12वीं के मार्क्स पर मिलेगा मेडिकल कॉलेज में दाखिला? पेपर लीक के बीच CM विजय ने उठाई NEET को खत्म करने की मांग
NEET UG 2026 को लेकर देशभर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (C Josheph Vijay) ने एक बार फिर NEET परीक्षा को खत्म करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा है कि मेडिकल प्रवेश 12वीं के अंकों के आधार पर होना चाहिए। NEET 2024 के बाद NEET 2026 में पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद पूरे देश में इसे लेकर आक्रोश है।
यह मामला अब और गंभीर हो गया है जब पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने 3 मई को आयोजित हुई NEET UG 2026 परीक्षा 12 मई को रद्द कर दी। इससे देशभर के करीब 22 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के पास है, जिसने कई राज्यों में छापेमारी कर पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच में डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए हैं।

क्यों उठ रही NEET को खत्म करने की मांग?
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि NEET परीक्षा ग्रामीण, सरकारी स्कूल और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए बाधा बनती है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने दोहराया कि MBBS, BDS और आयुष कोर्स की राज्य कोटे की सीटों में दाखिला 12वीं के अंकों के आधार पर ही होना चाहिए।
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NEET UG 2026 पेपर लीक का नेटवर्क कैसे फैला
राजस्थान पुलिस की SOG जांच में सामने आया कि एक 'गेस पेपर' की शुरुआत सीकर जिले के एक MBBS छात्र से हुई थी, जो केरल में पढ़ाई कर रहा था। उसने यह सामग्री अपने दोस्तों और सीकर के एक हॉस्टल मालिक के साथ शेयर की। इसके बाद यह पेपर कोचिंग छात्रों के बीच फैलते हुए जयपुर और आसपास के इलाकों तक पहुंच गया। जांच में यह भी शक जताया गया है कि इसका नेटवर्क गुरुग्राम के जरिए राजस्थान पहुंचा और इसका संभावित स्रोत नासिक हो सकता है।
जांच एजेंसियों ने सीकर, झुंझुनू, अलवर, जयपुर शहर और जयपुर ग्रामीण में संयुक्त कार्रवाई की। इस दौरान 150 से ज्यादा उम्मीदवारों, उनके दोस्तों और परिजनों से पूछताछ की गई। इस पूरे मामले को लेकर NSUI, भारतीय युवा कांग्रेस, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और SFI ने अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन किया। कई जगहों पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठी।
NEET की शुरुआत कब हुई, पहले कैसे होता था मेडिकल कॉलेज में दाखिला?
NEET परीक्षा को पूरे देश में मेडिकल प्रवेश के लिए एक समान प्रणाली के रूप में वर्ष 2013 में शुरू किया गया था और 2016 से इसे मुख्य राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा के रूप में लागू किया गया। इसका उद्देश्य मेडिकल दाखिले के लिए एक ही परीक्षा प्रणाली बनाना था। NEET शुरू होने से पहले मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश अलग-अलग तरीके से होता था। कई राज्यों में 12वीं के अंकों के आधार पर मेरिट बनती थी, जबकि कुछ कॉलेज अपनी अलग प्रवेश परीक्षाएं भी लेते थे। इससे पूरी प्रणाली अलग-अलग और असमान थी, जिसे खत्म करने के लिए राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा लागू की गई।
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