Bihar Chunav: एनडीए और महागठबंधन दोनों में सीट शेयरिंग पर घमासान, जानें दोनों जगहों पर कहां फंसा है मामला?
Bihar Chunav: बिहार विधानसभा चुनाव में अब दो महीने से भी कम का समय बचा है और दोनों प्रमुख गठबंधन के बीच सीट बंटवारे को लेकर कई राउंड चर्चा हो चुकी है। महागठबंधन में कांग्रेस और आरजेडी के बीच सीट शेयरिंग को लेकर टकराव है, तो नीतीश कुमार ने भी प्रेशर पॉलिटिक्स शुरू कर दी है। सीट शेयरिंग के ऐलान से पहले ही नीतीश कुमार ने कई सीट पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान भी कर दिया है। दोनों ही प्रमुख गठबंधन के लिए सीट शेयरिंग के समझौते पर जल्द से जल्द पहुंचना जरूरी है।
महागठबंधन में आरजेडी चाहती है कि कांग्रेस को इस बार 60 से 65 सीटों पर सीमित किया जाए जबकि जेडीयू ने पहले ही कह दिया है कि वह बीजेपी से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी। इधर छोटे दल हम, लोजपा (रामविलास) और लेफ्ट पार्टियां भी बढ़-चढ़कर अपनी डिमांड रख रही हैं।

NDA में सीट शेयरिंग पर मामला लगभग तय
एनडीए में सीट शेयरिंग के बारे में कहा जा रहा है कि स्थिति लगभग बिल्कुल साफ है और श्राद्ध पक्ष खत्म होते ही इसका ऐलान कर दिया जाएगा। बीजेपी सभी सहयोगी दलों को साथ लेकर चलना चाहती है और इसलिए अपने कोटे में कुछ छोटे दलों को समायोजित कर सकती है। सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि एलजेपी (आर) प्रमुख चिराग पासवान और अमित शाह की अहम बैठक हुई है। बीजेपी के कुछ उम्मीदवार एलजेपी के कोटे से चुनाव लड़ सकते हैं। नीतीश कुमार पहले ही कह चुके हैं कि वह बीजेपी से कम से कम एक सीट से ज्यादा पर चुनाव लड़ेंगे और इसके लिए गठबंधन के अंदर आपसी सहमति का माहौल बनाया जा रहा है।
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Mahagathbandhan के सामने कांग्रेस को मनाना बड़ी चुनौती
सबसे बड़ी चुनौती महागठबंधन के सामने है। कांग्रेस को आरजेडी 60 से ज्यादा सीटें नहीं देना चाहती हैं और दूसरी ओर वोट अधिकार यात्रा की सफलता से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह है। कांग्रे हाईकमान के लिए अपने कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेतृत्व को मनाने की बड़ी जटिल चुनौती है। इसके अलावा, वामपंथी दल भी पिछले चुनाव की स्ट्राइक रेट का हवाला देते हुए ज्यादा सीटें मांग रहे हैं। आरजेडी पर दबाव बनाने के लिए कांग्रेस ने अब तक खुले तौर पर तेजस्वी यादव को सीएम उम्मीदवार घोषित नहीं किया है।
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Bihar Chunav में सीट बंटवारा क्यों है अहम?
बिहार में फिलहाल दो बड़े गठबंधन हैं और प्रशांत किशोर की पार्टी भी मैदान में है। इस त्रिकोणीय मुकाबले में समय रहते उम्मीदवारों का ऐलान और सीट समझौता जरूरी है। अगर समझौते की राजनीति सही समय पर नहीं हुई, तो यह चुनावी समीकरण बदल सकता है। कार्यकर्ताओं के बीच असमंजस की स्थिति रहेगी और इससे बूथ मैनेजमेंट प्रभावित हो सकता है।












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