'भारत के वैध ऊर्जा लेनेदेन का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए', रूस से कच्चे तेल के आयात पर भारत सरकार

ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए भारत रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदेगा। रूस के साथ भारत के ऊर्जा सहयोग के और गहरा होने की उम्मीद है

नई दिल्ली, 18 मार्च। भारत सरकार ने रूस से कच्चे तेल के आयात और रूस के साथ ऊर्जा संबंधों को लेकर कहा कि भारत के वैध ऊर्जा लेनेदेन का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।

भारत सरकार ने कहा कि ऊर्जा की मांगों को पूरा करने और उचित मूल्य पर खरीददारी करने के लिए भारत को प्रतिस्पर्धा ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करते रहना होगा। हम सभी निर्माताओं से ऐसे प्रस्तावों (छूट) का स्वागत करते हैं। भारतीय व्यापारी भी सर्वोत्तम विकल्प तलाशने के लिए वैश्विक ऊर्जा बाजारों में काम करते हैं। केंद्र सरकार के स्रोतों ने कहा कि तेल आत्मनिर्भरता वाले देश या रूस से खुद आयात करने वाले देश विश्वसनीय रूप से प्रतिबंधात्मक व्यापार की वकालत नहीं कर सकते। भारत के वैध ऊर्जा लेनदेन का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।

crude oil

उन्होंने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है। हमारी कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 85% (प्रति दिन 5 मिलियन बैरल) आयात करना पड़ता है, जिसका अधिकांश आयात पश्चिम एशिया (इराक 23%, सऊदी अरब 18%, संयुक्त अरब अमीरात 11%) से होता है।

रूस से तेल आयात पर क्या बोला अमेरिका
भारत द्वारा रूस से तेल आयात पर संयुक्त राज्य अमेरिका ने कहा है कि भारत द्वारा रियायती कच्चे तेल के रूस के प्रस्ताव को स्वीकार करना अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन नहीं होगा, लेकिन साथ ही कहा कि इस तरह के कदम से नई दिल्ली इतिहास में गलत के पक्ष में खड़ी दिखाई देगी।

व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव जेन साकी ने संवाददाताओं से कहा, किसी भी देश के लिए हमारा संदेश यह है कि हमने जो प्रतिबंध लगाए हैं, उसका पालन करें। रूसी नेतृत्व के समर्थन का मतलब युद्ध का समर्थन करना है जो स्पष्ट रूप से विनाशकारी प्रभाव डाल रहा है।

ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए भारत रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदेगा। रूस के साथ भारत के ऊर्जा सहयोग के और गहरा होने की उम्मीद है क्योंकि कई प्रमुख पश्चिमी देशों ने रूस के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद रूसी ऊर्जा स्रोतों का आयात जारी रखा है। इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि उन रिपोर्टों की पृष्ठभूमि में हुई है कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) के बाद हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने दो मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदा है क्योंकि भारतीय ऊर्जा प्रमुख रूस से ऊर्जा स्रोतों की आपूर्ति को सुरक्षित रखते हुए आगे बढ़ना चाहते हैं।

ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखना चाहता है भारत

एक सवाल के जवाब में कि क्या भारत रूसी ऊर्जा का विकल्प चुनेगा, जो कथित तौर पर छूट पर दी जा रही है, एक जानकार ने कहा कि भारत इस विकल्प के साथ जाएगा। ऐसा प्रतीत होता है कि भारत का यह निर्णय भारत की ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के की योजनाओं का हिस्सा है, क्योंकि तेल और गैर बाजार में पिछले कुछ हफ्तों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता देखी जा रही है।

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रूस से ऊर्जा सहयोग के लिए कुछ संशोधन करने होंगे

अधिकारी ने स्पष्ट किया कि रूस के साथ ऊर्जा सहयोग के लिए अमेरिकी प्रतिबंधों से उत्पन्न चुनौतियों के कारण वित्तीय मोर्चे पर कुछ आवश्यक समायोजन की आवश्यकता होगी। वरिष्ठ अधिकारियों की टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि सरकार ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए इस मामले में एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाया है और इस पर आगे बढ़ने की पूरी संभवना है। एक्सचेंज के जानकार सूत्रों ने बताया कि आईओसी की तरह एचपीसीएल ने भी यूरोपीय ऊर्जा व्यापारी विटोल के जरिए रूसी यूराल क्रूड खरीदा है।

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