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2019 में यदुवंशियों के दूध से बनी खीर खाना चाहते हैं उपेंद्र कुशवाहा

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    पटना। बिहार की राष्‍ट्रीय लोक समता पार्टी के शीर्ष नेता और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने नए राजनीतिक समीकरणों की ओर इशारा कर अमित शाह की मुश्किल बढ़ा दी है। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी इस समय एनडीए में शामिल है, लेकिन पिछले काफी समय से वह लगातार राष्‍ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के संपर्क में हैं। उन्‍होंने एक कार्यक्रम में खीर के बहाने बिहार में 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर बन रहे नए समीकरणों की ओर स्‍पष्‍ट संकेत दिया।

    Upendra Kushwaha moves closer to RJD with kheer theory

    उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि यदुवंशियों का दूध और कुशवंशियों का चावल मिल जाए तो खीर बनने में कहां देर लगती है। उन्‍होंने कहा कि हम लोग साधारण परिवार से आते हैं और साधारण परिवार में जिस दिन घर में खीर बन गई, दुनिया का सबसे स्‍वादिष्‍ट भोजन बन गया। आज भी यही मान्‍यता है कि खीर मतलब सबसे अच्‍छा भोजन, सबसे स्‍वादिष्‍ट व्‍यंजन...तो अब उस स्‍वादिष्‍ट व्‍यंजन को बनने से कोई रोक नहीं सकता है।

    उपेंद्र कुशवाहा ने आगे कहा, 'लेकिन सिर्फ दूध और चावल से काम नहीं चलने वाला है, इसमें पंच मेवा की भी जरूरत पड़ती है। उस पंच मेवा के रूप में उपेंद्र कुशवाहा ने अति पिछड़ों की बात की। उन्‍होंने कहा कि अति पिछड़ा समाज के लोगों का पंच मेवा भी आवश्‍यक है।'

    उपेंद्र कुशवाहा के इस बयान से स्‍पष्‍ट हो जाता है कि वह नए गठबंधन के लिए समीकरण बना रहे हैं। यदुवंशियों का दूध मतलब आरजेडी से है, जो कि यादवों की पार्टी है। कुशवंशियों से मतलब कोरी समाज से है, क्‍योंकि उपेंद्र कुशवाहा इसी समुदाय से आते हैं। पंच मेवा मतलब अति पिछड़ों को भी साथ लेने की बात उपेंद्र कुशवाहा कर रहे हैं। कुल मिलाकर उपेंद्र कुशवाहा ने 2019 लोकसभा चुनाव के लिए खीर बनाने का पूरा इंतजाम कर लिया है।
    अब देखना होगा कि उपेंद्र कुशवाहा की खीर आखिर पकती कब तक है और क्‍या इतनी स्‍वादिष्‍ट खीर उन्‍हें खाने को मिलेगी भी जैसी की वह उम्‍मीद कर रहे हैं।

    दरअसल, राष्‍ट्रीय लोक समता पार्टी 2014 लोकसभा चुनाव में एनडीए के साथ मिलकर चुनाव लड़ी थी। उसे तीन सीटें मिली थीं और तीनों पर उसने जीत दर्ज की थी। अब उपेंद्र कुशवाहा और उनकी पार्टी के नेता ज्‍यादा सीट मांग रहे हैं। इतना ही नहीं, राष्‍ट्रीय लोक समता पार्टी के नेता दावा कर रहे हैं एनडीए का चेहरा नीतीश कुमार को न बनाया जाए बल्कि उपेंद्र कुशवाहा को ये स्‍थान दिया जाए।

    उपेंद्र कुशवाहा जेडीयू और नीतीश कुमार दोनों आलोचक रहे हैं। ऐसे में 2019 लोकसभा चुनाव के लिए सीटों का बंटवारा बीजेपी अध्‍यक्ष अमित शाह के लिए टेढ़ी खीर बन गया है। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी का दावा है कि बीते चार सालों में उनका जनाधार काफी बढ़ा है। ऐसे में उनकी पार्टी को ज्‍यादा सीटें दी जानी चाहिए। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष नागमणि तो यहां तक कह चुके हैं कि 2020 के विधानसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा को मुख्यमंत्री पद के लिए प्रोजेक्ट किया जाए।

    उपेंद्र कुशवाहा का जन्म वैशाली जिले के किसान परिवार में हुआ। उन्‍होंने मुजफ्फरपुर की बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में एमए किया। कुशवाहा राजनीति में आने से पहले लेक्चरर भी रहे और पॉलिटिकल साइंस पढ़ाया करते थे। उपेंद्र कुशवाहा ने 1985 में राजनीति में कदम रखा। कुशवाहा की नीतीश कुमार के साथ अदावत की कहानी पुरानी है। वह जेडीयू के सदस्‍य के तौर पर 2010 में राज्‍यसभा गए थे। इसी दौरान नीतीश कुमार से उनका विवाद हुआ और उपेंद्र कुशवाहा ने इस्‍तीफा दे दिया था।

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    English summary
    Upendra Kushwaha moves closer to RJD with kheer theory

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