कांग्रेस में जन अधिकार पार्टी का विलय, जानिए किन लोकसभा सीटों पर पप्पू यादव का है असर?

बिहार में लोकसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। एनडीए के अलावा महागठबंधन में भी शीट शेयरिंग पर बातचीत लगभग अंतिम चरण में है। ऐसे में छोटे-छोटे दल भी अपना ठिकाना तलाशने लगे हैं। इसी बीच पप्पू यादव की जन अधिकार पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया है।

इससे पहले मंगलवार देर शाम जन अधिकार पार्टी के सुप्रीमो पप्पू यादव ने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव से मुलाकात की है। इससे ये चर्चा तेज हो गई है कि पप्पू यादव महागठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं।

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इससे पहले पप्पू यादव को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि वे अपनी पार्टी का विलय कांग्रेस में कर सकते हैं। कुछ दिन पहले पूर्णिया की रैली में पप्पू यादव ने कहा था कि यदि कांग्रेस उन्हें पूर्णिया से टिकट देती है तो वे अपनी जन अधिकार पार्टी का विलय कांग्रेस में कर सकते हैं।

मंगलवार देर रात लालू यादव और तेजस्वी से पप्पू यादव की मुलाकात के बाद ये भी कयास लगाया जाने लगा था कि वे आरजेडी में शामिल हो सकते हैं। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये ऐलान किया गया कि जाप का कांग्रेस में विलय हो रहा है। कांग्रेस ने इसे ऐतिहासिक विलय बताया है।

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बिहार के कांग्रेस प्रभारी मोहन प्रकाश ने पप्पू यादव की पार्टी का कांग्रेस में विलय कराया। पप्पू यादव के साथ उनके बेटे सार्थक यादव भी साथ थे। कांग्रेस में विलय के बाद पप्पू यादव ने कहा, कि सेवा न्याय और संघर्ष के लिए हमारी पार्टी जानी जाती है। मेरी विचारधारा कांग्रेस की विचारधारा के साथ रही। यह मजबूत ऊर्जा देती रही। हमारी राजनीति सेक्युलर है। हर परिस्थिति में दूसरे के विचारों का सम्मान का हमारा इतिहास रहा है।

आपको बता दें कि पप्पू यादव पीछे कई महीनों से पूर्णिया में मेहनत कर रहे हैं। वे इस बार पूर्णिया से चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं। पिछली बार पूर्णिया की सीट कांग्रेस के पास थी। पप्पू यादव के कांग्रेस का हिस्सा बनने के बाद ऐसा माना जा रहा है कि एक बार फिर से पूर्णिया सीट कांग्रेस को मिल सकती है।

सीमांचल में पप्पू का प्रभाव

दरअसल कांग्रेस और आरजेडी दोनों ही चाहते हैं कि उनकी पार्टी जाप का विलय उनके साथ हो जाए। दरअसल पप्पू यादव को हाल के चुनावों में भले ही सफलता हाथ नहीं लगी हो मगर ऐसा माना जाता है कि सीमांचल में उनका खूब प्रभाव है। पूर्णिया, मधेपुरा, सुपौल, अररिया, कटिहार आदि सीटों पर उनका काफी अधिक प्रभाव है। यही वजह है कि दोनों ही पार्टियां उन्हें अपने में शामिल करने में दिलचस्पी दिखा रही हैं।

पूर्णिया से लड़ेंगे पप्पू

पप्पू यादव ने लालू और तेजस्वी यादव से मुलाकात के बाद एक निजी चैनल से बातचीत में कहा था कि, पूर्णिया उनका गढ़ है और वो वहां से कई बार चुनाव जीत चुके हैं। वो इस बार पूर्णिया से चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने बीती रात मैंने लालू जी और भाई तेजस्वी से मुलाकात की और हमने रणनीति बनाई कि कैसे बीजेपी को भगाना है।

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