Maharashtra: मुंबई में दुकान या ऑफिस है तो सावधान! BMC का नया 'फरमान' जारी, उल्लंघन किया तो होगी कार्रवाई!
BMC Marathi Signboard Rule: मुंबई में व्यापार करने वालों के लिए एक बड़ी और बेहद जरूरी खबर सामने आई है। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) की लॉ कमेटी ने शहर के सभी होटलों, कॉर्पोरेट ऑफिसों और दुकानों के लिए एक नया और सख्त आदेश जारी किया है। अब मुंबई की सड़कों पर साइनबोर्ड्स का नजारा बदलने वाला है और इसके लिए प्रशासन ने महज एक महीने की समय सीमा तय कर दी है। आइए जानेंतें हैं BMC की इस नई गाइडलाइन में क्या खास है?
बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) की विधि समिति (Law Committee) ने बुधवार को मुंबई के सभी होटलों, कॉर्पोरेट कार्यालयों, दुकानों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए एक महीने की समय सीमा जारी की है। डिप्टी मेयर संजय घाडी के अनुसार, अब इन सभी जगहों पर मराठी साइनबोर्ड लगाना अनिवार्य होगा। घाडी ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद मुंबई में हजारों प्रतिष्ठान अभी भी मराठी में साइनबोर्ड नहीं लगा रहे हैं।

दायरे में कौन-कौन आएगा? (Marathi Board IN Mumbai )
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह नियम किसी छोटे तबके के लिए नहीं बल्कि सबके लिए समान है। संजय घाडी ने कहा कि फाइव स्टार होटलों से लेकर बड़े कॉर्पोरेट टावरों तक, सभी को एक महीने के भीतर मराठी साइनबोर्ड लगाने होंगे। इस बैठक के दौरान तजिंदर सिंह तिवाना ने मुद्दा उठाया कि 'द वेस्टिन' और 'मॉर्गन स्टेनली' जैसी कई बड़ी इमारतें और होटल अभी भी केवल अंग्रेजी में ही अपने नाम प्रदर्शित कर रहे हैं।
STORY | Shops, hotels in Mumbai must install Marathi signboards or face 'Sena-style' action: Dy Mayor
— Press Trust of India (@PTI_News) May 14, 2026
Mumbai Deputy Mayor Sanjay Ghadi has asked shops and other establishments, including five-star hotels and celebrity-owned outlets, to prominently display signboards in Marathi… pic.twitter.com/8ISbIzX4sB
उल्लंघन किया तो होगी कार्रवाई!
BMC प्रशासन अब इस मामले में कोई ढील देने के मूड में नहीं है। घाडी ने बताया कि नगर निगम के लाइसेंस विभाग को नोटिस जारी करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों की पहचान करने के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इसके बाद भी कोई नियम नहीं मानता है, तो उन्हें 'शिवसेना स्टाइल' में जवाब दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी पर सवाल
विधि समिति की अध्यक्ष दीक्षा कारकर ने प्रशासन से सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को लागू करने में हो रही देरी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब कोर्ट के आदेश बिल्कुल स्पष्ट हैं, तो प्रशासन इसे अनिवार्य क्यों नहीं बना रहा है? कारकर ने हैरानी जताते हुए कहा कि हमें उर्दू और हिंदी में बोर्ड दिखते हैं, लेकिन मराठी में नहीं। अब इस नियम को सख्ती से लागू किया जाएगा और इसकी कड़ी निगरानी भी की जाएगी।
इस मुद्दे को मनसे (MNS) और अन्य पार्षदों का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। मनसे पार्षद यशवंत किल्लेदार ने भी स्टैंडिंग कमेटी की बैठक के दौरान मांग की कि BMC अधिकारियों को इसके क्रियान्वयन में देरी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो भी प्रतिष्ठान इन नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, उनके खिलाफ तुरंत और सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।












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