कौन थे शहीद शुभम और पत्नी श्रद्धा? क्या करती हैं वाइफ? क्यों दोनों की शादी पर उठे सवाल, ससूर के आरोप से हड़कंप

Flight Lieutenant Subham Kumar Story: देश के लिए जान न्योछावर करने वाले वायुसेना के युवा अधिकारी फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार की शहादत के बाद उनके परिवार में एक ऐसा विवाद खड़ा हो गया है जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। 13 जून 2026 को असम के जोरहाट में वायुसेना का एक ट्रांसपोर्ट विमान क्रैश हो गया था, जिसमें बिहार के जहानाबाद के रहने वाले 25 वर्षीय होनहार ऑफिसर शुभम कुमार वीरगति को प्राप्त हो गए। शुभम की शहादत के बाद इसके ठीक अगले ही दिन उनके घर में एक नया तूफान आ गया। यह तूफान किसी और ने नहीं, बल्कि शुभम की पत्नी श्रेया राय को मिले 21 लाख मुआवजे की रकम ने खड़ा किया।

सवाल सिर्फ 21 लाख रुपये की सरकारी सहायता राशि का नहीं है, बल्कि उनकी शादी को लेकर भी है जिसपर अब दोनों परिवारों के बीच अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। शुभम के पिता अमरेंद्र शर्मा ने अपनी बहू श्रेया और स्थानीय प्रशासन पर बहुत संगीन आरोप लगाए हैं। पिता का कहना है कि उनकी बहू पति (शुभम) के श्राद्धकर्म की रस्में पूरी होने से पहले ही सरकार से मिला ₹21 लाख का चेक लेकर अपने मायके चली गई। ऐसे में आइए जानें आखिर शहीद शुभम कुमार कौन थे, उनकी पत्नी श्रेया राय कौन हैं, वे क्या करती हैं और दोनों की शादी की असली इनसाइड स्टोरी क्या है?

Who Was Flight Lieutenant Shubham Kumar

कौन थे फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार? (Who Was Flight Lieutenant Subham Kumar?)

बिहार के जहानाबाद जिले के हुलासगंज थाना क्षेत्र के तहत आने वाले बनवरिया गांव के रहने वाले शुभम कुमार बचपन से ही बेहद मेधावी और होनहार थे। उनके पिता अमरेंद्र एक साधारण किसान हैं और मां एक गृहणी (हाउसवाइफ) हैं। दो भाइयों में बड़े होने के कारण शुभम बचपन से ही काफी जिम्मेदार स्वभाव के थे।

  • सैनिक स्कूल से सफर की शुरुआत: साल 2009 में महज पांचवीं कक्षा के बाद शुभम का चयन आंध्र प्रदेश के सैनिक स्कूल के लिए हो गया था। उन्होंने छठी से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई वहीं से पूरी की।
  • टॉपर्स की लिस्ट में रहे शामिल: शुभम पढ़ने में इतने तेज थे कि उन्होंने मैट्रिक (10वीं) और इंटर (12वीं) दोनों ही परीक्षाओं में 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए थे।
  • पहले ही प्रयास में NDA क्रैक किया: साल 2017 में शुभम ने अपने पहले ही अटेम्प्ट में देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक एनडीए (NDA) एग्जाम पास कर लिया।
  • पुणे से हैदराबाद तक की ट्रेनिंग: इसके बाद साल 2018 से 2021 तक उन्होंने पुणे में वायुसेना की कड़ी ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग हैदराबाद में फ्लाइट लेफ्टिनेंट के तौर पर हुई थी, जहां वे 11 महीने तक पदस्थ रहे।

ग्रामीणों और परिवार के मुताबिक, शुभम पूरे घर के एकमात्र आर्थिक संबल थे। उनके अफसर बनने के बाद परिवार ने बैंक से लोन लेकर एक नया पक्का मकान बनाना शुरू किया था, जिसका काम अभी भी अधूरा है। फिलहाल शहीद का परिवार टिन की छत (कर्कट) वाले एक बेहद सामान्य मकान में रहने को मजबूर है।

Who Was Flight Lieutenant Shubham Kumar

कौन हैं पत्नी श्रेया राय और क्या करती हैं? (Who Is Subham Kumar Wife Shreya Rai)

इस पूरे विवाद के केंद्र में मौजूद श्रेया राय उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की रहने वाली हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि श्रेया राय कोई आम महिला नहीं हैं, बल्कि वे खुद भी भारतीय सेना (Indian Army) में लेफ्टिनेंट के पद पर कार्यरत हैं। ऐसा दावा दैनिक भास्कर से बात करते हुए शहीद लेफ्टिनेंट शुभम कुमार के पिता ने किया है।

