CM Samrat Choudhary: 'हम सफल नहीं हो पाए', बेटे सम्राट ने ली CM पद की शपथ तो भावुक हुए पिता, किसको कहा Thanks?
Bihar CM Samrat Choudhary: 'मैं सम्राट चौधरी ईश्वर की शपथ लेता हूं...' , पटना के लोकभवन में बुधवार सुबह 10 बजकर 55 मिनट पर जैसे ही सम्राट चौधरी ने ये लाइन पढ़ी वैसे ही पूरा भवन 'सम्राट जिंदाबाद' के नारों से गूंज पड़ा। 57 साल के सम्राट चौधरी के लिए जितना ये पल खास था उससे कहीं ज्यादा ये बीजेपी के लिए स्पेशल था क्योंकि 75 साल में पहली बार कोई भाजपा नेता बिहार का मुख्यमंत्री बना है।
सम्राट के सीएम बनते ही 'सुशासन बाबू' के नाम से मशहूर 'नीतीश युग' का बिहार में अंत हो गया और 15 अप्रैल 2026 से वहां पर एक नई राजनीति कि शुरुआत हुई है। सीएम के लिए तालियां बजाते वक्त कई लोग खुशी से चिल्ला रहे थे तो वहीं कई लोग ढोल-नगाड़े पर थिरक रहे थे।

लेकिन उस भीड़ में दूर बैठा एक इंसान ऐसा था जिसके होंठ तो खुशी से मुस्कुरा रहे थे लेकिन आंखों से अश्रुधारा बह रही थी, ये खुशी और गर्व के आंसू थे, आप समझ गए हों के कि हम यहां पर किसकी बात कर रहे हैं?
'हम सफल नहीं हो पाए', Samrat Choudhary बने सीएम
जी हां, यहां बात हो रही है सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी की, जिन्होंने अपने बेटे की ताजपोशी पर कहा कि ' कभी-कभी यह ईश्वर की कृपा से होता है। हमने पूरी लड़ाई लड़ी लेकिन सफल नहीं हो पाए। आज अमित शाह, नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार की कृपा से यह पद प्राप्त हुआ है। उन्होंने दोहराया कि अमित शाह ने जो कहा था, वो आज पूरा कर दिया।' दरअसल बिहार चुनाव के प्रचार के दौरान अमित शाह ने सम्राट चौधरी को बड़ा आदमी बनाने की बात कही थी।
कभी लालू यादल के काफी करीबी कहे जाते थे शकुनी चौधरी
गौरतलब है कि सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी बिहार का जाना-पहचाना राजनीतिक चेहरा हैं, 4 जनवरी 1936 को जन्मे शकुनी समता पार्टी के संस्थापक सदस्य में से एक रहे हैं, वो खगड़िया से लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं। कभी वो लालू के काफी करीबी कहे जाते थे और राजद के सदस्य भी थे लेकिन बाद में लालू से विवादों के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ दी, इसी वजह से सम्राट ने भी राजद छोड़ा था, गौर फरमाया जाए तो सम्राट ने राजनीति का 'ककहरा' लालू की पाठशाला से ही सीखा है।
राज्य के मजबूत ओबीसी चेहरे के रूप में उभरे Samrat Choudhary
राजद छोड़ने के बाद उन्होंने जनता दल यूनाइटेड का रुख किया और राज्य सरकार में मंत्री भी बने लेकिन साल 2018 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया, जिसके बाद उनकी राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई। वो राज्य का मजबूत ओबीसी चेहरा बने।
साल 2018 में उन्हें BJP की बिहार राज्य इकाई का उपाध्यक्ष बनाया गया। 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान वो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के लिए 'स्टार प्रचारक' बने। साल 2023 में बीजेपी ने सम्राट चौधरी को संजय जायसवाल की जगह बिहार राज्य के लिए BJP का पार्टी अध्यक्ष नियुक्त किया था।
75 साल में बिहार में पहला भाजपा का सीएम
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व ने यह कदम 'कोइरी' या 'कुशवाहा' जाति के मतदाताओं के बीच एक मज़बूत आधार बनाने के लिए उठाया था, इस जाति का बिहार के कई ज़िलों में दबदबा है और राज्य में यादवों के बाद इसे दूसरा सबसे बड़ा जाति समूह माना जाता है।
साल 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में सम्राट चौधरी ने BJP के चुनाव अभियान का नेतृत्व किया और तारापुर विधानसभा क्षेत्र से चुनावी ताल ठोंकी, बिहार विधानसभाचुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी जिसमें सम्राट चौधरी का बड़ा हाथ रहा और आज पूरे बिहार के 'सम्राट' बन गए।














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