Bihar Chunav: Prashant Kishor का बड़ा दावा, '150 सीटें जीतेंगे नहीं तो 10 से भी कम पर रह जाएंगे'
Bihar Chunav Prashant Kishor: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल और नेता अपनी पार्टी की जीत का दावा कर रहे हैं। जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर लगातार मैदान में हैं और जमककर पसीना बहा रहे हैं। वह लगातार अपने बयानों की वजह से भी खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं। उन्होंने एक बार फिर ऐसा ही बयान दिया है जिसकी जमकर चर्चा हो रही है। मीडिया चैनल एनडीटीवी के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि 14 नवंबर 2025 को जब नतीजे आएंगे, तब यह साफ होगा कि जनता ने जनसुराज पर कितना भरोसा जताया।
उन्होंने यह भी कहा कि जनसुराज का लक्ष्य सत्ता हासिल करना भर नहीं है। मैं कहना चाहता हूं कि या तो हम 150 सीटें जीतेंगे या फिर 10 से भी कम सीटों पर सीमित रह जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की जनता के लिए रोजगार और पलायन प्रमुख मुद्दे हैं और हमारा फोकस बिहारियों की समस्या हल करना है।

Prashant Kishor ने किया बदलाव का दावा
प्रशांत किशोर ने कहा कि यह चुनाव जनता के विश्वास की असली परीक्षा है। उन्होंने कहा, 'जनसुराज या तो 10 से कम सीटें जीतेगी या 150 से ज्यादा। बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे इस बार ऐतिहासिक होंगे और जनता का वही फैसला सबको मानना होगा। बिहार की जनता लंबे समय से निराश है और अब बदलाव की तलाश में है। लोग जन सुराज को विकल्प के रूप में देख रहे हैं, लेकिन वोट देते वक्त उन्हें भरोसा दिखाना होगा।'
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'Bihar Chunav में जनसुराज एक्स फैक्टर नहीं'
प्रशांत किशोर से जब पूछा गया कि वे खुद चुनाव क्यों नहीं लड़ रहे, तो उन्होंने इसकी भी वजह बताई। उन्होंने कहा, 'मैंने कभी चुनाव लड़ने की घोषणा नहीं की थी। मैंने कहा था कि अगर लड़ूंगा तो करगहर से, लेकिन जनसुराज की जीत या हार मेरे चुनाव पर निर्भर नहीं है। जन सुराज की सफलता किसी व्यक्ति नहीं, बल्कि लोगों की भागीदारी और विश्वास से तय होगी।'
पीके ने कहा, 'बिहार को विकल्प चाहिए'
पीके ने कहा कि राज्य की राजनीति अब तक महागठबंधन और एनडीए के बीच सीमित रही है, लेकिन अब जनता बदलाव चाहती है। लगभग एक-तिहाई मतदाता ऐसे हैं जो दोनों गठबंधनों से निराश हैं। उन्होंने कहा कि जनसुराज 160 से अधिक सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला देने की स्थिति में है। चुनावी रणनीतिकार से नेता बने पीके ने कहा, 'जनसुराज सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि बिहार के पुनर्निर्माण की सामाजिक मुहिम है। मैंने राज्य के लगभग हर जिले का दौरा कर शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी वास्तविक समस्याओं को करीब से समझा है।'
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