अर्थव्यवस्था में भारत की ऐतिहासिक छलांग! World Economic Forum की Report ने दी खुशखबरी
World Economic Forum Report: विश्व आर्थिक मंच WEF की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले साल 2025 और 2026 में भारत दुनिया की अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा रफ्तार देने वाला देश बनने जा रहा है। दुनिया भर के बड़े-बड़े अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि भारत की इकोनॉमी की बुनियाद बहुत मजबूत है और भले ही बाकी दुनिया में हालात अनिश्चित हों, लेकिन भारत का भविष्य काफी उज्ज्वल नजर आ रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है, भारत, जो इस क्षेत्र की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, विकास का मुख्य इंजन बनने के लिए तैयार है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की जीडीपी वृद्धि दर 2025 में 6.2% और 2026 में 6.3% रहने का अनुमान लगाया है, जिससे यह दक्षिण एशिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बन जाएगी।

व्यापार और मांग में तेजी
रिपोर्ट में कहा गया है कि भले ही साउथ एशिया को कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हो जैसे चीन के एक्सपोर्ट रास्तों में बदलाव का असर लेकिन अच्छी खबरें भी हैं। हाल ही में जो डेटा आया है, उसमें दिखा कि बिज़नेस और एक्सपोर्ट ऑर्डर की मांग बढ़ रही है। मतलब, हमारे यहां बनी चीजों की दुनियाभर में डिमांड है। इसके अलावा, इंडिया और यूके के बीच जो नया ट्रेड एग्रीमेंट हुआ है, उससे भी भारत के व्यापार को मजबूती मिलेगी।
दक्षिण एशिया बना सबसे आशाजनक क्षेत्र
सभी वैश्विक क्षेत्रों में दक्षिण एशिया सबसे आशाजनक क्षेत्र बनकर उभरा है, जहां लगभग 33% अर्थशास्त्रियों ने 2025 के शेष वर्ष में मजबूत या बहुत मजबूत आर्थिक वृद्धि की संभावना जताई है।
हालांकि, कुछ चिंताएं भी बनी हुई हैं
मई की शुरुआत में भारत-पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव से क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ी है।
मुद्रास्फीति के मोर्चे पर, 61% अर्थशास्त्रियों ने आने वाले महीनों में मध्यम और 26% ने उच्च मूल्य वृद्धि की संभावना जताई है।
वैश्विक स्थिति नाजुक, अमेरिका की नीतियों पर चिंता
वैश्विक स्तर पर, आर्थिक माहौल अब भी कमजोर और अस्थिर बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल की शुरुआत से अब तक वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति और कमजोर हुई है। अमेरिका की नई आर्थिक और व्यापार नीतियां चिंता का विषय बनी हुई हैं। अप्रैल में अमेरिका ने कई देशों पर शुल्क (टैरिफ) बढ़ाने की घोषणा की थी, जिससे वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ा। हालांकि इनमें से अधिकतर शुल्कों को अब 90 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है, लेकिन उसके बाद की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
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