Ambikapur मेडिकल कॉलेज मामले में कार्रवाई, शिशु रोग विशेषज्ञ निलंबित, अस्पताल अधीक्षक सिंह भी बदले गए
अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज मामले में अब स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के अनुमोदन के बाद अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर कमलेश विश्वकर्मा को निलंबित कर दिया गया है। वहीं अस्पताल के अधीक्षक लखन सिंह को भी हटा दिया गया है।

छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुए घटना पर अब जाकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई हुई है। इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव ने अस्पताल में शिशु रोग विभाग के सीनियर रेसीडेंट (शिशु रोग विशेषज्ञ) डॉ. कमलेश प्रसाद विश्वकर्मा को निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा अस्पताल के अधीक्षक डॉ. लखन सिंह को भी हटा दिया गया है।

अस्पताल का एक डॉक्टर निलंबित, टीम को मिली थी लापरवाही
राज्य शासन के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने आज स्वास्थ्य मंत्री के अनुमोदन के बाद अस्पताल में शिशु रोग विभाग के सीनियर रेसीडेंट (शिशु रोग विशेषज्ञ) डॉ. कमलेश प्रसाद विश्वकर्मा को निलंबित किया है। जांच टीम ने जांच में पाया था कि डॉ. विश्वकर्मा घटना की रात शिशु रोग विभाग में गंभीर अवस्था में नवजातों की भर्ती के बाद भी रात्रि ड्यूटी के दौरान उपस्थित नहीं थे। उन्होंने भर्ती शिशुओं के उपचार के लिए कोई पहल नहीं की।

अस्पताल अधीक्षक लखन सिंह भी बदले गए
जांच टीम ने पाया कि ड्यूटी और शिफ्ट लगाने में भी लापरवाही की गई। उनकी इस लापरवाही के कारण अस्पताल में भर्ती शिशुओं की मृत्यु हुई। शासन के अनुसार उनका यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का स्पष्ट उल्लंघन है। इसके साथ ही चिकित्सा शिक्षा विभाग ने अंबिकापुर चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध अस्पताल के अधीक्षक डॉ. लखन सिंह को भी हटा दिया है। उनके स्थान पर पैथोलॉजी विभाग के संचालक-सह-प्राध्यापक डॉ. आर.सी. आर्या को नया अस्पताल अधीक्षक बनाया गया है।
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शिशु रोग विशेषज्ञ सूरजपुर में अटैच रहेंगे
राज्य शासन ने पत्र जारी करते हुए डॉ. कमलेश प्रसाद विश्वकर्मा को पदीय दायित्वों एवं कर्तव्यों का तत्परतापूर्वक निर्वहन नहीं करने के कारण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम,1966 के नियम 9 (क) के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय, सिविल सर्जन-सह-मुख्य अस्पताल अधीक्षक, जिला चिकित्सालय सूरजपुर निर्धारित किया गया है। उन्हें निलंबन काल में मूलभूत नियम 53 के तहत नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।












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