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आरा लोकसभा सीट का इतिहास और समीकरण,1984 के बाद INC की नहीं हुई वापसी, 2 बार खिला 'BJP का कमल'

Aara Lok Sabha Seat History: लोकसभा चुनाव को लेकर बिहार में भी सियासी पारा चढ़ चुका है। सियासी गलियारों में चुनावी चर्चा शुरू हो चुकी है। इसी क्रम में आज हम आपको आरा लोकसभा सीट का इतिहास और सियासी समीकरण बताने जा रहे हैं। 1952 में पहली बार में यहां आम चुनाव हुए थे।

1952 से 1971 तक पांच लाकसभा चुनावों में आरा लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार बाली राम भगत लगातार सांसद रहे। 1977 में इस सीट से पहली बार कांग्रेस हारी। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या हुई, जिस वजह से सहानुभूति की लहर में कांग्रेस ने आख़िरी बार परचम बुलंद किया। बाली राम भगत ने कांग्रेस के खाते में सीट डाली।

History of Aara Lok Sabha seat

1989 लोकसभा चुनाव में बहुकोणीय मुकाब़ला हुआ जिसमें आईपीएफ (भाकपा माले) ने पहली बार जीत दर्ज की। रामेश्वर प्रसाद ने इंडियन पीपुल्स फ्रंट का परचम लहराया। इसके बाद से 2009 तक विभिन्न दलों ने बारी-बारी से अपनी पार्टी का झंडा बुलंद किया। आजादी के बाद पहली बार लोकसभा चुनाव में 'भाजपा का कमल' खिला। आर के सिंह ने भारतीय जनता पार्टी का झंडा बुलंद किया।

1952 से 1971 तक कांग्रेस के बलिराम भगत, 1977 और 1980 में भारतीय लोक दल और जनता पार्टी सोशलिस्ट से चंद्रदेव वर्मा ने दो बार जीत का परचम लहराया। इसके बाद यहां से लगातार दो बार जीतने में 2009 लोकसभा चुनाव तक कोई सांसद कामयाब नहीं हुए। 2014 के लोकसभा चुनाव में यह मिथक टूटा और लगातार 2 बार भाजपा के आर के सिंह ने पार्टी का परचम लहराया।

1996 से 1999 तक 3 सालों में 3 चुनाव हुए, लेकिन नतीजे तीनों बार अलग रहे, अलग-अलग सांसदों ने जीत दर्ज और तीनों ही बार अलग-अलग पार्टी के सांसद बने। 1996 में जनता दल के उम्मीदवार चंद्रदेव प्रसाद वर्मा, 1998 में समता पार्टी के उम्मीदवार एच पी सिंह और 1999 में राष्ट्रीय जनता दल के राम प्रसाद सिंह ने अपनी पार्टी का परचम लहराया।

आरा लोकसभा सीट पर हमेशा से ही जातीय समीकरण हावी रही है, यही वजह है कि यह बदलते हुए सांसद नज़र आते रहे हैं। 2008 में हुए नये परिसीमन के बाद से आरा लोकसभा सीट के अनंतर्गत भोजपुर जिले के सभी सात विधानसभा सीट आ गई।

सात विधानसभा सीटों में अगिआंव विधनासभा सीट (सुरक्षित क्षेत्र) पर एनडीए का क़ब्ज़ा है। बाकि बचे सभी विधानसभा सीटों पर महागठबंधन का परचम बुलंद है। तरारी विधानसभा पर माले, आरा, बड़हरा, संदेश, जगदीशपुर और शाहपुर विधानसभा सीट पर राष्ट्रीय जनता दल का क़ब्ज़ा है। ग़ौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जदयू से अलग होकर चुनावी ताल ठोकी थी, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। होकर लड़ी थी और उसे किसी क्षेत्र में सफलता नहीं मिली थी।

आरा लोकसभा सीट से अभी तक जीते हुए सांसदों की सूची

साल नाम पार्टी
1952 बाली राम भगत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस(पटना शाहाबाद सीट)
1957 बाली राम भगत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (शाहाबाद सीट के तौर पर)
1962 बाली राम भगत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1967 बाली राम भगत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1971 बाली राम भगत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1977 चंद्रदेव प्रसाद वर्मा भारतीय लोकदल
1980 चंद्रदेव प्रसाद वर्मा जनता पार्टी (सेकुलर)
1984 बाली राम भगत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
1989 रामेश्वर प्रसाद इंडियन पीपुल्स फ्रंट
1991 राम लखन सिंह यादव जनता दल
1996 चंद्रदेव प्रसाद वर्मा जनता दल
1998 एच पी सिंह समता पार्टी
1999 राम प्रसाद सिंह राष्ट्रीय जनता दल
2004 कांति सिंह राष्ट्रीय जनता दल
2009 मीना सिंह जनता दल (यूनाइटेड)
2014 आर के सिंह भारतीय जनता पार्टी
2019 आर के सिंह भारतीय जनता पार्टी

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