WWI Artillery Shell: शख्स के शरीर में घुसा 'बम का गोला', सहमे डॉक्टर, अस्पताल में मचा हड़कंप
एक शख्स की खास शौक के चलते एक बड़ी मुसीबत में फंस गया। इस में उसकी जान भी जा सकती थी। उसके शरीर एक हिस्से में आर्टिलरी शेल घुस गई थी।

WWI Artillery Shell inside body: कई बार कुछ ऐसे खास शौक होते हैं, जिनके कारण जान भी जोखिम में पड़ जाती है। फ्रांस के एक शख्स ने कुछ ऐसा किया। शख्स की उम्र 88 वर्ष है। शख्स के रेक्टम (मलाशय) में बम गोला (Artillery Shell) गया था। जिसके फटने के खतरा था। वृद्ध के अस्पताल पहुंचते ही हड़कंप मच गया। डॉक्टर्स पूरी तरह सहम गए। वहां बम निरोधक दस्ता बुलाना पड़ा।

अस्पताल में मचा हड़कंप
शख्स के अंदर फंसी आर्टिलर शेल शख्स जब निकलवाने अस्पताल पहुंचा तो हकीकत जान वहां डॉक्टर्स और नर्स के स्टाफ के सभी लोग डर गए। उन्हें अस्पताल में डर लगने लगा। अस्पताल के एक प्रवक्ता ने कहा कि 17 दिसंबर की रात 9 बजे इमर्जेंसी की स्थिति बन गई। करीब ढ़ाई घंटे बाद रात को 11:30 बजे बम निरोधक दस्ता पहुंचा। बम के निष्क्रिय किया गया तब जाकर स्थित सामान्य हुई। । बम के पूरी तरह से निष्क्रिय हो जाने के बाद डॉक्टरों ने शख्स का ऑपरेशन किया। हालांकि विशेषज्ञों ने कहा कि शख्स के शरीर में आर्टिलरी शेल फटने का खतरा बहुत कम था

विश्व युद्ध में हुआ था इस्तेमाल
शख्स के शरीर में फंस बम काफी पुराना था। इसे इस बम को 1900 के दशक में फ्रांसीसी सैनिकों ने इस्तेमाल किया था। फ्रांसीसी मीडिया के मुताबिक, शख्स को 17 दिसंबर की शाम अस्पताल पहुंचा। उसके मलाशय में 8 इंच के आर्टिलरी शेल फंसा था।

अंदर हो सकता था विस्फोट
शख्स के अंदर अर्टिलरी शेल के मौजूद होने की स्थिति में उसके पास जाने से लोग डरते थे। विस्फोट होने के डर था। ये मामला दक्षिणी फ्रांस का है। जहां टूलॉन में सैंटे मुसे अस्पताल शख्स रेक्टम में मौजूद अर्टिलरी शेल निकलवाने पहुंचा था।

कैसे रेक्टम में फंसी आर्टिलरी शेल
मरीज की हालत बेहद गंभीर थी। उसकी उम्र भी 88 वर्ष थी। ऐसे में वो मलाशय (Rectum) में बम घुसने की स्थिति को झेल नहीं पा रहा था। दरअसल, ये शेल रेक्टम में फंसी कैसे ये जानकर सब हैरान हैं। इसका कारण शख्स की एक खास आदत या फिर शौक थी। वो यौन सुख लेने के लिए अर्टिलरी शेल का प्रयोग करने लगा था। लेकिन 17 दिसंबर को उसकी शौक जापन पर बन आई।

अस्पताल में मचा हड़कंप
शख्स के अंदर फंसी आर्टिलर शेल शख्स जब निकलवाने अस्पताल पहुंचा तो हकीकत जान वहां डॉक्टर्स और नर्स के स्टाफ के सभी लोग डर गए। उन्हें अस्पताल में डर लगने लगा। अस्पताल के एक प्रवक्ता ने कहा कि 17 दिसंबर की रात 9 बजे इमर्जेंसी की स्थिति बन गई। करीब ढ़ाई घंटे बाद रात को 11:30 बजे बम निरोधक दस्ता पहुंचा। बम के निष्क्रिय किया गया तब जाकर स्थित सामान्य हुई। । बम के पूरी तरह से निष्क्रिय हो जाने के बाद डॉक्टरों ने शख्स का ऑपरेशन किया। हालांकि विशेषज्ञों ने कहा कि शख्स के शरीर में आर्टिलरी शेल फटने का खतरा बहुत कम था












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