कौन है ललन चौधरी, जिन्होंने लालू यादव को दान की करोड़ों की संपत्ति?

जमीन घोटाले में फंसे लालू यादव और उनके मंत्री बेटे की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी इस मामले में रोज नए खुलासे कर रहे हैं।

पटना। जमीन घोटाले में फंसे लालू यादव और उनके मंत्री बेटे की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं हैं। बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी इस मामले में रोज नए खुलासे कर रहे हैं। इस बार सुशील मोदी ने घोटाले में एकनया खुलासा करते हुए ललन चौधरी का नाम लिया है जिन्होंने लालू-राबड़ी को करोड़ों रुपए का जमीन हंसते-हंसते दान कर दिया।

कौन है ललन चौधरी?

कौन है ललन चौधरी?

सुशील मोदी ने लालू परिवार पर आरोप लगाते हुए कहा कि आखिर लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी और परिवार के अन्य सदस्यों को करोड़ों रुपए की जमीन दान करने वाले ललन चौधरी कौन हैं? और वह जनता के सामने क्यों नहीं आ रहे हैं? बिहार की जनता ललन चौधरी को बेसब्री से देखना चाहती है क्योंकि लोगों को उनकी वास्तविकता को लेरक संशय है। सुशील मोदी ने आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बेनामी संपत्ति मामले में हस्तक्षेप कर जल्द से जल्द ललन चौधरी को सामने लाना चाहिए।

ललन चौधरी की हत्या की आंशका?

ललन चौधरी की हत्या की आंशका?

सुशील कुमार मोदी ने बताया कि ललन सिवान जिले के सियारीगढ गांव के रहने वाले सुकठ चौधरी का पुत्र है। इस गांव में पहने वाले अधिकतर लोग लालू प्रसाद यादव के यहां काम करते है। कोई लालू प्रसाद यादव का गाय सेवक तो कोई और काम करता है। इनमें से कई लालू यादव के खास है। ऐसे में कई तरह के सवाल खड़े हो जाते हैं आखिर ललन चौधरी के दानवीर होने के पीछे की बात क्या है? हालांकि गांव वालों का कहना है कि ललन चौधरी नाम का व्यक्ति काफी दिनों से गांव में नहीं है। कई गांव वाले उसकी हत्या हो जाने की आशंका भी जता रहे हैं।

इसीलिए लालू ने किया नोटबंदी का विरोध

इसीलिए लालू ने किया नोटबंदी का विरोध

सुशील मोदी ने बताया कि लालू यादव ने ललन चौधरी के मुखौटे के रुप में प्रयोग किया है। आखिर जिस व्यक्ति ने राबड़ी देवी को मकान सहित करोड रुपये ढाई डिसमिल जमीन गिफ्ट किया उसे 48 घंटे बीत जाने के बाद अब तक लोगों के सामने क्यों नहीं लाया गाया। सुशील मौदी ने कहा कि लालू अपनी एक हजार करोड़ की बेनामी संपत्ति और काला धन बचाने के लिए ही नोटबंदी का विरोध कर रहे थे।

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