शुभम के पिता अमरेंद्र शर्मा के मुताबिक, साल 2025 में जब परिवार शुभम के लिए शादी का रिश्ता देख रहा था, तभी शुभम ने अपनी मां के जरिए परिवार को बताया कि वह सेना में ही लेफ्टिनेंट के पद पर तैनात श्रेया राय को पसंद करता है। शुभम की खुशी में ही परिवार ने अपनी खुशी देखी और दोनों परिवारों ने मुलाकात कर बड़े ही सौहार्दपूर्ण माहौल में इस रिश्ते को आगे बढ़ाया। दोनों तरफ से शादी की बात पूरी तरह पक्की हो चुकी थी।

Who Was Flight Lieutenant Shubham Kumar

क्या वाकई लेफ्टिनेंट शुभम कुमार और श्रेया राय दोनों की शादी हुई थी? कोर्ट मैरिज का सच

दोनों परिवारों की रजामंदी के बाद दिसंबर 2025 में शुभम और श्रेया की शादी की तारीख भी तय कर दी गई थी। लेकिन इसी बीच एक दुखद घटना घटी; शुभम की दादी का अचानक निधन हो गया। हिंदू रीति-रिवाजों के मुताबिक घर में सूतक लगने के कारण शादी की तारीख को आगे बढ़ा दिया गया और तय हुआ कि अब दोनों की शादी साल 2027 की होली के आस-पास धूमधाम से की जाएगी।

लेकिन इसी बीच शुभम और श्रेया ने एक बड़ा कदम उठाया। पिता अमरेंद्र शर्मा का आरोप है कि श्रेया, उनके भाई और पिता ने शुभम को अपनी बातों में बरगलाकर गुजरात के अहमदाबाद में गुपचुप तरीके से कोर्ट मैरिज करवा दी थी।

इस कोर्ट मैरिज की कोई भी आधिकारिक या अनौपचारिक जानकारी शुभम ने अपने माता-पिता या भाई को नहीं दी थी। परिवार इस शादी से पूरी तरह अनजान था और वे इसी इंतजार में थे कि अगले साल होली पर बहू धूमधाम से घर आएगी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। शादी के वास्तविक मंडप में बैठने से पहले ही 13 जून को विमान हादसे में शुभम शहीद हो गए।

Who Was Flight Lieutenant Shubham Kumar

प्रशासन ने लेफ्टिनेंट शुभम कुमार और श्रेया राय की शादी पर क्या कहा?

जहां शहीद शुभम कुमार का परिवार सहायता राशि के वितरण पर सवाल उठा रहा है, वहीं प्रशासन इस मामले में पूरी प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बता रहा है। टीवी आजतक के मुताबिक जहानाबाद के अनुमंडल पदाधिकारी राजीव रंजन सिन्हा ने कहा है कि सरकारी और विभागीय रिकॉर्ड में श्रेया राय को शुभम कुमार की वैध पत्नी के रूप में दर्ज किया गया है। इसी आधार पर उन्हें अनुग्रह राशि और अन्य लाभ दिए गए हैं।

प्रशासन का कहना है कि किसी भी सरकारी सहायता का वितरण व्यक्तिगत दावों या पारिवारिक विवादों के आधार पर नहीं, बल्कि आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार किया जाता है। यदि उपलब्ध अभिलेखों में किसी व्यक्ति का नाम कानूनी वारिस या पत्नी के रूप में दर्ज है, तो नियमों के तहत उसी को लाभ दिया जाता है।

अधिकारियों का तर्क है कि इस मामले में भी सभी निर्णय रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी के आधार पर लिए गए हैं। हालांकि परिवार की आपत्तियों और दावों के बाद यह विवाद और गहरा गया है, क्योंकि एक तरफ प्रशासन दस्तावेजों का हवाला दे रहा है, तो दूसरी तरफ शहीद के परिजन पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।

Who Was Flight Lieutenant Shubham Kumar

'अंतिम संस्कार के दिन ₹21 लाख का चेक लेकर चुपचाप निकली बहू'

13 जून को हुए हादसे के बाद 14 जून को शहीद शुभम का पार्थिव शरीर बिहार लाया गया। गया के प्रसिद्ध विष्णुपद श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां शुभम के छोटे भाई छोटू ने उन्हें मुखाग्नि दी। वायुसेना के अधिकारियों ने प्रोटोकॉल के तहत शुभम की मां को तिरंगा और उनकी टोपी सौंपी।

