Bihar Chunav: एक दर्जन से अधिक बाहुबली परिवार चुनावी मैदान में, अब जेल से पत्नी-बेटा-भाई को लड़ा रहे चुनाव
Bihar Chunav Bahubali Politics: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इस बार युवा नेतृत्व और 'बदलाव' के दावों के बीच एक पुराना और परिचित चेहरा फिर से सिर उठा रहा है - बाहुबलियों का परिवारवाद। मोकामा से लेकर सीवान तक, दशकों से दबंग माने जाने वाले नेताओं की राजनीतिक विरासत अब उनकी पत्नियों, बेटों और भाइयों के कंधों पर है।
यह स्थिति स्पष्ट करती है कि जेल में बंद होने के बावजूद इन 'बाहुबलियों' का प्रभाव जरा भी कम नहीं हुआ है, बल्कि सिर्फ प्रतिनिधित्व के तरीके में बदलाव आया है। करीब एक दर्जन सीटों पर ऐसे 'बाहुबल परिवार' हावी हैं, जो तेजस्वी यादव और चिराग पासवान जैसे युवा नेताओं के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं।

अनंत सिंह परिवार (मोकामा, पटना)
मोकामा के 'छोटे सरकार' कहे जाने वाले बाहुबली अनंत सिंह एक बार फिर जेडीयू के टिकट पर मोकामा से चुनाव लड़ रहे हैं। 2022 में सजा होने के बाद उनकी विधायकी खत्म हो गई थी, जिसके बाद उनकी पत्नी नीलम देवी आरजेडी के टिकट पर उपचुनाव जीती थीं। अब कोर्ट से बरी होने के बाद अनंत सिंह खुद मैदान में हैं। मोकामा की राजनीति एक तरह से "अनंत बनाम सूरजभान परिवार" की परंपरागत जंग बन गई है।
सूरजभान सिंह परिवार (मोकामा)
पूर्व बाहुबली सांसद सूरजभान सिंह खुद चुनाव नहीं लड़ रहे, लेकिन उनकी पत्नी वीणा देवी आरजेडी के टिकट पर मोकामा से मैदान में हैं। उनकी सीधी टक्कर अनंत सिंह से मानी जा रही है, जिससे एक बार फिर "मोकामा की बाहुबल बनाम बाहुबल" वाली लड़ाई देखने को मिलेगी।
आनंद मोहन परिवार (नवीनगर, औरंगाबाद)
पूर्व राजद सांसद और "राजपूत बाहुबली" आनंद मोहन भले ही आजीवन कारावास के बाद राजनीति में सक्रिय नहीं हैं, लेकिन उनके बेटे चेतन आनंद अब जेडीयू के टिकट पर नवीनगर से चुनाव लड़ रहे हैं। 2020 में शिवहर से आरजेडी के टिकट पर जीतने वाले चेतन अब अपनी पार्टी और सीट बदलकर पिता की सामाजिक पकड़ को आगे बढ़ा रहे हैं।
अशोक महतो परिवार (वारिसलीगंज सीट, नवादा)
आरजेडी ने अशोक महतो की पत्नी अनीता देवी को वारिसलीगंज से टिकट दिया है। उनका मुकाबला बीजेपी की अरुणा देवी से है, जो दूसरे बाहुबली अखिलेश सरदार की पत्नी हैं। यह सीट "दो बाहुबलियों की पत्नियों" के बीच की टक्कर के लिए सबसे चर्चित मानी जा रही है। अशोक महतो अपनी सजा पूरी करके जेल से बाहर हैं।
मुन्ना शुक्ला परिवार (लालगंज, वैशाली)
बृज बिहारी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट से उम्रकैद की सजा काट रहे बाहुबली मुन्ना शुक्ला जेल में हैं। उनकी विरासत को उनकी बेटी शिवानी शुक्ला वैशाली के लालगंज सीट से आरजेडी के टिकट पर आगे बढ़ा रही हैं। मुन्ना शुक्ला लालगंज से तीन बार विधायक रहे हैं।
शहाबुद्दीन परिवार (रघुनाथपुर सीट, सीवान)
दिवंगत राजद बाहुबली नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब इस बार रघुनाथपुर सीट से आरजेडी के उम्मीदवार हैं। लंदन से कानून की पढ़ाई के बाद बिहार लौटे ओसामा सीवान में अपने पिता की राजनीतिक विरासत को जीवित रखने के लिए प्रचार में जुटे हैं।
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राजवल्लभ यादव परिवार (नवादा)
आरजेडी के पूर्व मंत्री राजवल्लभ यादव की पत्नी विभा देवी नवादा से जेडीयू की प्रत्याशी हैं। नाबालिग से रेप केस में बरी होकर राजबल्लभ के जेल से बाहर आने के बाद विभा देवी ने पाला बदल लिया है, जो पहले आरजेडी की विधायक थीं।
सुनील पांडे परिवार (तरारी सीट, भोजपुर)
पूर्व जेडीयू विधायक सुनील पांडे के बेटे विशाल प्रशांत तरारी सीट से उपचुनाव में जीत हासिल करने के बाद अब फिर से मैदान में हैं। वहीं, सुनील पांडे के भाई हुलास पांडेय एलजेपी (आर) के टिकट पर ब्रह्मपुर से चुनाव लड़ रहे हैं।
अमरेंद्र पांडेय परिवार (कुचायकोट, गोपालगंज)
बाहुबली विधायक अमरेंद्र पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय कुचायकोट से लगातार छठी बार चुनाव जीतने के लिए मैदान में हैं। वह 2005 से लगातार जेडीयू के टिकट पर जीतते आ रहे हैं।
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रीतलाल यादव (दानापुर, पटना)
आरजेडी विधायक और लालू यादव के करीबी कहे जाने वाले रीतलाल यादव फिलहाल जेल में हैं, लेकिन आरजेडी ने उन्हें दानापुर से फिर से टिकट दिया है। 2020 में भी वे आरजेडी के टिकट पर दानापुर से चुनाव जीते थे।
प्रभुनाथ सिंह परिवार (मांझी और बनियापुर)
विधायक अशोक सिंह हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह के बेटे रणधीर सिंह (जेडीयू से मांझी) और भाई केदारनाथ सिंह (बीजेपी से बनियापुर) चुनावी मैदान में हैं। केदारनाथ के सामने आरजेडी ने दिवंगत अशोक सिंह की पत्नी चांदनी सिंह को उतारा है।
मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह (एकमा, सारण)
सीएम नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले धूमल सिंह एकमा से जेडीयू के टिकट पर एक बार फिर चुनाव लड़ रहे हैं।
लगभग 22 बाहुबली या उनके परिजन मैदान में
कुल मिलाकर, इस चुनाव में करीब 22 बाहुबली या उनके परिजन अपना भाग्य आजमा रहे हैं। इसमें सबसे अधिक 9 बाहुबली और उनके परिजन आरजेडी से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि जेडीयू से 7, बीजेपी से 4 और चिराग की एलजेपी (आर) से 2 प्रत्याशी मैदान में हैं। यह संख्या बताती है कि बिहार की राजनीति में बाहुबल का प्रभाव अब भी कितना गहरा है।
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