Bank Privatisation: इन दो सरकारी बैंकों के निजीकरण को लेकर आई एक और खबर, जानें क्या होगा खाताधारकों पर असर

Bank Privatisation: इन दो सरकारी बैंकों के निजीकरण को लेकर आई एक और खबर, जानें क्या होगा खाताधारकों पर असर

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बैंकों के निजीकरण की तैयारी कर ली है। सरकार निजी हाथों में बैंकों को सौंपने जा रही है। केंद्र सरकार ने आम बजट के दौरान ही इस बात की घोषणा की थी। सरकार ने दो बैंकों के निजीकरण की बात कही, जिसक बाद नीति आयोग की सलाह पर दो बड़े सरकारी बैंक के निजीकरण का रास्‍ता साफ कर दिया गया है। सरकार ने इंडियन ओवरसीज बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के प्राइवेटाइजेशन की बात कगी है, जिसे लेकर अब एक और बड़ी खबर आ रही है।

 इन दो सरकारी बैंकों का निजीकरण

इन दो सरकारी बैंकों का निजीकरण

सरकार ने दो सरकारी बैंकों के निजीकरण की बात कही है। जिसकी तैयारी जोर-शोर से चल रही है। सरकार ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में अल्टरनेटिव मेकैनिज्म के ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की बैठक हुई। इस अहम बैठक में बैंकों के निजीकरण को लेकर अहम चर्चा की गई है। सरकार ने इस मीटिंग में बैंकों के निजीकरण को लेकर चरणबद्ध तरीके से उठा जाने वाले कदम को लेकर चर्चा की गई। इस बैठक में वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण क साथ केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव के साथ-साथ कोयला मंत्री भी शामिल थे। अल्टरनेटिव मेकैनिज्म के ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स के ऊपर बैंकों के निजीकरण के फैसले की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

 बैंकों के निजीकरण का क्या होगा खाताधारकों पर असर

बैंकों के निजीकरण का क्या होगा खाताधारकों पर असर

सरकारी से निजी बैंक बनने पर बैंक के खाताधारकों के साथ-साथ बैंक कर्मचारियों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। जहां कर्मचारी अपनी नौकरी को लेकर चिंता में हैं तो वहीं खाताधारकों को अपनी जमापूंजी का डर सता रहा है, लेकिन जनकारों के मुताबिक बैंकों क निजीकरण से बैंकों के ग्राहकों पर कोई असर नहीं होगा। खाताधारकों की जमापूंजी और उन्हें मिलने वाली सर्विस पर कोई असर नहीं पड़ेगी। उनकी सेवा पहले की तरह जारी रहेगी।

 बैंकों के निजीकरण से 1.75 लाख करोड़ निवेश जुटाने का लक्ष्य

बैंकों के निजीकरण से 1.75 लाख करोड़ निवेश जुटाने का लक्ष्य

सरकार बैंकों के निजीकरण से निवेश जुटाने की तैयारी कर रही है। आम बजट के दौरान वित्त मंत्री ने दो सरकारी बैंकों और एक बीमा कंपनी के निजीकरण की बात कही थी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए विनिवेश के जरिये 1.75 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य रखा है। हालांकि सरकार के इस फैसले से बैंक कर्मचारी नाखुश है।

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