तेजप्रताप ने तेजस्वी को किया अनफॉलो, लालू परिवार में फिर संग्राम! अब सिर्फ इन नामों तक सिमटी ‘फॉलो लिस्ट’
Bihar Election 2025 (Tej pratap Yadav): बिहार की सियासत में एक बार फिर लालू परिवार सुर्खियों में है। कभी साथ-साथ मंच पर दिखने वाले लालू प्रसाद यादव के दोनों बेटे, तेजप्रताप यादव और तेजस्वी यादव, अब एक-दूसरे से दूरी बनाते जा रहे हैं। ताजा मामला सोशल मीडिया से जुड़ा है, जहां तेजप्रताप ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपने छोटे भाई तेजस्वी को अनफॉलो कर दिया है। इस कदम ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि इसने यादव परिवार के भीतर की दरार को एक बार फिर सबके सामने ला दिया है।
🔸अब सिर्फ तीन लोगों को फॉलो कर रहे हैं तेजप्रताप
तेजप्रताप यादव ने तेजस्वी से पहले अपनी बड़ी बहन मीसा भारती और हेमा यादव को भी अनफॉलो कर दिया था। अब वो एक्स पर सिर्फ अपने पिता लालू प्रसाद यादव, मां राबड़ी देवी, और बहन राज लक्ष्मी यादव को ही फॉलो कर रहे हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि परिवार के भीतर मतभेद न केवल सियासी हैं, बल्कि भावनात्मक दूरी भी बढ़ चुकी है।

🔸 RJD से दूरी और 'जनशक्ति जनता दल' का दांव
राजद से निष्कासन के बाद तेजप्रताप अब अपनी नई पार्टी जनशक्ति जनता दल के अध्यक्ष हैं। वो लगातार बिहार के अलग-अलग जिलों में जनसभाएं कर रहे हैं और तेजस्वी पर अप्रत्यक्ष निशाना साध रहे हैं। हाल ही में तेजस्वी यादव ने बयान दिया था कि अगर महागठबंधन की सरकार बनती है, तो हर परिवार में एक सरकारी नौकरी दी जाएगी। तेजप्रताप ने इस पर चुटकी लेते हुए कहा था, "पहले सरकार तो बनवा लीजिए, फिर नौकरी की बात कीजिए।"

🔸 महुआ से लड़ेंगे चुनाव, कल लिस्ट होगी जारी
तेजप्रताप यादव ने साफ कहा है कि वो महुआ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे। यह वही सीट है, जहां से इस वक्त राजद के मुकेश रौशन विधायक हैं, जो तेजस्वी के करीबी माने जाते हैं। तेजप्रताप ने ऐलान किया है कि 13 अक्टूबर को वो अपनी पार्टी के उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी करेंगे। यानी पारिवारिक रार अब सीधे चुनावी जंग में बदलने वाली है।
🔸 अखिलेश यादव से भी ठनी बात
तेजप्रताप और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव के बीच भी रिश्ता अब खटास भरा दिख रहा है। हाल में वायरल एक ऑडियो क्लिप में तेजप्रताप कहते सुने गए, "मैंने कॉल किया, मैसेज भेजा, यहां तक कि होटल में आदमी भी भेजा, लेकिन अब वो मेरा फोन नहीं उठाते। मैंने फिर ब्लॉक कर दिया।" इस बयान से साफ है कि तेजप्रताप अब अकेले मोर्चे पर उतरने का मन बना चुके हैं।

🔸 यादव परिवार की राजनीति में 'घर की लड़ाई'
लालू परिवार की इस कलह का असर सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगा। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इससे RJD के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है। तेजप्रताप भले ही अपने छोटे भाई जितना मजबूत जनाधार न रखते हों, लेकिन लालू की विरासत के नाम पर वो पार्टी के कोर यादव वोट में सेंध लगा सकते हैं। 2020 विधानसभा चुनाव में RJD महज 0.23% वोट से NDA से पीछे रह गई थी। ऐसे में थोड़ी भी वोटों की कटौती तेजस्वी के लिए महंगी साबित हो सकती है।
🔸 जहानाबाद से सीख, अब महुआ में दोहराएंगे इतिहास?
तेजप्रताप पहले भी पार्टी के फैसलों से असहमति दिखा चुके हैं। 2019 लोकसभा चुनाव में उन्होंने जहानाबाद और शिवहर सीट से अपने करीबियों को टिकट दिलाने की कोशिश की थी। टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार उतारे, जिससे RJD को नुकसान हुआ।
जहानाबाद में RJD के प्रत्याशी 1751 वोटों से हार गए, और कहा गया कि अगर तेजप्रताप ने वहां बगावत न की होती तो RJD की जीत तय थी।
🔸 परिवार की छवि पर असर, विरोधी दलों को मिला मुद्दा
'घर की लड़ाई' अब राजनीतिक हथियार बन चुकी है। BJP जैसे विरोधी दल तेजप्रताप की नाराजगी को तेजस्वी की नाकामी के तौर पर पेश करते हैं, "जो परिवार नहीं संभाल सका, वो राज्य क्या संभालेगा?" राजनीति में यह परसेप्शन बेहद अहम होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, तेजप्रताप का सोशल मीडिया व्यवहार और बार-बार के विवाद तेजस्वी की एकजुट नेतृत्व वाली छवि को कमजोर करता है।
🔸 लालू की विरासत और बेटों की लड़ाई
लालू यादव ने बिहार में "MY समीकरण" (मुस्लिम-यादव गठजोड़) के दम पर दशकों तक राजनीति की दिशा तय की। राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया, तेजस्वी को डिप्टी सीएम तक पहुंचाया। लेकिन अब उम्र के इस पड़ाव पर लालू के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। अपने परिवार और पार्टी को एकजुट रखना। तेजप्रताप और तेजस्वी की ये तकरार न सिर्फ सियासत, बल्कि परिवार की साख के लिए भी एक बड़ी परीक्षा बन गई है।












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