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Bihar Caste wise MLA: 2025 में किस जाति के सबसे ज़्यादा MLA जीते? ये '5 जातियाँ' बनीं नई किंगमेकर

Bihar Caste wise MLA: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने एक बार फिर राज्य की राजनीति में जातीय समीकरणों के सर्वोपरि महत्व को साबित कर दिया है। 243 सीटों वाली विधानसभा में इस बार जातीय प्रतिनिधित्व में नाटकीय उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जो शक्ति संतुलन में एक बड़े बदलाव का संकेत है।

इन चुनावों का सबसे बड़ा झटका यादव समुदाय को लगा, जिनकी सीटें 2020 के 55 से लगभग आधी होकर मात्र 28 रह गईं। मुस्लिम प्रतिनिधित्व में भी भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे पारंपरिक MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण की कमजोर पकड़ स्पष्ट हुई। इसके विपरीत, राजपूत, कुर्मी, कुशवाहा, वैश्य और भूमिहार जैसी जातियों ने अपनी सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज कर नई जातीय गोलबंदी और राज्य की राजनीति में एक नए शक्ति केंद्र का उदय किया है। यह चुनाव बिहार में एक नई सामाजिक-राजनीतिक पटकथा लिखता है।

Bihar Caste wise MLA

Bihar Chunav 2025: जाति चुने गए विधायकों की संख्या

  • राजपूत: 32
  • यादव: 28
  • वैश्य: 26
  • कुर्मी: 25
  • कुशवाहा: 23
  • भूमिहार: 23
  • दलित : 36
  • ब्राह्मण: 14
  • अतिपिछड़ा (EBC)13
  • मुस्लिम: 11
  • कायस्थ: 02

MY समीकरण को झटका

बिहार की राजनीति में मजबूत माने जाने वाले यादव-मुस्लिम (MY) समीकरण को इस बार सबसे बड़ा झटका लगा है। यादवों की सीटें 2020 की 55 से घटकर 2025 में सिर्फ 28 रह गईं। इसी तरह, मुस्लिम विधायकों की संख्या भी 14 से घटकर 11 पर आ गई। लगातार तीन चुनावों की तुलना में यादवों का राजनीतिक ग्राफ नीचे आया है, जो RJD के पारंपरिक वोट बैंक में बिखराव को दिखाता है। यह गिरावट स्पष्ट संकेत है कि पारंपरिक जातीय गोलबंदी कमजोर पड़ी है और मतदाताओं ने अन्य विकल्प तलाशे हैं।

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सामान्य वर्ग की मजबूत हिस्सेदारी

सामान्य वर्ग (General Category) ने इस चुनाव में अपनी मजबूत वापसी दर्ज की है। राजपूत विधायकों की संख्या 18 से बढ़कर 32 हो गई, जो इस वर्ग में सबसे अधिक है। भूमिहार विधायकों ने भी 17 से 23 पर पहुँचकर स्थिर प्रदर्शन किया है। इन दोनों जातियों की सीटों में बढ़ोतरी बताती है कि सामान्य वर्ग के मतदाताओं ने एकजुट होकर वोट किया है। हालांकि, ब्राह्मणों की संख्या 12 से 14 हुई, जबकि कायस्थ (3 से 2) कमजोर हुए हैं, लेकिन राजपूत और भूमिहार की बढ़त ने सामान्य वर्ग को शीर्ष तीन समूहों में ला खड़ा किया है।

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मध्य ओबीसी (कुर्मी, कुशवाहा, वैश्य) का उदय

2025 का चुनाव कुर्मी, कुशवाहा और वैश्य समाज के लिए विशेष रूप से फायदेमंद रहा है, जो मध्य ओबीसी के उदय को दर्शाता है। कुर्मी विधायक 10 से बढ़कर 25 हुए, कुशवाहा 16 से बढ़कर 23 पर पहुँचे, और वैश्य भी 22 से बढ़कर 26 हो गए। इन वर्गों की सीटों में भारी उछाल यह संकेत देता है कि राजनीतिक दलों की रणनीति और टिकट वितरण में इन जातियों का प्रभाव बढ़ा है। यह मध्य ओबीसी वर्ग की बढ़ती राजनीतिक महत्वाकांक्षा और नई गठबंधन शक्ति को दर्शाता है, जो भविष्य की राजनीति को प्रभावित करेगी।

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दलितों और अति पिछड़ा वर्ग का बिखराव

दलित और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के प्रतिनिधित्व में गिरावट और बिखराव देखा गया। दलित विधायकों की संख्या 38 से मामूली घटकर 36 रह गई, जो दर्शाता है कि उनकी भागीदारी लगभग स्थिर रही है। वहीं, अति पिछड़ा वर्ग के विधायकों की संख्या 21 से घटकर सिर्फ 13 रह गई, जो इस वर्ग में वोटों के बड़े बिखराव और कई प्रमुख नेताओं की हार का संकेत देता है। इसके विपरीत, एसटी सीटों में चार गुना उछाल आया है। यह आँकड़ा दिखाता है कि दलित और अति पिछड़ा वर्ग के वोट अब किसी एक पार्टी के लिए स्थिर नहीं रहे हैं।

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