BRICS समिट के दौरान आपस में भिड़े ईरान-UAE के विदेश मंत्री! किस बात पर हुआ घमासान? किसने कराया शांत?
BRICS 2026: New Delhi में हुई BRICS देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक ने सभी का ध्यान खींचा ही था कि एक ऐसी खबर सामने आई जिसने ज्यादा सुर्खियां बटोरीं। दरअसल बैठक के दौरान ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच बड़ा टकराव देखने को मिला। गुरुवार को हुई एक तीखी बहस में ईरान ने सीधे तौर पर UAE पर आरोप लगाया कि उसने तेहरान के खिलाफ सैन्य अभियानों में भूमिका निभाई। इस बयान ने बैठक का माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण बना दिया।
नेतन्याहू के नाम के साथ हुआ विवाद शुरू
यह पूरा विवाद उस समय और बढ़ गया जब UAE ने इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खाड़ी दौरे से जुड़े दावों को खारिज कर दिया। इससे पहले ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची चेतावनी दे चुके थे कि जो देश इज़राइल के साथ मिलकर क्षेत्र में फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा। हालांकि यह बहस बहुत थोड़ी देर के लिए हुई लेकिन इसने पूरा माहौल गर्म कर दिया। इसके बाद दोनोंं नेता खुद ही शांत हो गए।

“मैंने BRICS बयान में UAE का नाम जानबूझकर नहीं लिया”
रॉयटर्स के मुताबिक, ईरानी सरकारी मीडिया के हवाले से अराक़ची ने कहा कि उन्होंने BRICS की एकता बनाए रखने के लिए अपने आधिकारिक बयान में UAE का नाम नहीं लिया। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि “सच्चाई यह है कि UAE मेरे देश के खिलाफ आक्रामकता में सीधे तौर पर शामिल था।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब ईरान पर हमले शुरू हुए, तब UAE ने उसकी आलोचना तक नहीं की।
ईरान ने शांति की भी बात की
कड़े आरोपों के बीच अराक़ची ने यह भी कहा कि ईरान और UAE को शांति से साथ रहना चाहिए। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच स्थिर और शांतिपूर्ण संबंध बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए आपसी समझ और सहयोग की जरूरत है।
उप विदेश मंत्री का और बड़ा आरोप
इसके बाद ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने और ज्यादा आक्रामक बयान दिया। उन्होंने UAE पर आरोप लगाया कि उसने ईरान के खिलाफ हुए हमलों को आसान बनाने में मदद की। ग़रीबाबादी ने कहा कि अबू धाबी को अपने कामों की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।
“UAE सिर्फ सहयोगी नहीं, हमलावर है”
BRICS बैठक में बोलते हुए ग़रीबाबादी ने कहा कि UAE ने ईरान के खिलाफ सैन्य आक्रामकता को समर्थन दिया और उसे संभव बनाने में अहम भूमिका निभाई। भारत स्थित ईरानी दूतावास के हवाले से उन्होंने कहा कि जो देश खुद तनाव बढ़ाने में शामिल हैं, उन्हें ईरान के खिलाफ राजनीतिक आरोप लगाने का कोई अधिकार नहीं है। साथ ही उन्होंने 1974 के यूनाइटेड नेशन्स के प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा कि “UAE सिर्फ आक्रामकता का सहयोगी नहीं बल्कि खुद एक हमलावर देश है।”
ईरान ने पहले ही दी थी चेतावनी
ग़रीबाबादी ने दावा किया कि ईरान ने संघर्ष बढ़ने से पहले UAE समेत कई खाड़ी देशों को चेतावनी भेजी थी। ईरान ने कहा था कि अगर किसी देश ने अमेरिका या इज़राइल के सैन्य अभियानों में मदद की, तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी। इसे ईरान ने राइट टू सेल्फ डिफेंस बताते हुए कहा कि हमला हुआ था तो जवाब देना जरूरी था। उन्होंने कहा, “हमारे पास UAE में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और उन सुविधाओं को निशाना बनाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था, जिनमें अमेरिका शामिल था।”
UNSC को सौंपे गए 120 से ज्यादा दस्तावेज
ईरान ने दावा किया कि उसने यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल को 120 से ज्यादा राजनयिक नोट और दस्तावेज सौंपे हैं। इन दस्तावेजों में कथित तौर पर उन फाइटर जेट्स का रिकॉर्ड भी शामिल है, जो UAE से उड़ान भरकर अभियानों में शामिल हुए थे। ग़रीबाबादी ने कहा कि हमलों से पहले ईरान ने आधिकारिक तौर पर क्षेत्रीय देशों को संदेश भेजकर आगाह किया था कि अगर उनकी जमीन का इस्तेमाल हुआ तो उसे जायज मिलिट्री टारगेटे माना जाएगा। ईरानी मीडिया के मुताबिक इस बहस के बाद अब दोनों देशों के ज्वॉइंट स्टेटमेंट में दिक्कत आ रही है।
कैसे शुरू हुआ था ईरान युद्ध?
ईरान युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू किए, जिनका निशाना खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने और रणनीतिक ठिकाने बने।
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