'बड़े लोगों को बचाया जा रहा है', NEET UG पेपर लीक में बड़ा अपडेट, पकड़े गए आरोपी ने किसे बताया मास्टरमाइंड?

NEET UG 2026 परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस पूरे नेटवर्क को लेकर नए खुलासे सामने आ रहे हैं। परीक्षा से पहले गेस पेपर के जरिए प्रश्न लीक होने और उसे अलग-अलग राज्यों तक फैलाने के आरोपों ने इस केस को और गंभीर बना दिया है। मामले की जांच CBI कर रही है, जबकि शुरुआती सुराग राजस्थान से जुड़े नेटवर्क तक पहुंचे थे।

इसी बीच जयपुर में पेशी के दौरान एक गिरफ्तार आरोपी का बयान सामने आया है, जिसने जांच की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोपी ने दावा किया कि इस पूरे रैकेट में कुछ बड़े लोगों की भूमिका को नजरअंदाज किया जा रहा है और जांच सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित है, जिससे मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।

NEET UG

आरोपियों को बुधवार को जयपुर में मजिस्ट्रेट के आवास पर पेश किया गया, जहां सुनवाई के बाद उन्हें भारी सुरक्षा में बाहर निकाला गया। इसके बाद CBI ने सभी आरोपियों को आगे की पूछताछ के लिए ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली ले जाने की प्रक्रिया शुरू की, ताकि पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच की जा सके।

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'बड़े लोगों को बचाया जा रहा'

आरोपियों को जब बुधवार को जयपुर में मजिस्ट्रेट के आवास पर पेशी के लिए ले जाया गया तब मीडिया के पेपर लीक से जुड़े सवाल पर कहा कि वो लोग छोटे स्तर के लोग हैं। एक आरोपी ने कहा, "बड़े लोगों को बचाया जा रहा है।" अब इस बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोपी के इस एक लाइन ने परीक्षा एजेंसी के साथ-साथ सरकार से लेकर जांच एजेंसी को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।

कौन-कौन गिरफ्तार, किन राज्यों तक फैला नेटवर्क?

CBI ने इस केस में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें जयपुर से मंगललाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल, गुरुग्राम से यश यादव और नासिक से शुभम खैरनार शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि यह पूरा रैकेट सिर्फ एक जगह तक सीमित नहीं था, बल्कि राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र तक फैला हुआ एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें कई स्तरों पर लोग जुड़े हुए थे।

'गेस पेपर' के जरिए लीक का तरीका

जांच एजेंसियों के अनुसार, परीक्षा से पहले प्रश्नों को 'गेस पेपर' के रूप में तैयार किया गया और फिर उसे कोचिंग नेटवर्क, सोशल मीडिया और कूरियर सिस्टम के जरिए छात्रों तक पहुंचाया गया। यह मामला 3 मई को हुई NEET-UG 2026 परीक्षा से जुड़ा है, जिसे बाद में 12 मई को रद्द कर दिया गया। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि यह कोई छोटा लीक नहीं बल्कि संगठित गिरोह का काम हो सकता है।

SOG की जांच से CBI तक पहुंचा केस

इस मामले की शुरुआती जांच Rajasthan Special Operations Group यानी SOG ने की थी, जिसने सीकर के कोचिंग नेटवर्क से जुड़े एक मेडिकल छात्र तक कड़ियां जोड़ी थीं। इसके बाद जांच को और व्यापक स्तर पर ले जाने के लिए केस को केंद्र सरकार ने CBI को सौंप दिया।

CBI अब इस पूरे नेटवर्क को समझने के लिए डिजिटल चैट, पैसे के लेनदेन और कोचिंग संस्थानों के संपर्कों की जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस पूरे रैकेट का असली मास्टरमाइंड कौन है और क्या कोई बड़ा नाम अभी भी जांच से बाहर है, जैसा कि आरोपी के बयान से संकेत मिलता है।

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