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Bihar News: क्या है 'गुंडा बैंक'? सम्राट चौधरी ने क्यों छेड़ी जंग, कैसे महिलाएं होती हैं इसका शिकार?

Bihar illegal Finance loan: बिहार के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य में लंबे समय से चल रहे 'गुंडा बैंक' नामक अवैध सूदखोरी के नेटवर्क को जड़ से खत्म करने का एलान किया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि मनमाने ब्याज पर पैसा देने, लोगों की जमीन गिरवी रखने के लिए मजबूर करने और डर का माहौल बनाने वाली इस शोषणकारी व्यवस्था को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सरकार की इस शीर्ष प्राथमिकता का उद्देश्य केवल उन्हीं बैंकों को चलने देना है जिन्हें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा मान्यता प्राप्त है। इस कदम से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है, जहां आरजेडी ने एनडीए पर ही सवाल उठा दिया है।

Bihar illegal Finance loan

क्या है बिहार का 'गुंडा बैंक'?

'गुंडा बैंक' कोई कानूनी वित्तीय संस्थान नहीं, बल्कि अवैध सूदखोरों और उनसे जुड़े आपराधिक तत्वों का एक नेटवर्क है। ये लोग उन ज़रूरतमंदों को ऊंचे ब्याज पर कर्ज देते हैं जो औपचारिक बैंकिंग प्रणाली तक नहीं पहुंच पाते। इनकी वसूली का तरीका बेहद हिंसक और डराने वाला होता है। मनमाना और अत्यधिक ब्याज वसूलने के साथ-साथ, वे अक्सर कर्ज न चुका पाने वाले गरीब लोगों को अपनी जमीन या संपत्ति गिरवी रखने और खोने पर मजबूर करते हैं। यह व्यवस्था सालों से बिहार के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शोषण का एक बड़ा कारण बनी हुई है।

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अवैध फाइनेंस कंपनियों द्वारा महिलाओं का शोषण

बिहार में कई अवैध फाइनेंस कंपनियां ग्रामीण महिलाओं को आसानी से लोन देने का लालच देकर उन्हें अपना निशाना बनाती हैं। ये कंपनियां अक्सर झूठ बोलकर महिलाओं को समूह में शामिल करती हैं, उनकी पात्रता (क्राइटेरिया) की अनदेखी करती हैं, और कम ब्याज दर का वादा करती हैं।

लेकिन वसूली के समय, ये कंपनियां मनमाना और बहुत ऊंचा ब्याज वसूलना शुरू कर देती हैं। इस धोखाधड़ी और शोषण के कारण कर्जदार महिलाएं गहरे कर्ज के जाल (Debt Trap) में फंस जाती हैं। वसूली के लिए अपनाए गए हिंसक और अपमानजनक तरीकों से राज्य में कई बार हिंसक घटनाएं और आत्महत्या के मामले भी सामने आए हैं, जिसने इस समस्या को एक गंभीर सामाजिक और कानूनी मुद्दा बना दिया है।

सम्राट चौधरी ने क्यों छेड़ी यह जंग?

डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने इस अवैध व्यवस्था को समाप्त करना अपनी शीर्ष प्राथमिकता बताया है। उनका मानना है कि यह 'गुंडा बैंक' व्यवस्था राज्य में भय और अराजकता का माहौल पैदा करती है, जो कानून के शासन के विपरीत है। इस पर कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य गरीब और शोषित लोगों को सूदखोरों के चंगुल से मुक्त कराना और उन्हें वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि केवल RBI-मान्यता प्राप्त बैंक ही राज्य में संचालित हों और सूदखोरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि राज्य में शांति और कानूनी व्यवस्था बनी रहे।

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आरजेडी ने क्यों उठाया एनडीए पर सवाल?

सम्राट चौधरी के इस सख्त बयान के बाद, विपक्षी पार्टी आरजेडी ने एनडीए सरकार पर ही पलटवार किया है। आरजेडी का तर्क है कि अगर 'गुंडा बैंक' का अवैध कारोबार वर्षों से चल रहा था, तो पहले की एनडीए सरकारों ने इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने सवाल उठाया है कि इतने सालों तक यह अवैध नेटवर्क किसकी शह पर फलता-फूलता रहा। आरजेडी के इस बयान से यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग ले चुका है, जहां सरकार की कार्रवाई के साथ-साथ विपक्ष इसे शासन-प्रशासन की पिछली विफलताओं के रूप में पेश कर रहा है और इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।

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