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Bihar Election: महागठबंधन की पटना में अहम बैठक, Tejashwi Yadav सीट बंटवारे पर करेंगे चर्चा

Tejashwi Yadav: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए सीट समझौते को लेकर शनिवार को अहम बैठक हो रही है। इंडिया गठबंधन के सभी प्रमुख दल इसमें हिस्सा लेंगे। तेजस्वी यादव भी इस बैठक में शामिल होंगे। इस बार इंडिया अलायंस के लिए सीट शेयरिंग का फैसला आसान नहीं रहने वाला है। आरजेडी चाहती है कि कांग्रेस 50 से ज्यादा सीटों की डिमांड न करे। पिछले चुनाव में कांग्रेस 75 सीटों पर लड़ी थी। हालांकि, कांग्रेस और आरजेडी दोनों के ही शीर्ष नेतृत्व इंडिया गठबंधन के मिलकर चुनाव लड़ने की बात दोहरा रहे हैं।

बिहार में महागठबंधन के सामने सीट शेयरिंग के सम्मानजनक समझौते तक पहुंचना चुनौतियों से भरा रहने वाला है। लालू यादव और तेजस्वी यादव चाहते हैं कि कांग्रेस इस बार कम सीटों पर चुनाव लड़े। 75 के बजाय कांग्रेस को 50 ही सीटें दी जाएं और बची हुई सीटों में लेफ्ट पार्टियों और बाकी छोटे दलों के बीच बांटी जाए। हालांकि, कांग्रेस को इसके लिए राजी करना आसान नहीं होगा।

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Tejashwi Yadav के सामने कांग्रेस को मनाना बड़ी चुनौती

पिछले चुनाव में तेजस्वी यादव की मेहनत और आरजेडी के अच्छे प्रदर्शन के बावजूद सत्ता की चाभी नीतीश कुमार के हाथ में रही थी। आरजेडी ने भी दबी जुबान में माना था कि कांग्रेस के खराब प्रदर्शन की वजह से बहुमत से दूर रहना पड़ा है। कांग्रेस 75 सीटों पर चुनाव लडी थी लेकिन सिर्फ 17 सीटें ही जीत पाई। इस बार राहुल गांधी खुद कई बार बिहार की यात्रा कर चुके हैं। कांग्रेस ने चुनाव से पहले प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर राजेश कुमार को नियुक्त किया है। कांग्रेस महिला और दलितों के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। तेजस्वी यादव के लिए कांग्रेस को पिछली बार से कम सीटों पर लड़ने के लिए मनाना बहुत मुश्किल होगा।

मुकेश सहनी और लेफ्ट पार्टी की मांग पूरी करना भी चुनौती

75 से सीधे 50 सीटों पर लड़ने के लिए कांग्रेस अगर तैयार हो जाती है, तो पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के मनोबल पर असर होगा। इसकी एक संभावना भी है कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेता इससे नाराज हो जाएं। कुछ मजबूत चेहरे टिकट नहीं मिलने पर दूसरे दलों में शामिल हो सकते हैं या चुनाव में मेहनत न करें।

महागठबंधन के लिए कुल मिलाकर सीट शेयरिंग पर सहमति बनाना मुश्किल रहने वाला है। मुकेश सहनी भी अपनी पार्टी के लिए 10 सीटें मांग रहे हैं। झामुमो भी आदिवासी बहुल और बिहार-झारखंड सीमावर्ती जिलों में अपने लिए 4-5 सीटें चाहती है। सभी सहयोगियों को साथ लेकर चलना चुनाव तक बड़ी जिम्मेदारी होगी।

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