Bihar Politics: CM नीतीश ही बनाएंगे नई सरकार, ‘सियासी घमासान’ में लालू का भी नहीं चला दांव
Political Crisis In Bihar: बिहार में सत्ता परिवर्तन की सुगबुगाहट तेज़ हो चुकी है। कभी भी यह ख़बर आ सकती है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। सूत्रों की मानें तो सीएम नीतीश कुमार ने रविवार की सुबह ही बिहार के राज्यपाल राजेन्द्र अर्लेकर से मिलने के लिए वक्त मांगा है।
बिहार के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ है कि सीएम नीतीश कुमार भारतीय जनता पार्टी के साथ हाथ मिलाते हुए एनडीए गठबंधन में शामिल हो सकते है। आज इस्तीफ़ा देंगे और नई सरकार का आज ही शपथ ग्रहण समारोह होगा।

बिहार में मचे सियासी घमासान को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का दांव भी नहीं रोक पाया। दरअसल यह चर्चा इसलिए तेज़ है कि लालू यादव ने बिहार के पूर्व सीएम जीतन राम मांझी (संरक्षक, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) को अपने पाले में लाने की कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हो पाए।
बिहार में बदले सियासी समीकरण में जीतन राम मांझी कीफैक्टर कैसे बन गए आइए समझते हैं। बिहार में सरकार बनाने के लिए 122 विधायकों की ज़रूरत है। महागठबंधन नेताओं का दावा है कि उनके पास 118 विधायकों की तादाद है। ऐसे में सरकार बनाने के लिए 4 और विधायकों की ज़रूरत है। जो मांझी के पास है।
हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के संरक्षक जीतन राम मांझी को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने सीएम पद तक का ऑफर दिया। कांग्रेस के दिग्गज नेता राहुल गांधी ने इंडिया गठबंधन में आने का न्यौता दिया। इन सबके बावजूद जीतन मांझी ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि जहां पीएम मोदी, वहां हम। बिहार के लिये यही ज़रूरी है।
जीतन मांझी के बयान के बाद यह साफ हो गया कि वह एनडीए के पाले में ही रहना चाहते हैं। इसके बाद से ही यह चर्चा शुरू हो गई कि बिहार में सरकार बनाने के लिए लालू यादव का भी दांव नहीं चल पाया। सीएम नीतीश कुमार ही नई सरकार बनाने जा रहे हैं।
इसे लालू यादव की बेटी डॉ. रोहिणी आचार्य ने ट्वीट से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि 'जब तक सांस बाकी है, सांप्रदायिक ताक़तों के ख़िलाफ़ हमारी लड़ाई जारी है'।मतलब कि सरकार बनाने में नामकामयाब होने पर सोशल मीडिया के ज़रिए गुस्सा ज़ाहिर की गई है।












Click it and Unblock the Notifications