Digital India की लीला: डॉग बाबू बने बिहार के नागरिक, लोगों ने कहा– अब ‘बिल्ली मौसी’ को भी मिलेगा राशन कार्ड!

Digital India: बिहार के मसौढ़ी से एक चौंकाने वाला और हास्यास्पद मामला सामने आया है, जिसने राज्य के डिजिटल सिस्टम और सरकारी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां RTPS (Right to Public Service) पोर्टल से "डॉग बाबू" नामक एक व्यक्ति को बाकायदा आवासीय प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया।

आवासीय प्रमाण पत्र में कुत्ते के पिता का नाम "कुत्ता बाबू" और मां का नाम "कुतिया देवी" दर्ज है। इतना ही नहीं, दस्तावेज में फोटो की जगह एक असली कुत्ते की तस्वीर भी है। ग़ौरतलब है कि उस पर राजस्व पदाधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर भी मौजूद हैं।

Digital India Kutte Ka Niwas Praman Patr

हैरत में लोग: यह प्रमाण पत्र नगर परिषद मसौढ़ी के काउलीचक, वार्ड नंबर 15 के नाम पर जारी किया गया है। इसे देखकर पहले तो लोग इसे फोटोशॉप समझ बैठे, लेकिन जब पुष्टि हुई कि यह दस्तावेज असली है और RTPS सिस्टम से ही जनरेट हुआ है, तो प्रशासन के साथ-साथ आम लोग भी सकते में आ गए। लोगों ने तंज़ भरे लहज़े में कहा कि अब तो 'बिल्ली मौसी' को भी राशन कार्ड मिलेगा।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस प्रमाण पत्र पर मसौढ़ी के राजस्व पदाधिकारी मुरारी चौहान के डिजिटल हस्ताक्षर भी मौजूद हैं। सिस्टम में डिजिटल साइन तभी संभव होता है जब अधिकृत अधिकारी का डोंगल सिस्टम से जुड़ा हो। ऐसे में सवाल उठता है-क्या किसी ने डोंगल का गलत इस्तेमाल किया या सिस्टम में ही बड़ी गड़बड़ी है?

RTPS सिस्टम से जानबूझकर छेड़छाड़?: जब इस दस्तावेज के यूनिक नंबर को पोर्टल पर ट्रैक किया गया, तो वह दिल्ली की एक महिला के नाम से लिंक मिला। यह और भी चौंकाने वाला था क्योंकि इसका मतलब साफ है कि RTPS सिस्टम से जानबूझकर छेड़छाड़ की गई है।

प्रशासन में हड़कंप: मामला सामने आते ही अंचलाधिकारी प्रभात रंजन ने इसे गंभीर कदाचार करार देते हुए जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और FIR भी दर्ज की जाएगी। RTPS ऑपरेटर से लेकर राजस्व कर्मचारी तक जो भी इस फर्जीवाड़े में शामिल पाया जाएगा, बख्शा नहीं जाएगा।

सोशल मीडिया पर फनी रिएक्शन: इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी हलचल मचा दी है। लोग चुटकी लेते हुए कह रहे हैं-"जब डॉग बाबू को आवासीय प्रमाण पत्र मिल सकता है, तो 'बिल्ली दीदी' को भी जल्द ही पेंशन और 'गाय माता' को ड्राइविंग लाइसेंस मिल जाएगा।"

कुछ ने RTPS को "Real Time Pet Service" बताकर तंज कसा, तो कई लोगों ने लिखा कि अब सिस्टम को नहीं, सिस्टम बनाने वालों को एंटीवायरस की जरूरत है। बिहार में सरकारी सेवाओं को डिजिटल बनाने की कोशिशें अगर ऐसे ही मज़ाक बनती रहीं, तो RTPS जैसे पोर्टल की विश्वसनीयता पर गहरा आघात होगा। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और सिस्टम की निगरानी में चूक का बड़ा उदाहरण बन गया है।

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