इस दौरान श्रेया राय भी अपने पिता और भाई के साथ वहां पहुंची थीं। पिता अमरेंद्र शर्मा का कहना है कि श्रेया चेहरे पर मास्क लगाए एक कोने में चुपचाप खड़ी थी और उसके चेहरे पर पति को खोने का कोई गम नहीं दिख रहा था। इसी दौरान सारा विवाद तब शुरू हुआ जब हुलासगंज के अंचलाधिकारी (CO) ने परिवार को बिना कोई सूचना दिए, अत्यंत गुप्त तरीके से बिहार सरकार की ओर से मिलने वाली ₹21 लाख की अनुग्रह राशि का चेक श्रेया राय को सौंप दिया।

अमरेंद्र शर्मा का आरोप है कि चेक मिलते ही श्रेया पति के दशकर्म और श्राद्धकर्म की रस्मों का इंतजार किए बिना, उसी दिन चुपचाप आजमगढ़ के लिए रवाना हो गई। पिता ने कहा, "अगर वह मेरे बेटे की कानूनी पत्नी है, तो वह मेरी बहू है और पैसे पर उसका हक भी है। लेकिन क्या एक पत्नी का कोई फर्ज नहीं होता? उसे इस दुख की घड़ी में अपने ससुराल के गरीब माता-पिता के साथ रहना चाहिए था, लेकिन वह तो पैसे मिलते ही चली गई।" उन्होंने स्थानीय प्रशासन और सीओ पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया है कि चेक देने की प्रक्रिया इतनी गुपचुप क्यों रखी गई।

दादा बोले- '40 साल पुराना खटारा विमान की वजह से शुभन की जान गई'

इस बेहद भावुक माहौल के बीच शहीद शुभम के दादाजी का गुस्सा केंद्र सरकार और वायुसेना के पुराने सिस्टम पर फूटा है। उन्होंने रोते हुए बेहद कड़े शब्दों में कहा, "मेरे पोते को किसी दुश्मन ने नहीं, बल्कि हमारी सरकार और सिस्टम ने मारा है। सरकार 40-40 साल पुराने कबाड़ और असुरक्षित विमानों को जबरन उड़वाकर हमारे देश के जांबाज बेटों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है।"

उन्होंने सरकार को नसीहत देते हुए कहा कि भले ही सरकार बुजुर्गों की पेंशन बंद कर दे, लेकिन देश की सुरक्षा करने वाले जवानों की सुरक्षा और उनके आधुनिक विमानों के बजट में कोई कटौती नहीं होनी चाहिए। शुभम के छोटे भाई ने बताया कि हादसे वाले दिन सुबह 9 बजे ही शुभम ने वीडियो कॉल कर कहा था कि वहां तेज बारिश हो रही है और वे एक जरूरी मिशन पर जा रहे हैं, लेकिन दो घंटे बाद ही उनकी मौत की खबर आ गई।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल पूरा विवाद दो बड़े सवालों के इर्द-गिर्द घूम रहा है। पहला, क्या शुभम और श्रेया की कोर्ट मैरिज हुई थी और दूसरा, सहायता राशि के वितरण की प्रक्रिया में क्या सभी पक्षों को जानकारी दी गई थी?

परिवार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासनिक जांच और आधिकारिक दस्तावेज ही इस विवाद की असली तस्वीर साफ कर पाएंगे। लेकिन एक बात तय है कि देश के लिए जान देने वाले युवा अधिकारी की शहादत के बाद पैदा हुआ यह विवाद कई संवेदनशील सवाल छोड़ गया है।

FAQs

Q1: शहीद शुभम कुमार और श्रेया राय की शादी कब और कहां हुई थी?

शहीद शुभम के पिता के मुताबिक, दोनों की औपचारिक शादी दिसंबर 2025 में होनी थी जो दादी की मौत के कारण टल गई थी। बाद में श्रेया के परिवार ने शुभम से अहमदाबाद में गुपचुप तरीके से कोर्ट मैरिज कर ली थी, जिसकी जानकारी शुभम के माता-पिता को नहीं थी।

Q2: शहीद शुभम की पत्नी श्रेया राय क्या करती हैं?

श्रेया राय (श्रद्धा) उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ की रहने वाली हैं और वे खुद भी भारतीय सेना (Indian Army) में लेफ्टिनेंट के पद पर तैनात हैं।

Q3: सेना के NoK नियम के तहत मुआवजे पर पहला हक किसका होता है?

सेना के 'नेक्स्ट ऑफ किन' (NoK) नियम के मुताबिक, किसी भी सैन्य कर्मी की शादी होते ही उसके रिकॉर्ड में माता-पिता की जगह पत्नी का नाम मुख्य कानूनी वारिस के रूप में दर्ज हो जाता है। यही वजह है कि सरकार और विभाग की तरफ से मिलने वाली राहत राशि या पेंशन पर पहला कानूनी अधिकार पत्नी का ही होता है।

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