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Karnataka: दलित-आदिवासियों का फंड डायवर्ट, अल्पसंख्यकों की चांदी, क्यों सहयोगी भी उठा रहे कांग्रेस पर सवाल?

Karnataka Budget 2025: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने साल 2025-26 का जो बजट पेश किया है, उसको लेकर विवाद खड़ा हो गया है। इस बजट में दलितों और आदिवासियों के लिए निर्धारित फंड का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस की चुनावी गारंटियों को पूरा करने में डायवर्ट कर दिया गया है।

इस मुद्दे पर विपक्षी बीजेपी (BJP) और दलित संघर्ष समिति (DSS) ने कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। वहीं, अल्पसंख्यकों के लिए बजट में भारी बढ़ोतरी किए जाने से यह भी आरोप लग रहा है कि यह वोटबैंक की राजनीति का हिस्सा है, क्योंकि इनमें से ज्यादातर मुसलमान हैं।

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Karnataka Budget 2025: लित-आदिवासियों को समर्पित योजना का फंड चुनावी गारंटियों के लिए डायवर्ट

कर्नाटक सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) उप योजना और अनुसूचित जनजाति (ST) उप योजना (SCPTSP) के तहत तय किए गए फंड में से 24.1% राशि कांग्रेस की पांच गारंटियों को पूरा करने के लिए डायवर्ट कर दी है। यह राशि 13,435 करोड़ रुपए के करीब है। इससे पहले भी 2024-25 के बजट में 14,283 करोड़ रुपए की राशि कांग्रेस सरकार ने अपने चुनावी वादों को पूरा करने के लिए प्रयोग की थी।

बीजेपी और दलित संघर्ष समिति का कहना है कि यह रकम कानून के तहत केवल दलितों और आदिवासियों के कल्याण और उनके विकास कार्यक्रमों के लिए ही इस्तेमाल की जानी चाहिए। समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस फंड को लोक-लुभावन योजनाओं पर खर्च किए जाने का विरोध करती रहेगी।

इस मुद्दे पर दलित और आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री सिद्दारमैया से मुलाकात भी की, लेकिन उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल सका।

Karnataka Congress: दलितों और आदिवासियों को ही मिल रहा गारंटियों का ज्यादा लाभ?

कर्नाटक सरकार का तर्क है कि कांग्रेस की पांच गारंटी योजनाओं के अधिकांश लाभार्थी दलित और आदिवासी समुदाय से आते हैं, इसलिए यह कहना गलत होगा कि उनके फंड को अन्य जगह पर उपयोग किया जा रहा है।

हालांकि, डीएसएस और बीजेपी इस दावे को खारिज कर रहे हैं और इसे दलित-आदिवासी विरोधी नीति करार दे रहे हैं। दिलचस्प बात ये है कि दलित संघर्ष समिति कांग्रेस की ही सहयोगी है।

Karnataka News: अल्पसंख्यकों पर मेहरबानी के मायने?

इस बजट में कांग्रेस सरकार ने अल्पसंख्यकों के लिए आवंटित राशि में 40% की वृद्धि की है। यह राशि 3,200 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 4,500 करोड़ रुपए कर दी गई है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब रमजान का महीना चल रहा है।

कर्नाटक में वित्त विभाग भी सिद्दारमैया के पास है, इसलिए उन्होंने अपना 16वां बजट पेश किया है। लेकिन, बीजेपी उनके इस बजट को 'हलाल बजट' कहकर तंज कस रही है।

मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों की साक्षरता दर राज्य में सबसे कम है और उन्हें मुख्यधारा में लाने के लिए उनके कल्याण और शिक्षा पर अधिक खर्च किया जाना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार सिर्फ 'सबका साथ, सबका विकास' का नारा नहीं देती, बल्कि वास्तव में सभी समुदायों के विकास के लिए काम करती है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सिद्दारमैया सरकार के इस बजट की सराहना करते हुए इसे 'जनता की उम्मीदों को पूरा करने वाला' बताया है। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने इस बजट को राज्य के 7 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने वाला बताया है।

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