Bihar: BJP को पछाड़कर विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनेगी JDU? नीतीश का 'साइलेंट ऑपरेशन' शुरू
Bihar Politics: बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़े 'खेला' की अटकलें ज़ोर पकड़ रही हैं। चर्चा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी पार्टी जेडीयू (JDU) को विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनाने की तैयारी में हैं, ताकि वह गठबंधन सहयोगी बीजेपी (BJP) पर अपनी पकड़ मज़बूत कर सकें। हाल ही में, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के तीन विधायकों ने नीतीश कुमार से मुलाकात की, जिसके बाद अटकलों का बाज़ार गर्म हो गया। इन विधायकों में से एक, मो. मुर्शीद आलम ने तो सीएम को अपना 'राजनीतिक गुरु' तक बता दिया।
विधानसभा अध्यक्ष का पद बीजेपी के पास जाने के बाद, माना जा रहा है कि नीतीश कुमार अब अन्य छोटे दलों और विधायकों के सहारे विधानसभा में शक्ति संतुलन को अपने पक्ष में झुकाना चाहते हैं।

ओवैसी के 5 में 3 विधायकों ने नीतीश कुमार से की मुलाकात
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को बड़ा झटका देते हुए, उसके तीन विधायकों ने सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। इस मुलाकात से बिहार की राजनीति में बड़ी हलचल मच गई और पार्टी में टूट की अटकलें तेज हो गईं। इन विधायकों के पाला बदलने की चर्चा के बीच, विधायक मो. मुर्शीद आलम ने बाहर आकर नीतीश कुमार को अपना 'राजनीतिक गुरु' बता दिया, जिससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया।
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क्यों AIMIM के विधायक बन सकते हैं JDU की सबसे बड़ी ताकत?
जनता दल यूनाइटेड (JDU) द्वारा AIMIM विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल कराने के पीछे मुख्य रूप से विधानसभा में अपनी संख्या और राजनीतिक दबदबा बढ़ाने का उद्देश्य है।
सबसे बड़ी पार्टी बनने की होड़: ववर्तमान में BJP बिहार विधानसभा में 89 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि JDU 85 विधायकों के साथ दूसरे स्थान पर है। नीतीश कुमार का लक्ष्य JDU को शीर्ष पर लाना है। यदि AIMIM के तीन विधायक JDU में शामिल होते हैं, तो JDU की संख्या 88 हो जाएगी। अगर AIMIM के सभी पांचों विधायक पाला बदलकर JDU में आ जाते हैं, तो JDU की संख्या सीधे 90 पहुंच जाएगी, और वह BJP को पछाड़कर विधानसभा में नंबर-1 पार्टी बन जाएगी।
शक्ति संतुलन: विधानसभा अध्यक्ष का पद BJP के पास जाने के बाद, नीतीश कुमार सरकार पर अपनी पकड़ किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देना चाहते। विधायकों की संख्या बढ़ाना उन्हें गठबंधन के भीतर मोलभाव करने और सरकार के फैसलों पर नियंत्रण रखने की अधिक शक्ति देगा।
राजनीतिक दबदबा: विधायकों की संख्या बढ़ने से गठबंधन की राजनीति में JDU का राजनीतिक महत्व और बढ़ जाएगा, जिससे वह बीजेपी के सामने एक मज़बूत भागीदार के रूप में खड़ी रह सकेगी।
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पिछली बार AIMIM के 4 विधायक RJD में हो गए थे शामिल
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM में यह टूट की आशंका नई नहीं है। बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के बाद भी पार्टी को बड़ा झटका लगा था। उस समय AIMIM के 5 में से 4 विधायक पाला बदलकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में शामिल हो गए थे। इस इतिहास को देखते हुए, वर्तमान में तीन विधायकों का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मिलना साफ संकेत है कि AIMIM एक बार फिर बड़े विभाजन का सामना कर रही है, जिससे बिहार की राजनीति में उसका वजूद खतरे में पड़ सकता है।
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