Bihar News: मृत्यु के पहले ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार, बिहार की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था की फिर खुली पोल!

Bihar News: बिहार में एक बार फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही सुर्खियों में है। बिक्रमगंज थाना क्षेत्र के धनगाई गांव में घटित एक मामले ने पूरे सिस्टम की कलई खोल दी है, जहां एक व्यक्ति की मृत्यु के पहले ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर दी गई।

मृतक सत्यनारायण गुप्ता की 16 मई को एक सड़क दुर्घटना में मौत हुई थी। परिजनों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। लेकिन जब रिपोर्ट की कॉपी परिवार को सौंपी गई, तो उसमें दिनांक 15 मई दर्ज थी - यानी घटना से एक दिन पहले ही पोस्टमार्टम "कागजों में" हो चुका था।

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इस गंभीर चूक ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट्स सिर्फ एक औपचारिकता बन चुकी हैं? क्या शव का परीक्षण वास्तव में हुआ भी था, या फॉर्मैलिटी पूरी करने के लिए रिपोर्ट 'अंदरखाने' में बना दी गई?

इस मामले में उठते सवाल:
रिपोर्ट की तारीख गलती है या जानबूझकर हेरफेर?

क्या शव का सही से परीक्षण हुआ?

लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन - पुलिस या मेडिकल टीम?

परिवार ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है, जहां लोग कह रहे हैं कि "बिहार में अब मरने से पहले ही मौत की रिपोर्ट बन जाती है!"

बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर पहले भी कई सवाल उठते रहे हैं। कभी दवा की कमी, कभी एक्स-रे मशीन खराब, तो कभी डॉक्टर नदारद। साल 2023 में CAG रिपोर्ट ने भी सरकारी अस्पतालों में भारी अनियमितताओं का खुलासा किया था। यह नया मामला उसी लचर व्यवस्था की एक और मिसाल है।

यह मामला बिहार के सरकारी तंत्र की एक भयावह तस्वीर पेश करता है। जब पोस्टमार्टम जैसी कानूनी प्रक्रिया में भी हेरफेर संभव हो, तो आम जनता को न्याय और स्वास्थ्य सुविधाओं की क्या उम्मीद रह जाती है?

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