फिर टूटेगी NCP? विनोद तावड़े के साथ शरद गुट के जयंत पाटिल ने की गुपचुप मीटिंग, सुप्रिया सुले क्‍या बोलीं?

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) में हुई सेंधमारी के बाद अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। एनसीपी (SP) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और भाजपा नेता विनोद तावड़े के बीच मुंबई में हुई मुलाकात ने राज्य के सियासी पारे को अचानक बढ़ा दिया है।

इस मुलाकात के बाद महायुति और शरद पवार गुट के बीच नए समीकरण को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। एक ओर जल्‍द ही शरद गुट में बड़ी टूट हाेने की अटकलें लगाई जा रहा रही है वहीं दूसरी ओर दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) महायुति का हिस्सा बन सकती है।

NCP split again

सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय नेतृत्व के बेहद करीबी माने जाने वाले तावड़े और पाटिल के बीच हुई बैठक में इस बात पर विचार-विमर्श हुआ कि यदि शरद पवार गुट एनडीए का हिस्सा बनता है, तो तो सत्ता और संगठन में उसकी क्या भूमिका हो सकती है। इसके क्या फायदे और राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। हालांकि जयंत की तावड़े की मुलाकात और एनसीपी (SP) के महायुति में शामिल होने की अटकलों पर शरद पवार की पार्टी अध्‍यक्ष सुप्रिया सुले की प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की है।

विनोद तावड़े से सीक्रेट मुलाकात के बाद जयंत पाटिल ने क्या कहा?

इस मुलाकात की खबरों के मीडिया में आने के बाद जयंत पाटिल ने विनोद तावड़े के साथ बैठक होने की बात को पूरी तरह स्वीकार किया। हालांकि, उन्होंने इसे केवल एक अनौपचारिक चर्चा करार दिया। पाटिल ने कयासों को खारिज करते हुए कहा कि इस बैठक का कोई विशेष राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए और यह केवल एक सामान्य मुलाकात थी।

सुप्रिया सुले ने क्‍या कहा?

इस पूरे घटनाक्रम पर एनसीपी (सपा) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें जयंत पाटिल और विनोद तावड़े के बीच हुई किसी भी तरह की बैठक की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। सुप्रिया सुले ने इस मुलाकात को अधिक तूल न देने की वकालत करते हुए इसे सामान्य बताया।

'मेरी और तावड़े की लगभग 21 बार मुलाकातें हुई'

सुप्रिया सुले ने बताया कि वह खुद भी हाल के दिनों में विनोद तावड़े और अन्य भाजपा नेताओं से कई बार मिल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि वह और विनोद तावड़े एक ही समिति का हिस्सा हैं, जिसके कारण पिछले एक महीने में उनकी और तावड़े की लगभग 21 बार मुलाकातें हुई हैं। इन बैठकों में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी मौजूद रहे हैं। सुले ने आगे स्पष्ट किया कि नेताओं का आपस में मिलना एक सामान्य लोकतांत्रिक प्रक्रिया है। संसद और विभिन्न समितियों के कामकाज के सिलसिले में अलग-अलग दलों के नेताओं को एक साथ बैठना ही पड़ता है।

"भगवान ही जाने, सरकार आगे क्या करेगी"

एनसीपी एसपी के महायुति गुट में शामिल होकर सत्ता में आने की अटकलों पर सुप्रिया सुले ने कहा कि उनकी प्राथमिकता हमेशा जनता की सेवा रही है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा पिछले 12 वर्षों से उनके बारे में तरह-तरह की चर्चाएं होती रही हैं। सुले ने यह भी कहा कि यदि मौजूदा सरकार का यही रवैया जारी रहा, तो एनसीपी और उसके सहयोगियों को सत्ता के लिए मजबूती से संघर्ष करना पड़ेगा। साथ ही उन्होंने टिप्पणी की, "भगवान ही जाने, सरकार आगे क्या करेगी।"

रोहित पवार ने दावों को किया खारिज

दूसरी ओर, कर्जत-जामखेड़ से विधायक रोहित पवार ने इन सभी खबरों को सिरे से खारिज करते हुए इसे केवल अफवाह बताया है। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि पार्टी के भीतर महायुति में शामिल होने या भाजपा के साथ जाने को लेकर कोई चर्चा नहीं चल रही है। रोहित पवार ने कहा कि इस तरह के दावों में कोई सच्चाई नहीं है।

रोहित पवार ने कहा कि उनकी पार्टी पिछले 60 वर्षों से भाजपा की वैचारिक नीतियों के खिलाफ लगातार संघर्ष कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब उन्होंने किसानों के अधिकारों के लिए बड़ा आंदोलन किया था, तब सरकार ने उनसे सीधे बात नहीं की।

कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता ने किया बड़ा दावा

जहां एक तरफ शरद पवार की पार्टी इन अटकलों को केवल अफवाह बता रही है, वहीं महाविकास अघाड़ी (एमवीए) में उनकी सहयोगी कांग्रेस पार्टी का नजरिया थोड़ा अलग है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्य विधानसभा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार ने दावा किया कि दोनों पक्षों के बीच वास्तव में बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि अब राकांपा (एसपी) को तय करना होगा कि वे किस राजनीतिक दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।

उद्धव ठाकरे के छह सांसद शिंदे की शिवसेना में हो चुके हैं शामिल

गौरतलब है कि पिछले दिनों शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसद अपनी पार्टी छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। इस घटनाक्रम को राज्य की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' का नाम दिया जा रहा है। ये ही वजह है कि शिवसेना में हुई इस टूट के तुरंत बाद शरद पवार के गुट में ऐसी बैठकों की खबर से हलचल काफी बढ़ गई है।

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