Samrat Choudhary कितने पढ़े-लिखे? हलफनामे में खुद किया बड़ा खुलासा, प्रशांत किशोर क्यों भड़के?
Samrat Choudhary Education: बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार (16 अक्टूबर) को तारापुर विधानसभा सीट से नामांकन दाखिल कर दिया, जिसके साथ ही उन्होंने अपने करोड़ों की संपत्ति और शैक्षणिक योग्यता का खुलासा किया। हलफनामे में सम्राट चौधरी ने अपनी उच्चतम शिक्षा Doctor of Litt (मानद), PFC कामराज विश्वविद्यालय से प्राप्त बताई है।
हालांकि, चुनावी साल में उनकी डिग्री को लेकर विवाद गहरा गया है। जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने उन पर शैक्षणिक योग्यता और आपराधिक मामलों में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया है।

सम्राट चौधरी की 'मानद' डिग्री का सच
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने तारापुर सीट से नामांकन के दौरान जो हलफनामा दाखिल किया है, उसमें उन्होंने अपनी संपत्ति के साथ-साथ अपनी शैक्षणिक योग्यता का भी स्पष्ट उल्लेख किया है। हलफनामे के अनुसार, उनके पास करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्ति, सोना, वाहन और बैंक बैलेंस हैं। इसके अलावा, उन्होंने सुरक्षा के लिए एक एनपीबोर (NP Bore) राइफल होने की भी जानकारी दी है।
हलफनामे में चौधरी ने अपनी उच्चतम शैक्षणिक योग्यता Doctor of Litt (मानद) बताई है, जिसे उन्होंने पीएफआई (PFC) कामराज विश्वविद्यालय से प्राप्त किया है। हालांकि, यह मानद डिग्री अब चुनावी अखाड़े में बड़े विवाद का केंद्र बन गई है।
प्रशांत किशोर का डिग्री पर सीधा हमला
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने सम्राट चौधरी के शैक्षणिक रिकॉर्ड को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रशांत किशोर का दावा है कि हलफनामे में यह कहीं भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि सम्राट चौधरी ने 10वीं (मैट्रिक) कब पास की।
पीके ने सवाल उठाया कि सम्राट चौधरी ने कामराज यूनिवर्सिटी से जिस PFC कोर्स का दावा किया है, वह कोर्स मुख्य रूप से तमिल भाषी लोगों के लिए होता है। प्रशांत किशोर का सीधा आरोप है कि अगर सम्राट चौधरी को तमिल बोलनी नहीं आती है, तो इसका स्पष्ट मतलब है कि उनकी डिग्री फर्जी है और कहीं से खरीदी गई है।
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नरसंहार केस और फर्जी एफिडेविट का आरोप
शैक्षणिक योग्यता के अलावा, प्रशांत किशोर ने सम्राट चौधरी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड पर भी सवाल खड़े किए हैं। पीके ने 1995 के नरसंहार केस का अपडेट मांगा है। उनका आरोप है कि सम्राट चौधरी ने इस मामले में फर्जी एफिडेविट दिखाकर खुद को नाबालिग बताया था ताकि वह कानूनी कार्रवाई से बच सकें। प्रशांत किशोर ने चुनौती दी है कि सम्राट चौधरी इस नरसंहार केस की मौजूदा स्थिति (बेल मिली या केस बंद हुआ) को स्पष्ट करें।
पीके की कानूनी चुनौती
प्रशांत किशोर ने स्पष्ट कर दिया है कि वह सम्राट चौधरी के इस चुनावी हलफनामे को कानूनी रूप से कोर्ट में चैलेंज करेंगे। पीके का कहना है कि जब सम्राट चौधरी अब तारापुर से चुनाव लड़ रहे हैं, तो उन्हें अपनी शैक्षणिक योग्यता और आपराधिक इतिहास दोनों के बारे में जनता के सामने सच्चाई बतानी होगी। यह विवाद अब कानूनी जांच के दायरे में आने की संभावना है, जो तारापुर चुनाव से पहले NDA के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
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