ में आठ नक्सलियों ढेर किए गए थे।
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इतने नक्सलियों ने छोड़ा हथियार
एक तरफ नक्सली मुठभेड़ में मारे जा रहे हैं, तो वहीं माओवादियों के खेमे में भी फूट पड़ती नजर आ रही है। बीते 5 सालों में नक्सलियों ने बड़े पैमाने पर आत्म समर्पण किया है। दरअसल केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को 2026 तक नक्सली मुक्त करने का ऐलान किया है। अपने इस मिशन को पूरा करने के लिए मोदी सरकार लगातार कई कदम उठा रही है, जिसमें नक्सलियों को आत्मसमर्पण करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार हथियार छोड़कर मुख्य धारा से जुड़ने वाले नक्सलियों को शासकीय नौकरी मकान बच्चों को शिक्षा समेत कई सुविधाएं दे रही है। यूं तो पिछले 5 साल से नक्सलियों ने लगातार आत्मसमर्पण करना शुरू किया है, लेकिन मौजूदा साल में ही लगभग 600 के आसपास नक्सलियों ने हथियार छोड़ दिए हैं जो अब तक की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है।
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