Bihar Politics: कन्हैया के बहाने बिहार में लालू को सीधी चुनौती तो नहीं दे रही कांग्रेस? 5 संकेतों से समझिए
Bihar Politics: बिहार की राजनीति में कांग्रेस एक बार फिर से अपने दम पर सक्रिय होने की कोशिश करती नजर आ रही है। खासकर चुनावी साल में प्रदेश की राजनीति में कन्हैया कुमार की कांग्रेस में बढ़ती भूमिका इस ओर संकेत कर रही है कि कांग्रेस राज्य में अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश में जुटी है।
सवाल यह उठता है कि क्या कांग्रेस कन्हैया कुमार के माध्यम से लालू प्रसाद यादव और उनकी पार्टी राजद को सीधी चुनौती देने की तैयारी कर रही है?

Bihar Congress: 1. कांग्रेस बिहार में अपने बचे हुए जनाधार टटोलना चाहती है!
कांग्रेस, जो बिहार में अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है, अब अपने जनाधार को फिर से टटोलने की कोशिश कर रही है। कन्हैया कुमार की बढ़ती भूमिका और उनकी संभावित पदयात्रा इस बात का संकेत है कि पार्टी अपनी बची हुई ताकत को आंकना चाहती है।
Bihar Kanhaiya Kumar: 2. 'पलायन रोको, नौकरी दो यात्रा' के माध्यम से युवा वोटरों पर फोकस
कांग्रेस की प्रस्तावित 'पलायन रोको, नौकरी दो यात्रा' यह दिखाती है कि पार्टी का मुख्य ध्यान बिहार के युवा मतदाताओं पर है। यह रणनीति तेजस्वी यादव की राजनीति से मिलती-जुलती है, जो बेरोजगारी को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाकर अपने कोर वोट बैंक को मजबूत करने में लगे हैं। ऐसे में यह यात्रा आरजेडी के लिए भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है।
Bihar Politics: 3. कांग्रेस अपनी ऐतिहासिक विरासत को भी भुनाने की कोशिश में
कांग्रेस 16 मार्च से मोतिहारी के भितिहरवा आश्रम से अपनी पदयात्रा शुरू करने जा रही है। यह वही स्थान है जहां महात्मा गांधी ने चंपारण सत्याग्रह की शुरुआत की थी। कांग्रेस इस कदम के जरिए अपनी ऐतिहासिक विरासत को भुनाना चाहती है और जनता के बीच अपनी पुरानी छवि को पुनर्जीवित करने की कोशिश में है और देखना चाहती है कि राज्य में उसके लिए कितनी संभावनाएं आज भी बची हुई हैं।
Bihar Tejashwi Yadav: 4. लालू की राजनीति को सीधी चुनौती देने की कोशिश?
कन्हैया कुमार की बिहार में बढ़ती सक्रियता लालू प्रसाद यादव के लिए एक नए राजनीतिक संकेत से कम नहीं है। बिहार की राजनीति के जानकारों की मानें तो लालू यादव पहले ही कन्हैया कुमार की बिहार की सियासत में एंट्री को लेकर आशंकित रहे हैं, क्योंकि इससे उनके बेटे तेजस्वी यादव की राजनीति प्रभावित हो सकती है। अगर कन्हैया कुमार बिहार में सफल होते हैं, तो यह आरजेडी के लिए एक नई चुनौती बन सकती है।
Bihar Chunav: 5. चुनावी राजनीति में अभी तक असफल रहे कन्हैया कुमार कितना बनाएंगे, किसका बिगाड़ेंगे?
बिहार से लेकर दिल्ली तक कन्हैया कुमार अब तक चुनावी राजनीति में पूरी तरह से नाकाम साबित हुए हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में वे बेगूसराय से सीपीआई के टिकट पर बीजेपी के दिग्गज और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से बुरी तरह हार चुके हैं।
इसके अलावा, 2024 में लोकसभा चुनाव में उत्तर पूर्वी दिल्ली से भी भाजपा के दिग्गज मनोज तिवारी ने उन्हें जबरदस्त तरीके से पराजित किया था। इस चुनाव में अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी समेत इंडिया ब्लॉक की तमाम पार्टियां कांग्रेस के लिए बैटिंग कर रही थीं, फिर भी पूर्वांचल के बड़े चेहरे पर वह कोई प्रभाव नहीं डाल सके।
Bihar Politics: "कांग्रेस पूरी तरह से पसोपेश में है"
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के इस नए प्रयोग के बारे में वनइंडिया ने बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार विजय झा से भी बात की। उनका कहना है-
"कांग्रेस पूरी तरह से पसोपेश में है, वह क्या करे और क्या ना करे। उन्हीं मुद्दों को वह उठा रही है, जो तेजस्वी यादव पहले से ही लेकर चल रहे हैं। लेकिन, यह निश्चित तौर पर जान लीजिए की कांग्रेस अभी महागठबंधन में ही रहेगी और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ेगी। सीटों का भले प्रेशर उन्होंने बना दिया है कि 70 सीट से कम नहीं लड़ेगी। लेकिन, ऐसी संभावना इस बार है नहीं।"
जहां तक कन्हैया कुमार की लॉन्चिंग की बात है तो उनके मुताबिक, "कांग्रेस को यह पता है कि कन्हैया कुमार मुसलमानों में भी काफी लोकप्रिय हैं और आने वाली राजनीति के युवा चेहरे के तौर पर बिहार में कुछ कमाल कर सकते हैं। 2020 में जब कन्हैया कुमार ने एक यात्रा की थी तो उनकी सभाओं में काफी भीड़ जुटती थी। अब जमीन की परीक्षा में कन्हैया कहां खड़े होते हैं, कितना नंबर ला पाते हैं, यह तो भविष्य बताएगा, लेकिन इस बहाने कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं में जोश जरूर भर देगी।"
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