Bihar Chunav से पहले Nitish Kumar का सफाई कर्मचारी आयोग के गठन का ऐलान, समझें फैसले से जुड़ा वोटों का गणित
Nitish Kumar News: बिहार में विधानसभा चुनाव में अब तीन महीने से भी कम वक्त का समय बचा है। सीएम नीतीश कुमार एक के बाद एक बड़े ऐलान कर रहे हैं। विधवा पेंशन बढ़ाने से लेकर अगले पांच सालों में एक करोड़ नौकरी का वादा और पत्रकारों के लिए पेंशन जैसे अहम ऐलान कर चुके हैं। इतना ही नहीं अब उन्होंने प्रदेश में सफाई कर्मचारी आयोग के गठन का ऐलान किया है। नीतीश के इस फैसले के पीछे चुनावी वोट गणित का गुणा भाग भी शामिल है।
नीतीश कुमार ने फैसले की जानकारी देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि सफाई कर्मचारियों के बेहतर भविष्य के लिए आयोग का गठन किया जाएगा। इससे उनके मुद्दों को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा और सम्मानजनक जीवन जीने की दिशा में यह एक और कदम साबित होगा। नीतीश के इस फैसले के पीछे के राजनीतिक समीकरण समझते हैं।

Nitish Kumar की नजर बड़ी आबादी के वोट बैंक पर
सीएम ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि बिहार राज्य में सफाई कर्मचारियों के अधिकारों एवं हितों की सुरक्षा, कल्याण, पुनर्वास, सामाजिक उत्थान, शिकायतों के निवारण तथा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी सुनिश्चित करने के लिए मैंने बिहार राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के गठन का विभाग को निर्देश दिया है।'
बिहार में करीब 1.25 लाख सफाई कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें एक बड़ा हिस्सा नगर निकायों और पंचायतों में दैनिक मजदूरी या अनुबंध पर कार्य करता है। आम तौर पर सफाई कर्मचारी के तौर पर काम करने वाले बहुसंख्यक कर्मचारी सामाजिक पायदान में निचले वर्ग से आते हैं। इन 1.25 लाख सफाई कर्मचारियों के अलावा बड़े पैमाने पर असंगठित क्षेत्र में भी सफाई का काम करने वाले लोग शामिल हैं। इस योजना के जरिए नीतीश सरकार की कोशिश अपनी कल्याणकारी छवि समाज के वंचित वर्ग तक पहुंचाने की है।
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Bihar Chunav में दलित वोट बैंक पर पकड़ मजबूत करने की रणनीति
सफाई कर्मचारी समुदाय ज्यादातर महादलित और अनुसूचित जातियों से आते है। नीतीश कुमार की अब तक की राजनीतिक सफलता के पीछे बड़ा हाथ दलित और महादलित वोट बैंक और महिलाओं से मिला समर्थन रहा है। 2025 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले महादलित वोट बैंक को अपने साथ जोड़कर रखना नीतीश और एनडीए दोनों के लिए जरूरी है। यह आयोग इस वर्ग को सरकार के करीब लाने का माध्यम बन सकता है।
विपक्ष के सामाजिक न्याय एजेंडे की काट
तेजस्वी यादव और विपक्षी पार्टिया सामाजिक न्याय की राजनीति को आधार बना रही हैं। कांग्रेस और राहुल गांधी खास तौर पर ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधित्व और भागीदारी की बात कर रहे हैं। ऐसे में सफाई कर्मचारियों के लिए आयोग बनाकर नीतीश सरकार सामाजिक न्याय के मुद्दे पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
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स्थानीय निकायों में राजनीतिक विस्तार की योजना
नगर निकाय चुनावों में सफाई कर्मचारी समुदाय की भागीदारी महत्वपूर्ण रही है। आयोग के जरिए सरकार इस समुदाय को राजनीतिक रूप से प्रशिक्षित और समर्थ बनाकर अपने पक्ष में लामबंद करना चाहती है। चुनाव से पहले नीतीश कुमार सभी वर्गों के लिए बड़े ऐलान कर रहे हैं। महिलाओं को ध्यान में रखकर राज्य की सभी सरकारी सेवाओं, संवर्गों और सभी स्तरों के पदों पर सीधी नियुक्ति में 35% आरक्षण का भी ऐलान किया है। अब देखना है कि इस फैसले का दूरगामी असर कहां तक पड़ता है।












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