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Success Story: साधारण किसान का बेटा बना अधिकारी, आदर्श को इस तरह मिली कामयाबी

Success Story: सुनील पांडेय (आदर्श के पिता) ने कहा कि आदर्श की कामयाबी से ना सिर्फ परिवार में खुशी है बल्कि पूरे ज़िले के लिए यह गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि काफी संघर्ष करके आदर्श को पढ़ाया। आज उसकी कामयाबी देख...

Success Story: इंसान मेहनत करे तो कामयाबी ज़रूर मिलती है। आपके अंदर कुछ करने का जज़्बा है तो आपकी कामयाबी के आड़े आई सारी परेशानी चुटकी में हल होती चली जाएगी। आज हम आपको एक ऐसे युवक के संघर्ष की कहानी से रूबरू करवाने जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत से परिवार का ही नहीं ज़िले सहित पूरे प्रदेश को गौरवांवित किया है। एक साधारण किसान परिवार के बेटे आदर्श ने एसएससी सीजीएल में पूरे देश में 11वां रैंक हासिल किया है। भारतीय विदेश सेवा में एक्सटर्नल सेक्शन ऑफिसर के तौर पर आदर्श का चयन (सेलेक्शन) हुआ है।

साधारण किसान परिवार से है आदर्श का नाता

साधारण किसान परिवार से है आदर्श का नाता

आदर्श की कामयाबी के बारे में तो आपको जानकारी मिल गई, आइए अब बताते हैं कि वह कहां से ताल्लुक रखते हैं, उनके परिवार में कौन-कौन हैं और उनकी शिक्षा कहां से हुई है ? बिहार के बेतिया से आदर्श ताल्लुक रखते हैं, वह नोनीपाकड गांव ( बहुवरवा पंचायत, लौरिया प्रखंड ) के रहने वाले हैं। आदर्श का नाता साधारण किसान परिवार से है। उनके दादा स्वामी नाथ पांडे पेशे से शिक्षक हैं, जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वहीं आदर्श के पिता सुनील पांडेय पेशे से किसान हैं, खेती में ही वह मशरूफ रहते हैं।

गांव में हुई आदर्श की प्रारंभिक शिक्षा

गांव में हुई आदर्श की प्रारंभिक शिक्षा

आदर्श पांडेय की मां आशा पांडेय घरेलू महिला हैं। इसके अलावा परिवार में दो भाई और एक बहन है। आदर्श की शुरुआती पढ़ाई तो गांव में हुई लेकिन उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए वह दिल्ली गए। आदर्श के माता-पिता ने काफी मशक्कत कर उन्हें संत जेवियर दिल्ली में पढ़ाया और इसके साथ ही उन्होंने दिल्ली विश्व विद्यालय स्नातक उन्होंने किया। आज आदर्श की कामयाबी पर सभी लोग खुश हैं। वहीं आदर्श के दादा ने खुशी का इज़हार करते हुए कहा कि बबुआ के अधिकारी बनने से हम लोग काफी गौरवांवित महसूस कर रहे हैं।

मां-बाप और गुरुओं को दिया कामयाबी का श्रेय

मां-बाप और गुरुओं को दिया कामयाबी का श्रेय

आदर्श पांडेय ने अपनी कामयाबी का श्रेय अपने मां-बाप और गुरुजनों को दिया। कामयाबी का मंत्र देते हुए कहा कि मेहनत का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। ज़िंदगी में कामयाबी के रास्ते में मुश्किलें ज़रूर आती हैं, लेकिन वह इंसान ही कामयाब होता है जो लक्ष्य हासिल करने के लिए मेहन और लगन से क़दम आगे बढ़ाता है। वहीं आदर्श के अधिकारी बनने पर गांव वालो में भी खुशी की लहर है।

'आदर्श ने सभी लोगों को गौरवांवित किया है'

'आदर्श ने सभी लोगों को गौरवांवित किया है'

सुनील पांडेय (आदर्श के पिता) ने कहा कि आदर्श की कामयाबी से ना सिर्फ परिवार में खुशी है बल्कि पूरे ज़िले के लिए यह गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि काफी संघर्ष करके आदर्श को पढ़ाया। आज उसकी कामयाबी देख कर खुशी महसूस हो रही है। एक्सटर्नल सेक्शन ऑफिसर (भारतीय विदेश सेवा) में आदर्श के चयन पर ग्रामीणों खुशी ज़ाहिर की। इसके साथ उन्होंने कहा कि आदर्श की कामयाबी से दूसरे युवाओं को प्रेरणा मिलेगी। इंसान के सामने बाधाएं ज़रूर आती है लेकिन जो मेहनत करता है उसे कामयाबी ज़रूर मिलती है। इस वाक्य को आदर्श ने सच कर दिखाया है। वहीं ग्रामीणों ने आदर्श के भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

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